Home rss business hindi इस बैंक में ₹13.97 करोड़ की सेंधमारी! 187 बार में निकला पैसा;...

इस बैंक में ₹13.97 करोड़ की सेंधमारी! 187 बार में निकला पैसा; जानिए कैसे हुआ पूरा खेल

2
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने आरोप लगाया है कि 15 से 17 अक्टूबर के बीच उसके RBI सेटलमेंट अकाउंट से 187 अनधिकृत ट्रांजैक्शन के जरिए ₹13.97 करोड़ ट्रांसफर किए गए
  • शिकायत के मुताबिक, रकम 36 बैंकों के खातों में पहुंची, जबकि बैंक के आंतरिक सिस्टम में इन लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला

सरकारी बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में करीब ₹14 करोड़ की कथित अनधिकृत निकासी का मामला सामने आया है। बैंक की शिकायत के मुताबिक, 15 से 17 अक्टूबर के बीच 187 ट्रांजैक्शन के जरिए उसके भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सेटलमेंट अकाउंट से कुल ₹13.97 करोड़ दूसरी जगह ट्रांसफर किए गए। यह रकम 36 बैंकों के खातों में पहुंचने की बात कही गई है। मामले में मुंबई के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। बैंक का आरोप है कि हमलावरों ने बैंकिंग लेनदेन में इस्तेमाल होने वाले एक सेंट्रल फाइनेंशियल मैसेजिंग सर्वर तक अनधिकृत पहुंच बनाकर रकम ट्रांसफर की। हालांकि, पैसा निकालने का सटीक तरीका और इसमें शामिल लोगों की पहचान अभी जांच का विषय है।

इस मामले की खास बात यह है कि बैंक की आंतरिक टीम को इन 187 ट्रांजैक्शन का पूरा रिकॉर्ड अपने सामान्य बैंकिंग सिस्टम में नहीं मिला। इससे जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि लेनदेन किस तरह हुए और बैंक के रिकॉर्ड में उनका विवरण क्यों नहीं दिखाई दिया।

187 ट्रांजैक्शन से निकले ₹13.97 करोड़

FIR में दर्ज जानकारी के अनुसार, कथित अनधिकृत ट्रांजैक्शन 3 दिनों में हुए।

तारीख ट्रांजैक्शन की संख्या
15 अक्टूबर 6
16 अक्टूबर 88
17 अक्टूबर 93
कुल 187

बैंक की शिकायत के मुताबिक, इन ट्रांजैक्शन के जरिए रकम उसके RBI के साथ मौजूद सेटलमेंट अकाउंट से निकाली गई। इसके बाद पैसा 36 बैंकों में मौजूद खातों में भेजा गया। बैंक के जनरल मैनेजर (ट्रेजरी) ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पैसा किन खातों में गया, ट्रांजैक्शन किसने किए और रकम ट्रांसफर करने के लिए किस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ।

बैंक के सिस्टम में नहीं मिला 187 ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड

HT की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक की शिकायत में कहा गया है कि उसकी आंतरिक टीम ने सभी प्रमुख बैंकिंग चैनलों की जांच की, लेकिन उसे इन लेनदेन का रिकॉर्ड नहीं मिला। इनमें बैंक की शाखाएं, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और अन्य चैनल शामिल थे। इतना ही नहीं, संबंधित ट्रांजैक्शन बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम, RTGS सेटलमेंट अकाउंट और SFMS सर्वर के रिकॉर्ड में भी नहीं मिले। शिकायत के मुताबिक, SFMS डेटाबेस के लॉग में 10 खातों से जुड़े कुछ संकेत जरूर मिले, लेकिन ट्रांजैक्शन ID बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं थीं। बैंक ने यह भी कहा कि 187 ट्रांजैक्शन में रकम भेजने वाले खातों के रूप में जिन खातों का नाम आया, वे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नहीं थे।

क्या है SFMS सर्वर?

इस मामले में SFMS सर्वर की भूमिका जांच के केंद्र में है। SFMS यानी Structured Financial Messaging System एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए बैंक भुगतान से जुड़े सुरक्षित संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं। इसका इस्तेमाल RBI के RTGS और NEFT जैसे भुगतान सिस्टम से जुड़े संदेश भेजने में होता है। बैंक की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अज्ञात लोगों ने उसके कोर बैंकिंग सिस्टम के SFMS सर्वर के जरिए IFTAS (Indian Financial Technology and Allied Services) के केंद्रीय SFMS सर्वर तक अनधिकृत पहुंच बनाई। IFTAS, RBI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। शिकायत के मुताबिक, इसी कथित सेंधमारी के जरिए बैंक के RBI सेटलमेंट अकाउंट से रकम दूसरी जगह भेजी गई। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सामान्य तौर पर RTGS ट्रांजैक्शन कैसे होता है?

यह समझना जरूरी है कि बैंक के जरिए RTGS भुगतान सामान्य रूप से किस तरह किया जाता है।

1- भुगतान की जानकारी दर्ज होती है

बैंक ग्राहक के भुगतान निर्देश को अपने कोर बैंकिंग सिस्टम में दर्ज करता है और ग्राहक के खाते से रकम डेबिट करता है।

2- RTGS सेटलमेंट अकाउंट में रकम आती है

भुगतान की प्रक्रिया में रकम बैंक के RTGS सेटलमेंट अकाउंट में दर्ज होती है।

3- भुगतान संदेश भेजा जाता है

बैंक का SFMS सर्वर, IFTAS के केंद्रीय SFMS सर्वर को भुगतान संदेश भेजता है। इसके बाद संबंधित सेटलमेंट प्रॉसेस पूरा होता है। बैंक का आरोप है कि इस मामले में इसी व्यवस्था तक अनाधिकृत पहुंच बनाकर सामान्य भुगतान प्रॉसेस को दरकिनार किया गया। जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि कथित सेंधमारी किस स्तर पर हुई और ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड सामान्य सिस्टम में क्यों नहीं मिला।

पुलिस के लिए रकम का पता लगाना क्यों चुनौतीपूर्ण है?

एक पुलिस अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि फिलहाल इन ट्रांजैक्शन के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। अधिकारी के मुताबिक, इससे यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि रकम किस तरह निकाली गई। जांच में 36 बैंकों के खातों, उपलब्ध डिजिटल लॉग, ट्रांजैक्शन से जुड़े संदेशों और दूसरी तकनीकी जानकारियों की मदद से पैसे के फ्लो का पता लगाना महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि रकम बरामद हुई है या नहीं और इस मामले में कितने लोग शामिल हैं।

RBI और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को दी गई जानकारी

बैंक की शिकायत के अनुसार, घटना का पता चलने के बाद उसने RBI और IFTAS को तुरंत जानकारी दी। इसके अलावा, बैंक ने Daksh पोर्टल, NCIIPC (National Critical Information Infrastructure Protection Centre) और CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) को भी सूचित किया। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और किसी दूसरे की पहचान बनाकर अपराध करने से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज किया है। आगे की जांच में कथित अनधिकृत पहुंच के तरीके, रकम के लाभार्थियों और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी।

ग्राहकों के पैसे पर क्या असर पड़ेगा?

बैंक की शिकायत में कहा गया है कि इस कथित धोखाधड़ी से बैंक और उसमें जमा रकम रखने वाले लोगों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि किसी ग्राहक के व्यक्तिगत खाते से सीधे पैसा निकाला गया है या नहीं। इसलिए फिलहाल इस घटना को ग्राहकों के बचत खातों से सीधे रकम चोरी होने का मामला मानना सही नहीं होगा। बैंक और जांच एजेंसियों की ओर से आगे की जानकारी आने पर ही नुकसान की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के RBI सेटलमेंट अकाउंट से ₹13.97 करोड़ की कथित अनधिकृत निकासी का मामला बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। लेकिन रकम कैसे निकाली गई, किसे मिली और क्या तकनीकी खामी या किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल हुआ, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN