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शिक्षा को लेकर सड़कों पर जेन-जी, पुलिस ने रबर की गोलियां चलाईं; PM के इस्तीफे की मांग

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Source :- LIVE HINDUSTAN

यूरोपीय देश अल्बानिया में जेन जी सड़कों पर आ गए हैं। शिक्षा व्यवस्था में खराबी और बढ़ती बेरोजगारी के चलते युवाओं ने प्रधानमंत्री रामा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विरोध को दबाने के लिए पुलिस ने रबर बुलेट्स को फायर किया है।

यूरोप के बाल्कन प्रायद्वीप पर बसे अल्बानिया में जेन- जी सड़कों पर उतर आए हैं। सरकार में भ्रष्टाचार और शिक्षा मंत्रालय में घोटाले को लेकर पिछले पांच दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्र शुक्रवार को हिंसक हो गए। प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग करते हुए छात्रों ने सरकारी इमारतों और बैंकों में आग लगा दी। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने रबर की गोलियां फायर कीं और अन्य संयमित हथियारों का भी उपयोग किया। इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच में तनाव बढ़ गया है।

इस मामले में जानकारी देते हुए अल्बानिया का प्रमुख पुलिस अधिकारी स्केंडर हिता ने रबर की गोलियां चलाने से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जो भी तरीके अपनाए गए हैं उन्हें सीमित दायरे में ही इस्तेमाल किया गया है।” इसके साथ ही हिता ने बताया कि प्रदर्शनकारियों के साथ अपने अधिकारियों का गलत प्रयोग करने पर सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने उचित बल प्रयोग के सिद्धांत का पालन नहीं किया।

एक हजार से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए

हिता ने बताया कि इस प्रदर्शन के दौरान अभी तक 1,067 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा 388 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इस पूरे प्रदर्शन के दौरान कई आंदोलनकारी और पुलिसवाले घायल भी हुए हैं। बाल्कन प्रायद्वीप पर बसा यह देश कथित भ्रष्टाचार और नौकरियों की कमी से जूझ रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि देश में शिक्षा का स्तर बेहद खराब स्तर पर पहुंच गया है।

प्रधानमंत्री रामा का इस्तीफा देने से इनकार

छात्रों और प्रदर्शनकारियों के इस गुस्से का सबसे बड़ा निशाना प्रधानंत्री एडी रामा बने हैं, जिन्होंने हाल ही में अपने चौथे कार्यकाल की शुरुआत की है। पिछले हफ्ते जब उनसे प्रदर्शनकारियों के दबाव में इस्तीफा देने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इससे साफ तौर पर इनकार किया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के विरोध का सम्मान करती है। लेकिन इस्तीफा नहीं होगा। एक फेसबुक लाइव के दौरान अपनी बात रखते हुए रामा ने कहा, “इस मुश्किल समय में मेरी जिम्मेदारी और भी स्पष्ट हो जाती है… अपने नागरिकों की रक्षा करना, न्याय सुनिश्चित करना और अल्बानिया को आगे ले जाना। यह काम मैं अपने सत्ताधारी बहुमत के साथ मिलकर कर रहा हूँ, जिसे एक स्पष्ट जनादेश मिला है। 2030 तक अल्बानिया को यूरोपीय संघ का हिस्सा बनाना।”

बता दें, अल्बानिया लंबे समय से यूरोपीय संघ का हिस्सा बनने का प्रयास कर रहा है। मोंटेनेग्रो के साथ यह देश यूरोपीय संघ में शामिल होने की प्रक्रिया में सबसे आगे है।

डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर का ऐंगल

अल्बानिया में जारी इस प्रोटेस्ट का संबंध डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर द्वारा एक रिसॉर्ट बनवाने के साथ शुरू हुए थे। देश की रामा सरकार के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। विरोधियों का कहना है कि अल्बानिया उन गिरोहों का केंद्र बन गया है जो नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी से कमाए गए काले धन को सफेद (मनी लॉन्ड्रिंग) करना चाहते हैं। इससे अल्बानिया के यूरोपीय संघ में शामिल होने के प्रयासों में मुश्किलें आ रही हैं।

ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर ने जब यहां पर तटीय इलाके में जमीन खरीदी, तो किसानों ने उसका जमकर विरोध किया। किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी जमीनको गलत तरीके से बेचा गया है। लंबे विरोध के बाद सामने आया कि जिस व्यक्ति ने यह जमीन बेची थी, वह नशीले पदार्थों की तस्करी के संदेह में जांच एजेंसियों को वांछित था। हालांकि, उसके वकील ने इन आरोपों से इनकार किया है। हालांकि, कुशनर के खिलाफ इस मामले में कोई सबूत नहीं मिला और न ही वह ग्रामीणों से सीधे तौर पर विवादों में शामिल थे। अल्बानिया के प्रधानमंत्री रामा ने भी इस मामले में किसी तरह की गड़बड़ी होने से इनकार किया था।

बता दें, अल्बानिया में यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है, जब यूरोप के कई देशों में ऐसे प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। फ्रांस में, अधिक शिक्षकों और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब एक व्यापक अशांति का रूप ले चुका है। स्पेन में भी ऊंचे किराए और आवास की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिसके चलते सरकार को समय से पहले चुनाव (स्नैप इलेक्शन) कराने का फैसला लेना पड़ा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN