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भारत का राष्ट्रगीत वंदे मातरम् हर जुबां पर चढ़ा हुआ है और इसके बोल-धुन देशभक्ति का जोश भर देती है। चलिए आज हम आपको वंदे मातरम् से जुड़ा इतिहास और इससे जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।
वंदे मातरम् कभी न कभी सभी ने गुनगुनाया ही है, ये सिर्फ एक गीत नहीं है बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की शान रहा है। इस गीत ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया और अब इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह राष्ट्रीय गीत पहली बार लाल किले की ऊंचाई से गाया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस की शुरुआत में ही इस गीत को गाया जाएगा और उसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी तिरंगा फहराएंगे। वंदे मातरम् सिर्फ गीत तक सीमित नहीं रहा बल्कि ये स्वतंत्रता सेनानियों का नारा भी बन गया था। आज हम आपको इसके इतिहास और इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताएंगे।
कहां से मिली वंदे मातरम् लिखने की प्रेरणा
वंदे मातरम् गीत को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था। इसके बाद उन्होंने अपने अमर उपन्यास ‘आनंदमठ’ में इसे शामिल किया जो 1882 में प्रकाशित हुई थी। ब्रिटिश शासन ने आदेश दिया कि भारत में गॉड सेव द क्वीन नाम का गाना गाया जाएगा। इसे गाना उन्होंने अनिवार्य कर दिया था, ये बात बंकिम चंद्र को बिल्कुल पसंद नहीं आई। उस वक्त वह सरकारी सेवा में कार्यरत थे। उन्हें सुनकर बुरा लगा कि भारतीय धरती पर विदेशी गाना क्यों गाया जाएगा और बस इसी गुस्से, विदेशी गीत के विरोध और देश की स्वाभिमान में उन्होंने वंदे मातरम् लिख दिया। जब ये गीत आनंदमठ में छपा तब ही से स्वतंत्रता सेनानियों के लिए खास बन गया।
ऐसे बना राष्ट्रीय गीत और इसका महत्व
बंकिम चंद्र चटर्जी ने इस गीत के शुरुआती दो पैरा संस्कृत भाषा में लिखे थे, जबकि बाकी की रचना बंगाली में की गई थी। अरबिंदो घोष ने इसका अंग्रेजी अनुवाद किया और आरिफ मोहम्मद खान ने इसका उर्दू अनुवाद किया। तो वहीं, इस गीत को सुर और ताल देने का श्रेय महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर को जाता है। 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार सार्वजनिक रूप से इसे गाया गया था। आजादी के बाद 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ ही ‘वंदे मातरम’ को भी भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया। बता दें, 1906 में बिपिन चंद्र पाल और अरविंदो के संपादन में बंदे मातरम् अखबार शुरू किया गया, जिसने देश में आत्मनिर्भरता, एकता और स्वतंत्रता की मशाल जला दी।
गीत से हिली ब्रिटिश हुकूमत
वंदे मातरम् स्कूलों में गाया जाने लगा और इसके जरिए भारतीयों की एकता देकर अंग्रेज डर गए थे। उन्होंने इस गीत पर रोक लगाने और गाने वालों को कई दंड दिए लेकिन इसकी गूंज नहीं रुकी। बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत क्रांतिकारियों की शक्ति और जोश का प्रतीक बना।
वंदे मातरम् का सम्मान करना जरूरी
राष्ट्रगान जन गण मन की तरह ही वंदे मातरम् का सम्मान भी करना हर एक नागरिक का कर्तव्य हैं। अगर इसके सम्मान की अवहेलना की जाती है, तो कानूनी रूप से सजा भी मिल सकती है। राष्ट्रगीत का अपमान करने पर करीब 1 साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। नियमों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को जबरन वंदे मातरम गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता लेकिन उसे गाने के दौरान बाधा डालने या फिर उसे लेकर अपशब्द कहने पर सजा का प्रावधान है।
यहां पढ़ें वंदे मातरम् के लिरिक्स
वंदे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यशामलां मातरम् ।
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं
सुखदां वरदां मातरम् ॥
वंदे मातरम् ।
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले,
अबला केन मा एत बले ।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदलवारिणीं मातरम् ॥
वंदे मातरम् ।
तुमि विद्या, तुमि धर्म तुमि हृदि,
तुमि मर्म त्वं हि प्राणा:
शरीरे बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम् ॥
वंदे मातरम् ।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदलविहारिणी वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वाम् नमामि कमलां
अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम् ॥
वंदे मातरम् ।
श्यामलां सरलां सुस्मितां
भूषितां धरणीं भरणीं मातरम् ॥
वंदे मातरम् ॥
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