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एक इनकार और बदल गया बॉलीवुड का इतिहास! जानिए कैसे मिली मोहम्मद रफी को उनकी पहली पंजाबी फिल्म

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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बॉलीवुड के महान सिंगर मोहम्मद रफी आज की आवाज का जादू आज भी उनके चाहने वालों के ऐसा चढ़ा है कि उसे शायद ही कोई उतार पाए। उनके गानों को आज भी फैंस सुनना पसंद करते हैं। मोहम्मद रफी ने कई बॉलीवुड स्टार्स के लिए गाने देकर उन्हें सुपरहिट बनाया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खुद मोहम्मद रफी को पहली बार गाने का मौका कैसे मिला। अगर नहीं तो चलिए हम बताते हैं कि किसकी वजह से वो आज इंडस्ट्री के महान सिंगर बने।

सहगल के शो में भाई संग पहुंचे थे रफी

मोहम्मद रफी के सिंगर बनने के पीछे के.एल. सहगल का बहुत बड़ा हाथ है। दरअसल, मोहम्मद रफी ने बचपन में गांव में घूमते हुए फकीर के सुरों की नकल करके गाना शुरू किया था। ऐसे में एक बार वो लाहौर के ऑल इंडिया रेडियो पर कुंदन लाल सहगल का शो था। इस शो को देखने के लिए मोहम्मद रफी और उनके भाई भी पहुंचे थे। सभी सहगल की गाना सुनने के लिए बेताब थे। तभी अचानक लाइट चली गई और कुंदन लाल सहगल ने गाने से साफ मना कर दिया।

रफी ने चलाया अपनी आवाज का जादू

कुंदन लाल सहगल के अचानक गाना गाने से मना करने के बाद सभी काफी परेशान हो गए थे। सभी को लगा कि ये कार्यक्रम पूरी तरह से बर्बाद हो गया। ऐसे में बेकाबू भीड़ को काबू में करने के लिए मोहम्मद रफी के भाई ने उनसे कहा कि तुम भी तो गाना गाते हो तुम क्यों नहीं गाते हो। ऐसे में महज 13 साल के मोहम्मद रफी ने पहली बार स्टेज पर गाया।

इस संगीतकार ने पहली बार दिया गाने का मौका

मोहम्मद रफी की गायकी ने उस शो में जान डाल दी। सभी ने उनकी आवाज को बेहद पसंद किया, लेकिन इसी भीड़ में एक ऐसा शख्स मौजूद था, जो उनकी किस्मत बदलने वाला था। इस शो में संगीतकार श्याम सुंदर मौजूद थे, जिन्होंने न सिर्फ मोहम्मद रफी की गायकी को पसंद किया, बल्कि इतने प्रभावित हुए कि उन्हें रफी को अपनी ही पंजाबी फिल्म ‘गुल बलोच’ में गाने का मौका भी दिया, जो साल 1944 में आई थी। रफी ने इस फिल्म का ड्यूट सॉन्ग “गोरिये नी, हीरिये नी” गाया था। बस फिर क्या था, यहीं ये रफी की गायकी का सफर शुरू हो गया। इसके बाद उन्होंने की पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने करियर में रफी ने कई कालजयी गाने गाए, जिसे आज तक कोई भुला नहीं पाया।

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