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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ डीजल डील कर ली है। यूक्रेन और उसके समर्थकों के बीच में इस फैसले को लेकर नाराजगी है, तो वहीं रूस ने इसे एक ऐतिसाहिक क्षण करार दिया है। ट्रंप ने लिंडसे ग्राहम एक्ट को भी निलंबित कर दिया है।
अमेरिका और रूस के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। यूक्रेन के साथ युद्ध के पहले से दुनिया भर पर रूसी तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगा रहे वाशिंगटन ने अब रूस से डीजल खरीदने का समझौता किया है। इतना ही नहीं वैश्विक रूप से कच्चे तेल की कीमतों को कम करने के लिए ट्रंप ने बाकी देशों के ऊपर भी दबाव न डालने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में पारित किए गए लिंडसे ग्राहम एक्ट को निलंबित कर दिया। इस एक्ट के तहत ईरान और रूस से तेल खरीदने वाले देशों के ऊपर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने की बात कही जा रही थी। रूस की तरफ से इस फैसले को ऐतिहासिक क्षण बताया जा रहा है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दूत दिमित्री पेसकोव ने इस फैसले को ऐतिसाहिक करार दिया। उन्होंने लिखा , “ट्रंप प्रशासन द्वारा ग्राहम एक्ट को निलंबित करना एक महत्वपूर्ण और ऐतिसाहिक कदम है।” उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए लिखा, “प्रतिबंधों और टकराव के बजाय हमें बातचीत और आपसी लाभ वाले सहयोग और वैश्विक स्थिरता के लिए साझा जिम्मेदारी की आवश्यकता है।” पेसकोव की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘नेशनल इंटरेस्ट’ का हवाला देते हुए रूसी तेल की नीति पर 360 टर्न लिया है। कुछ समय पहले तक रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ ठोकने वाले ट्रंप अब अमेरिका के लिए रूसी डीजल को ही विकल्प बनाते नजर आ रहे हैं।
पुतिन के साथ ट्रंप की डीजल डील
यूक्रेन के मुद्दे पर रूस पर दबाव डालने के लिए ट्रंप ने भारत और चीन पर टैरिफ लगाए थे। ट्रंप वहीं नहीं रुके अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने लिंडसे और ग्राहम एक्ट पर भी साइन किए, जिसमें रूस और ईरान से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के ऊपर 100 टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया था। लेकिन पिछले रविवार को कुछ ऐसा हुआ, जिसने अमेरिका सहित पूरी दुनिया के राजनीतिज्ञों के कान खड़े कर दिए। अमेरिका के राष्ट्रपति ने ऐलान किया कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ डीजल की डील की है। इसके तहत रूस तुरंत 300,000 टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में वह एक बार फिर से 500,000 टन डीजल देगा। इसे बाद एक मिलियन और फिर उसके बाद उसकी क्षमता के आधार पर वैश्विक बाजार में वह डीजल की आपूर्ति करता रहेगा।
ट्रंप द्वारा इस ऐलान के बाद अमेरिका से लेकर यूरोप तक इस फैसले की आलोचना की गई। हालांकि, होर्मुज संकट से जूझ रहे देशों के लिए यह फैसला एक राहत की बात है। लेकिन फिर भी पिछले 5 सालों से यूक्रेन का साथ दे रहे देशों ने इसे एक धोखे के तौर पर लिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने खुले आम इसकी आलोचना की और इसे एक कमजोर फैसला करार दिया।
डोनाल्ड ट्रंप की मजबूरी बना रूस का डीजल
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के पीछे उनकी मजबूरी इस बात से समझी जा सकती है कि वह एक महीने पहले ही चीन और भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे थे। रूसी तेल को लेकर उनका प्रशासन लगातार कड़वी जबान बोल रहा था। अमेरिकी सीनेटर भारत और दूसरा ऑप्शन देखने की चेतावनी दे रहे थे। लेकिन मिड टर्म इलेक्शन में लोगों की नाराजगी ने ट्रंप को अपने विचार बदलने के लिए मजबूर कर दिया।
दरअसल, अमेरिका में ज्यादातर सामान ट्रकों के जरिए ही एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है। ऐसे में डीजल की कीमतें यहां पर बहुत ज्यादा मायने रखती हैं। ईरान युद्ध और रूस के तेल पर लगे प्रतिबंध की वजह से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर हैं। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप के सामने रूस के तेल के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। अमेरिका भी कच्चे तेल का एक बड़ा उत्पादक है। लेकिन तेल की कीमतें वैश्विक बाजार पर निर्भर करती हैं। इसलिए ट्रंप को अमेरिका में तेल की कीमतें कम करने के लिए पूरे वैश्विक बाजार पर असर करना होगा। इसमें रूस से बड़ा प्लेयर कोई नहीं है।
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