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आपका नॉमिनी पहले गुजर गया तो आपके पैसे का क्या होगा? ये गलती पड़ सकती है भारी, जानिए पूरा नियम

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अगर आपने अपने बैंक खाते, म्यूचुअल फंड, शेयर, डीमैट अकाउंट या लाइफ इंश्योरेंस में किसी व्यक्ति को नॉमिनी बनाया है और दुर्भाग्य से उस व्यक्ति की मृत्यु आपसे पहले हो जाती है, तो आपके निवेश या पैसे पर आपका अधिकार खत्म नहीं होता। आपके नाम पर मौजूद म्यूचुअल फंड, शेयर, डीमैट होल्डिंग्स और बैंक जमा पहले की तरह आपके ही रहते हैं। आप इन निवेशों में पैसा लगाना, निकालना, शेयर खरीदना-बेचना या म्यूचुअल फंड रिडीम करना जारी रख सकते हैं। लेकिन यहां एक ऐसी बात है, जिसे बहुत से लोग नजरअंदाज कर देते हैं। नॉमिनी की मृत्यु के बाद आपके खाते में मौजूद पुरानी नॉमिनेशन व्यवस्था अपने आप किसी दूसरे परिवार के सदस्य के नाम ट्रांसफर नहीं होती, यानी आपका अकाउंट बिना वैलिड नॉमिनी के रह सकता है। जब तक आप खुद नया नॉमिनी दर्ज नहीं कराते, यह स्थिति बनी रह सकती है।

कोई दूसरा व्यक्ति अपने आप नहीं बनता नॉमिनी

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नॉमिनी की मृत्यु होने पर उसकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति अपने आप नॉमिनी नहीं बन जाता। उदाहरण के लिए, अगर आपने अपने बैंक खाते में अपने भाई को नॉमिनी बनाया था और उनकी मृत्यु आपसे पहले हो गई, तो नॉमिनेशन अपने आप आपके दूसरे भाई, पत्नी, बच्चे या किसी अन्य रिश्तेदार के नाम नहीं हो जाएगा। इसी तरह अगर आपने म्यूचुअल फंड या डीमैट अकाउंट में किसी व्यक्ति को नॉमिनी बनाया था और वह अब जीवित नहीं है, तो आपको नई नॉमिनेशन दर्ज करनी चाहिए। डेली के इस्तेमाल में इस बदलाव का पता नहीं चलता, क्योंकि अकाउंट वैसे ही चलता रहता है। असली परेशानी तब सामने आ सकती है, जब अकाउंट होल्डर की भी मृत्यु हो जाए और रिकॉर्ड में कोई वैलिड नॉमिनी मौजूद न हो।

ऐसी स्थिति में परिवार के लिए पैसे या निवेश का दावा करना ज्यादा मुश्किल और समय लेने वाला हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वैलिड नॉमिनेशन के हो जाती है, तो उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को संबंधित संपत्ति पर अपना दावा साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। परिस्थितियों के आधार पर लीगल कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण-पत्र, उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र या विल के प्रोबेट जैसी प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ सकती है। इससे परिवार को कागजी कार्रवाई, अदालत, वकील और अतिरिक्त समय का सामना करना पड़ सकता है। खासकर तब जब परिवार पहले से ही भावनात्मक मुश्किल दौर से गुजर रहा हो, निवेश और बैंक खातों का दावा करना काफी परेशानी वाला काम बन सकता है।

समस्या से बचने का तरीका

इस समस्या से बचने का तरीका बेहद आसान है। अगर आपका नॉमिनी आपसे पहले गुजर चुका है, तो अपने बैंक, म्यूचुअल फंड हाउस, डीमैट अकाउंट या ब्रोकर के रिकॉर्ड में जाकर नई नॉमिनेशन दर्ज करें। आज ज्यादातर वित्तीय संस्थान ऑनलाइन नॉमिनेशन अपडेट करने की सुविधा देते हैं। संबंधित प्लेटफॉर्म के ग्राहक पोर्टल या ऐप में नॉमिनेशन से जुड़ा विकल्प देखकर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। जहां ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां निर्धारित नॉमिनेशन फॉर्म भरकर जमा किया जा सकता है, यानी कुछ मिनट की यह छोटी-सी प्रक्रिया भविष्य में आपके परिवार को बड़ी कानूनी और प्रशासनिक परेशानी से बचा सकती है।

अपनी नॉमिनेशन डिटेल्स जरूर जांचें

नॉमिनी को केवल एक बार अपडेट करके भूल जाना भी सही तरीका नहीं है। जीवन में बड़े बदलाव होने पर नॉमिनेशन की समीक्षा करना जरूरी है। शादी, बच्चे का जन्म, परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु, तलाक या पारिवारिक परिस्थितियों में बड़े बदलाव के बाद अपनी नॉमिनेशन डिटेल्स जरूर जांचें। उदाहरण के लिए अगर आपने 10 साल पहले अपने माता-पिता में से किसी एक को नॉमिनी बनाया था और अब आपकी पारिवारिक स्थिति बदल चुकी है, तो पुरानी नॉमिनेशन आपके वर्तमान इरादे के अनुरूप नहीं भी हो सकती है। इसलिए नॉमिनेशन को मोबाइल नंबर या पते की तरह समय-समय पर अपडेट करना एक अच्छी वित्तीय आदत है।

लाइफ इंश्योरेंस में थोड़ा अलग नॉमिनेशन का मामला

लाइफ इंश्योरेंस में नॉमिनेशन का मामला थोड़ा अलग होता है। जीवन बीमा पॉलिसी में नॉमिनी को पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद मिलने वाले बीमा लाभ के लिए नामित किया जाता है। अगर पॉलिसी में दर्ज नॉमिनी की मृत्यु पॉलिसीधारक से पहले हो जाती है, तो पॉलिसीधारक को बीमा कंपनी से संपर्क करके नॉमिनेशन को अपडेट करना चाहिए। नई नॉमिनेशन दर्ज करने पर पुरानी नॉमिनेशन की जगह नई व्यवस्था लागू हो सकती है। पॉलिसीधारक अपनी परिस्थितियों के अनुसार परिवार के सदस्य या अन्य पात्र व्यक्ति को नॉमिनी बना सकता है। नाबालिग को नॉमिनी बनाने की स्थिति में आम तौर पर गार्जियन की जानकारी भी देनी होती है। अगर कोई वैलिड नॉमिनेशन मौजूद नहीं है, तो बीमा राशि का भुगतान लागू कानून और पॉलिसी के नियमों के अनुसार कानूनी उत्तराधिकारियों को किया जा सकता है।

स्पष्ट और वैध वसीयत

यह भी समझना जरूरी है कि नॉमिनी और कानूनी उत्तराधिकारी हमेशा एक ही चीज नहीं होते। नॉमिनेशन मुख्य रूप से वित्तीय संपत्ति के दावे और हस्तांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए होती है, जबकि अंतिम उत्तराधिकार का सवाल वसीयत और लागू उत्तराधिकार कानूनों से जुड़ सकता है। इसलिए बड़ी संपत्ति रखने वाले लोगों को नॉमिनेशन के साथ-साथ एक स्पष्ट और वैध वसीयत बनाने पर भी विचार करना चाहिए।

इसलिए आज ही अपने सभी वित्तीय खातों की एक छोटी-सी जांच करें। बैंक अकाउंट, म्यूचुअल फंड, डीमैट अकाउंट, PPF, बीमा पॉलिसी और अन्य निवेशों में जाकर देखें कि नॉमिनी कौन दर्ज है और क्या वह अभी भी सही व्यक्ति है। अगर आपका नॉमिनी आपसे पहले गुजर चुका है या आपकी पारिवारिक परिस्थितियां बदल गई हैं, तो नॉमिनेशन अपडेट करने में देरी न करें। कुछ मिनट का यह काम भविष्य में आपके परिवार को महीनों की परेशानी से बचा सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN