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इजरायल में नेतन्याहू को झटका, वोट चोरी के आरोपों को नहीं मिला भाव; हाथ से छूटेगी सत्ता?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की परेशानी बढ़ती जा रही है। चुनाव समिति ने वोट चोरी के आरोपों के बाद भी चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रखने का निर्देश दिया है। दूसरी तरफ गादी आइजेनकोट और अरब पार्टियों के बीच में समर्धन की संभावना बन रही है।

इजरायल में नेतन्याहू को झटका, वोट चोरी के आरोपों को नहीं मिला भाव; हाथ से छूटेगी सत्ता?

इजरायल चुनाव प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक कड़ी परीक्षा साबित हो रहे हैं। मतगणना पूरी होने के बाद उनकी लिकुड पार्टी सबसे बड़ा दल बनकर उभरा है, लेकिन उनका गठबंधन एक बार फिर से बहुमत हासिल करने में पीछे रह गया। नेतन्याहू के गठबंधन को कुल मिलाकर 53 सीटें मिलने की संभावना है। वह इस समय इजरायल में बहुमत से सबसे करीब हैं, लेकिन फिर भी दूर हैं। नेतन्याहू को दूसरा झटका, इजरायल की चुनाव समिति की तरफ से लगा है। उन्होंने नतीजे सामने आने के बाद वोट चोरी का आरोप लगाया था। लिकुड को उम्मीद थी कि जांच होने तक चुनावी नतीजे आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किए जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिन बेट की जांच के दौरान मतगणना पूरी हो चुकी है और 4 नवंबर को आधिकारिक तौर पर आंकड़े जारी कर दिए जाएंगे।

इजरायल में इस वक्त प्रधानमंत्री पद के दावेदावों में नेतन्याहू सबसे आगे चल रहे हैं। लेकिन उनके विपक्षी उन्हें एक और मौका नहीं देना चाहते। लेकिन दो मुख्य गठबंधनों के सामने सबसे बड़ी समस्या अरब पार्टियां हैं। गादी आइजेनकोट और नेतन्याहू दोनों के गठबंधन यह नहीं चाहते कि उन्हें अरब पार्टियों के सहारे सत्ता हासिल करनी पड़े। क्योंकि अंदेशा है कि अगर ऐसा किया जाता है, तो सरकार की नीतियों पर फर्क पड़ सकता है। अरब पार्टियों द्वारा 19 सीटें जीतने की संभावना है। इस चुनाव में वह किंग मेकर बनकर उभरे हैं।

क्या साथ आ सकते हैं गादी आइजेनकोट और नेतन्याहू?

अरब पार्टियों के किंगमेकर की भूमिका में आने के बाद एक धड़ा इस बात पर भी जोर दे रहा था कि गादी आइजेनकोट और नेतन्याहू को साथ में आकर सरकार बनानी चाहिए। इसमें तमाम तरह की बातें सामने आई थीं। पहली परिस्थिति में नेतन्याहू और गादी के बीच में प्रधानमंत्री पद के कार्यकाल का बंटवारा कर दिया जाएगा। इसके अलावा बाकी पदों को लेकर भी दोनों गठबंधन में एक व्यापक बंटवारा किया जाएगा। इसके अलावा दूसरी परिस्थिति में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ही बने रहेंगे, लेकिन गादी को भी एक बड़ा पद दिया जाएगा।

लेकिन नेतन्याहू समर्थक खेमे की तरफ से दिए जा रहे इन प्रस्वातों को गादी की तरफ से भाव मिलने की उम्मीद नहीं है। क्योंकि गादी आइजेनकोट पहले ही इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि वह नेतन्याहू के साथ काम नहीं करने वाले। ऐसे में इन दोनों धड़ों के बीच में एक होने की संभावना नजर नहीं आती है। हालांकि, युद्ध के दौरान नेतन्याहू के सर्मथक रहे नफ्ताली बेनेट ने गादी आइजेनकोट से मुलाकात कर आगे की स्थिति के बारे में बात की है।

नेतन्याहू के हाथ से जाएगी सत्ता?

इजरायल में अब पूरा मामला राष्ट्रपति इसाक हजोर्ग के ऊपर है। वह जल्दी ही तमाम पार्टियों को नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेतन्याहू के विरोधी किसी भी हाल में एक बार फिर से उन्हें सत्ता सौंपने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में ऐसी संभावना जताई जा रही है कि गादी आइजेनकोट अरब पार्टियों से बाहरी समर्थन लेकर अल्पमत की सरकार बना सकते हैं। हालांकि, राम (Ra’am) पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने इस पर संदेह जताया है। वहीं, सैद्धांतिक रूप से लिकुड और विपक्षी दलों को मिलाकर एक ‘राष्ट्रीय एकता सरकार’ बन सकती है, जिसके पास 66 सीटों का बहुमत हो सकता है। लेकिन, गहरे राजनीतिक मतभेदों को देखते हुए ऐसी सरकार बनने की संभावना बहुत कम है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN