Source :- LIVE HINDUSTAN
Manu Bhaker Emotional: भारत की स्टार निशानेबाज मनु भाकर बुधवार को एशियन गेम्स 2026 में मेडल नहीं जीत पाईं। वह मेडल से चूकने के बाद जसपाल राणा का जिक्र होने पर इमोशनल हो गईं।
मेडल नहीं जीत पाने के बावजूद मनु भाकर ने खुद को संभाले रखा था लेकिन जैसे ही जसपाल राणा का नाम सामने आया, वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाई और उन्हें उस दिग्गज से मिली करियर और जिंदगी से जुड़ी सीखें याद आ गईं। महान निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का कुछ महीने पहले दिल की बीमारी से निधन हो गया था। भाकर एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में बुधवार को पांचवें स्थान पर रहीं। पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतने वाली भाकर ने क्वालीफाइंग 579 का स्कोर बनाकर तीसरा स्थान हासिल किया था लेकिन फाइनल में वह 181.1 अंक ही बना पाईं। यह 24 वर्षीय खिलाड़ी अब 25 मीटर एयर पिस्टल में भाग लेगी।
‘जब कोई शख्स आपके जीवन…’
पिछले कुछ महीने भाकर के लिए कठिन थे जिसमें उन्होंने अपने कोच राणा को खोया। बुधवार को मेडल से चूकने के बाद राणा के बारे में पूछे जाने पर भाकर ने कहा, ”अगर बीता पूरा सफर याद करूं तो आप एक या दो चीजें याद नहीं रखते। वह सदैव आपकी यादों में रहते हैं। जब कोई शख्स आपके जीवन का अहम हिस्सा हो तो आप भुला नहीं सकते।” राणा के कोच रहते मनु ने पेरिस ओलंपिक 2024 में दो कांस्य पदक जीते थे। तीन एशियाई खेलों में चार स्वर्ण समेत आठ पदक जीत चुके राणा ने दोहा में 2006 में हुए खेलों में तीन स्वर्ण जीते थे। राणा से मिली सबसे बड़ी सलाह के बारे में पूछने पर भाकर ने कहा, ”वह हमेशा प्रक्रिया को लेकर बहुत दृढ़ थे कि आप किसी भी दिन, जिंदगी के किसी भी मोड़ पर, जब भी निशानेबाजी करें, तो आप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें और प्रक्रिया का अनुसरण करें।”
कुछ दिन पहले भी इमोशनल हुई थीं
मनु भाकर ने हाल ही में कहा था कि जसपाल सर की बहुत कमी खली। उन्होंने एशियन गेम्स 2026 के उद्घाटन समारोह के बाद कहा, ”जसपाल सर की बहुत याद आई। उनके साथ नहीं होने से यह दिन वाकई भावुक कर देने वाला था।” राणा ने एक बार भाकर से कहा था कि वह ऐसे समारोहों में तभी शामिल हो सकती हैं, जब वह ध्वजवाहक हों, वर्ना उन्हें समारोह टीवी पर देखना चाहिए क्योंकि आमतौर पर उद्घाटन समारोह के तुरंत बाद उनकी स्पर्धाएं शुरू हो जाती थीं। राणा की वही सलाह शनिवार को भी भाकर को और भावुक बना गई, जब वह खुद मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में भारत की ध्वजवाहकों में से एक बनकर मैदान में उतरीं। प्रसिद्ध निशानेबाज और कोच राणा का जून में 49 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था।
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