Source :- LIVE HINDUSTAN

पाकिस्तान के अमेरिका का कठपुतली बनने और अफगान शहरों पर हमले के बाद तालिबान अब रूस की ओर झुक गया है। 27 मई को रूस के साथ हस्ताक्षरित महत्वपूर्ण रक्षा-सहयोग समझौते के जरिए तालिबान ने सोवियत युग के पुराने दुश्मन को नया रणनीतिक साझेदार बना लिया है।

अफगानिस्तान में दशकों पुराने भू-राजनीतिक समीकरण फिर से बदलते नजर आ रहे हैं। सोवियत संघ के साथ लंबे युद्ध के बाद रूस ने तालिबान शासन के साथ अपना अब तक का सबसे महत्वपूर्ण रक्षा-संबंधी समझौता कर लिया है। 27 मई को हस्ताक्षरित इस समझौते के समय अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस साल फरवरी में पाकिस्तान द्वारा काबुल, कंधार समेत कई अफगान शहरों पर किए गए सैन्य हमलों के बाद दोनों पड़ोसी देशों के संबंध वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। अमेरिका ने पाकिस्तान की इन कार्रवाइयों का समर्थन करते हुए इसे ‘आत्मरक्षा का अधिकार’ बताया। इसी पृष्ठभूमि में तालिबान ने रूस को रणनीतिक साझेदार के रूप में देखना शुरू किया है।

तकनीकी सहयोग पर आधारित समझौता

समझौते का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन दोनों पक्षों ने इसे अफगानिस्तान में मौजूद सोवियत और रूसी निर्मित सैन्य उपकरणों की रखरखाव, मरम्मत तथा पुनर्स्थापना के लिए तकनीकी ढांचा बताया है। इसमें Mi-17 हेलीकॉप्टरों का बेड़ा भी शामिल है, जो पहले अमेरिका और नाटो द्वारा अफगान वायुसेना को दिए गए थे।

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद और रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु ने 27 मई को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। मुजाहिद ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि दोनों देशों के बीच ये संबंध और मजबूत होंगे। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई सुरक्षा या रक्षा संधि नहीं, बल्कि तकनीकी-सैन्य सहयोग का समझौता है।

वहीं, शोइगु ने कहा कि रूस अफगानिस्तान को एक स्थिर, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण देश के रूप में देखना चाहता है तथा आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ तालिबान के प्रयासों की सराहना करता है।

तालिबान के पास रूसी उपकरणों का विशाल भंडार

तालिबान के शस्त्रागार की मुख्य रीढ़ सोवियत और रूसी मूल के उपकरण हैं, जिनमें Mi-17 हेलीकॉप्टर, कामाज ट्रक, बख्तरबंद वाहन और छोटे हथियार शामिल हैं। इनमें से अधिकांश 2021 में अफगान गणराज्य के पतन के समय तालिबान के कब्जे में आए थे। रूस के विशेष दूत जमीर काबुलोव के अनुसार, अफगानिस्तान के पास अभी भी 100 से अधिक Mi-17 हेलीकॉप्टर और हजारों रूसी भारी वाहन मौजूद हैं।

दोनों का दुश्मन ISKP

रूस और तालिबान के बढ़ते सहयोग का प्रमुख कारण दोनों का साझा दुश्मन इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (ISKP) है। 2024 में ISKP ने मॉस्को के क्रोकस सिटी हॉल पर हमला किया था, जिसमें 151 लोग मारे गए थे। तालिबान भी ISKP को अपने शासन के लिए गंभीर खतरा मानता है। रूस 2017 से ही तालिबान के साथ ISKP के खिलाफ खुफिया जानकारी और हथियारों के मामले में सहयोग कर रहा है। 2025 में रूस ने तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता देने वाला पहला देश बना।

पाकिस्तान-अमेरिका गठबंधन का प्रभाव

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है। तालिबान का मानना है कि अगर पाकिस्तान को वाशिंगटन का निरंतर समर्थन मिलता रहा तो अफगानिस्तान के पास रूस की ओर रुख करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक अब्दुल बसीर बसीरत ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा और साझा हितों की रक्षा के लिए ऐसे समझौते आवश्यक हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN