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ई20 पेट्रोल से जुड़े किस मामले पर नितिन गडकरी के पक्ष में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाया फ़ैसला

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Source :- BBC INDIA

गडकरी

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पढ़ने का समय: 3 मिनट

बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को उनके द्वारा दायर मामले में अंतरिम राहत दी है.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने और अपने परिवार के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार के ई20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम से जुड़े सोशल मीडिया पर मानहानिकारक और डीपफ़ेक कंटेंट को हटाने की मांग की थी.

हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट अपने प्लेटफ़ॉर्म से हटाने के लिए कहा है.

जस्टिस आरिफ़ डॉक्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और उनकी मध्यवर्ती संस्थाओं को आदेश दिया है कि वो गडकरी के ख़िलाफ़ बदनाम करने वाला और गाली-गलौज वाला कंटेंट हटाएं.

क़ानूनी मामलों को कवर करने वाली वेबसाइट बार एंड बेंच ने बताया है कि नितिन गडकरी ने यह मामला मेटा, एक्स, गूगल/यूट्यूब, सूचना एवं प्रोद्यौगिकी मंत्रालय, डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन्स और “अशोक कुमार/जॉन डो” नाम के अनजान यूज़र्स के ख़िलाफ़ दायर किया था.

हाई कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

बॉम्बे हाई कोर्ट

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कोर्ट ने यह माना है कि गडकरी ने जिन कंटेंट के बारे में बताया है वो घिनौना और गाली-गलौज वाला था.

कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, “इंस्टाग्राम पर ऐसा ही एक ट्रांसक्रिप्ट रील के रूप में मौजूद है. इसके अलावा भी ऐसी सामग्री उपलब्ध है. वादी जिस सामग्री को हटाने की मांग कर रहे हैं, उसके बारे में मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि वह बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक है.”

“ऐसी सामग्री का किसी भी सार्वजनिक मंच पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए, जहां हर कोई, यहां तक कि बच्चे भी, उसे देख सकते हैं. वादी ने अंतरिम राहत देने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है. मेटा और गूगल अदालत में पेश हुए हैं और उन्होंने एग्ज़िबिट-सी में बताई गई सामग्री को हटाने पर सहमति जताई है. उनका यह बयान स्वीकार किया जाता है.”

इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसी सामग्री को हटाया जाए.

अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में गडकरी के संज्ञान में इस तरह की कोई और सामग्री आती है, तो वह इसकी जानकारी संबंधित इंटरमीडियरी कंपनियों को दे सकते हैं. इसके बाद उन कंपनियों को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी.

कोर्ट ने कहा, “अगर भविष्य में वादी के संज्ञान में कोई और मानहानिकारक सामग्री आती है, तो वह इसकी जानकारी प्रतिवादियों को देंगे और वे उस पर कार्रवाई करेंगे.”

मेटा की ओर से पेश वकील ने कहा, “कुछ सामग्री ऐसी भी हो सकती है जिसे उचित आलोचना माना जा सकता है.”

इस पर गडकरी के वकील ने कहा, “मैं किसी को भी उचित आलोचना करने से नहीं रोक रहा हूं.”

जज ने भी कहा, “मैं सहमत हूं कि मामला आलोचना का नहीं है.”

अदालत ने आगे कहा, “अगर भविष्य में कोई और अपमानजनक सामग्री या डीपफेक तस्वीरें सामने आती हैं, तो उनकी जानकारी प्रतिवादियों को दी जाएगी. अगर किसी मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं हो, तो संबंधित पक्ष अदालत का रुख़ करने के लिए स्वतंत्र होंगे.”

अदालत ने गूगल और मेटा से यह भी कहा कि वे ऐसा तंत्र विकसित करें, जिससे हर बार अदालत का रुख़ किए बिना ही ऐसी सामग्री को हटाया जा सके.

अब इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS