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अभिजीत दीपके

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि वो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के लिए देशभर के कई शहरों में युवाओं के साथ प्रदर्शन करेंगे.

अभिजीत दीपके ने एक वीडियो के ज़रिए बयान जारी किया है, जिसमें वो कह रहे हैं कि अगर उसके बाद भी धर्मेंद्र प्रधान शनिवार तक इस्तीफ़ा नहीं देते हैं तो वो देशभर के युवाओं के साथ दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे.

कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था और भीषण गर्मी के बावजूद भी सैकड़ों की संख्या में युवा उनके प्रदर्शन में शामिल हुए थे.

हम इस कहानी में जानेंगे कि अचानक ही शिक्षा, रोज़गार और पेपर लीक के मामले पर अभिजीत दीपके कई युवाओं की आवाज़ कैसे बन गए और सीजेपी बनाने से पहले वो क्या कर रहे थे.

कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को प्रदर्शन कर एक हफ़्ते में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग रखी थी.

अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर कहा, “महज़ एक-दो दिन में हमारे साथ लाखों स्टूडेंट्स होंगे. कॉकरोच जनता पार्टी कोई प्लान की हुई पार्टी नहीं है. ये हर एक स्टूडेंट की आवाज़ है, जो सरकार से नाराज़ है.”

उन्होंने कहा, “10-12 साल से इन लोगों ने हमें हिंदू-मुसलमान की राजनीति में फँसा कर रखा, इससे किसे फ़ायदा हुआ? क्या हिंदू-मुसलमान करने से देश में किसी को भी नौकरियां मिलीं?”

अभिजीत दीपके का बयान

अभिजीत दीपके कौन हैं?

कॉकरोच जनता पार्टी बनाने के बाद अभिजीत दीपके भारत में सियासी गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गए हैं, हालाँकि उन्होंने ख़ुद आधिकारिक तौर पर कोई राजनीतिक दल नहीं बनाया है.

अभिजीत दीपके मीम और सोशल मीडिया पर मज़ाकिया अंदाज़ में शुरू किए गए कैंपेन के बाद सुर्खियों में आए हैं.

30 साल के अभिजीत दीपके मूल रूप से महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर से ताल्लुक रखते हैं. वह बीते क़रीब दो साल से अमेरिका में रह रहे हैं.

बीबीसी मराठी से बातचीत में अभिजीत दीपके ने बताया था कि उन्होंने पुणे से ग्रैजुएशन किया है.

अभिजीत दीपके क़रीब तीन साल तक आम आदमी पार्टी से भी जुड़े रहे. यहाँ उन्होंने पार्टी की कम्युनिकेशन टीम में काम किया.

उन्होंने बताया, “मैंने कुछ समय के लिए उनके साथ काम किया फिर मुझे लगा मुझे और पढ़ने की ज़रूरत है और मैं घर पर मास्टर्स की तैयारी करने लगा. फिर मुझे बोस्टन यूनिवर्सिटी से बुलावा आया.”

अभिजीत दीपके ने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन्स में अपनी मास्टर्स की पढ़ाई की है.

आम आदमी पार्टी के एक सूत्र ने बीबीसी को बताया है कि अभिजीत दीपके पार्टी की मुंबई टीम में थे और साल 2023 में वो छत्रपति संभाजी नगर वापस लौट गए.

अभिजीत दीपके ने बीबीसी मराठी को बताया था, “मैं उनके (आप) स्वास्थ्य और शिक्षा पर काम करने की वजह से उनसे आकर्षित था. ये कुछ नया था जो पहली बार भारतीय राजनीति में हो रहा था. जैसे आज कॉकरोच जनता पार्टी नई है. मैंने कुछ समय के लिए उनके साथ काम किया फिर मुझे लगा मुझे और पढ़ने की ज़रूरत है. और मैं घर पर मास्टर्स की तैयारी करने लगा.”

सीजेपी बनाने से पहले क्या कर रहे थे?

केजरीवाल

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कॉकरोच जनता पार्टी बनाने से पहले भी अभिजीत दीपके सोशल मीडिया पर काफ़ी सक्रिय रहे हैं. उनके राजनीतिक विचारों को समझने के लिए सोशल मीडिया एक्स पर उनकी पुरानी पोस्ट पर नज़र डाली जा सकती है.

उन्होंने एक्स पर कई पोस्ट में आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल से जुड़ी बातों को शेयर किया है.

अभिजीत दीपके सोशल मीडिया पर अरविंद केजरीवाल के पक्ष में स्पष्ट तौर पर नज़र आते हैं. वो अक्सर भारत में आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं.

नीट पेपर लीक और उसके बाद स्टूडेंट्स की मौत पर उन्होंने कई पोस्ट शेयर किए हैं.

अभिजीत दीपके ने एक पोस्ट में यह आरोप भी लगाया है कि क्षेत्रीय दलों ने बीजेपी को साल 2024 के लोकसभा चुनावों में बहुमत हासिल नहीं करने दिया ऐसे दलों को एक-एक कर मिटा दिया जाएगा.

कैसे शुरू हुआ सीजेपी का सफ़र

सूर्यकांत कोट

अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी का सफ़र बहुत ही मज़ाकिया अंदाज़ में शुरू हुआ.

सीजेपी असल में भारत के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी की वजह से बनी है. उनकी इस टिप्पणी के बारे में आमतौर पर माना गया कि उन्होंने देश के बेरोज़गार युवाओं को ‘कॉकरोच’ और परजीवी कहा.

बहुत से लोगों ने इस बात पर नाराज़गी जताई.

हालाँकि बाद में चीफ़ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि वह उन लोगों के बारे में बात कर रहे थे जिन्होंने पेशे में आने के लिए फ़र्ज़ी डिग्रियों का इस्तेमाल किया.

जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी टिप्पणियों पर सफ़ाई जारी करते हुए कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बातों को ग़लत तरीक़े से पेश किया.

लेकिन जस्टिस सूर्यकांत के बयान के बाद एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया कैंपेन की ख़ासी चर्चा शुरू हो गई. इस चर्चा के केंद्र में रही अभिजीत दीपके की ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी).

इंटरनेट पर इसके नाम से वेबसाइट बन गई और इंस्टाग्राम पर इसके 2.2 करोड़ से अधिक फ़ॉलोअर्स हो चुके हैं. बताया गया कि दो लाख से अधिक लोगों ने वेबसाइट पर इसकी सदस्यता के लिए ख़ुद को रजिस्टर्ड किया है.

कॉकरोच जनता पार्टी

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अभिजीत दीपके से बीबीसी न्यूज़ मराठी को बताया, “मैं ट्विटर (अब एक्स) पर सीजेआई (भारत के मुख्य न्यायाधीश) का बयान देख रहा था जहां पर वो सिस्टम की आलोचना करने और राय देने के लिए देश के युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से कर रहे थे.”

“मैंने इसे बेहद हास्यास्पद समझा क्योंकि सीजेआई को देश के संविधान का संरक्षक माना जाता है. वो संविधान जो हर किसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आज़ादी देता है. एक ऐसा शख़्स जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए है, वो कैसे युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से कर सकता है.”

“इसने मुझे ग़ुस्से और निराशा से भर दिया और ट्विटर पर मैंने इस पर अपनी राय दी. मैंने पूछा कि सब कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा. मुझे जेन ज़ी और 25 साल तक के युवाओं के कमाल के जवाब मिले और उन्होंने कहा कि हमें साथ आना चाहिए और एक प्लेटफ़ॉर्म बनाना चाहिए.”

“इसने मुझे आइडिया दिया कि हमें ऑनलाइन एक पैरोडी पार्टी बनानी चाहिए, जिसका नाम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ हो. अगर आप हमें कॉकरोच कह रहे हैं तो ठीक है, हम कॉकरोच जनता पार्टी बनाते हैं.”

उन्होंने कहा, “इस पार्टी में शामिल होने के लिए मैंने पात्रता तय कीं, जैसे- आपको आलसी होना होगा जैसा सीजेआई ने कहा, आपको बेरोज़गार होना होगा और आप लगातार ऑनलाइन रहने वाले हों जैसा सीजेआई ने कहा था.”

“इसके बाद हमें लगने लगा कि ये बड़ा होने वाला है और सिर्फ़ मज़ाक नहीं रह गया है क्योंकि लोग निराश हो चुके थे. इंस्टाग्राम पर हमारे दो मिलियन फ़ॉलोअर्स (अब चार मिलियन से अधिक) हो चुके हैं और दो लाख से ज़्यादा लोगों ने ख़ुद को कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य के तौर पर रजिस्टर किया है. भारतीय राजनीति में ये काफ़ी समय के बाद अभूतपूर्व है.”

आलोचक कॉकरोच जनता पार्टी को विपक्ष से जुड़ा ऑनलाइन राजनीतिक नाटक बताकर ख़ारिज कर देते हैं. वो दीपके का पहले के आप से संंबंध का हवाला देते हुए तर्क देते हैं कि यह अचानक नहीं हुआ बल्कि यह एक सुनियोजित डिजिटल पॉलिटिक्स है.

भारत का जेन ज़ी

जंतर मंतर

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भारत की आबादी दुनिया की सबसे युवा आबादी में से एक है, जहां क़रीब 1.4 अरब लोगों में से आधे लोग 30 वर्ष से कम उम्र के हैं. फिर भी युवाओं की औपचारिक राजनीतिक भागीदारी काफ़ी सीमित है.

दीपके का मानना है, “लोग निराश हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी बात सुनी नहीं जा रही है या उनका प्रतिनिधित्व नहीं किया जा रहा है.”

हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया के कई देशों में युवाओं के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश शामिल हैं. इन प्रदर्शनों के पीछे आमतौर पर बेरोज़गारी, महंगाई और भविष्य को लेकर चिंता मूल वजह थी.

नेपाल में तो जेन ज़ी आंदोलन के बाद सरकार को इस्तीफ़ा देना पड़ा.

श्रीलंका-नेपाल के जेन ज़ी की तुलना भारत के जेन ज़ी से करने पर अभिजीत ने कहा, “भारत के जेन ज़ी की तुलना श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश के जेन ज़ी से करना ‘एक बड़ा अपमान’ होगा क्योंकि वे (भारतीय जेन ज़ी) हिंसा नहीं भड़का रहे हैं.”

वो कहते हैं, “युवा मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से तंग आ चुका है. अगले कुछ सालों में आप देखेंगे कि युवा बदलाव की मांग करेगा क्योंकि पिछले 10-12 सालों में युवा ने ‘हिंदू-मुस्लिम’ उपदेश के अलावा कुछ भी नहीं सुना है.”

उनका मानना है, “युवा इस राजनीतिक व्यवस्था को बदलना चाहता है जहां पर हम तकनीकी रूप से एडवांस्ड हों जहां पर रोज़गार मिले. आगे बढ़ते हुए हम दुनिया के बेस्ट देशों से तुलना करें. हम कब तक नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश से तुलना करते रहेंगे. भारतीय जेन ज़ी ये चाहता है और वो ख़ुद के साथ कॉकरोच की तरह व्यवहार नहीं चाहता है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS