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आपको बता दें कि सरकार कोल इंडिया में 12.32 करोड़ से अधिक शेयर यानी दो प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेच रही है। इसके लिए न्यूनतम 412 रुपये प्रति शेयर का प्राइस तय किया गया है।
सरकारी कंपनी कोल इंडिया के ऑफर फॉर सेल को संस्थागत निवेशकों ने हाथों-हाथ लिया है। संस्थागत निवेशकों ने इश्यू के पहले ही दिन करीब 19,000 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं। निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी को देखते हुए सरकार ‘ऑफर-फॉर-सेल’ में ओवरसब्सक्रिप्शन विकल्प का इस्तेमाल करने वाली है।
जानकारी के मुताबिक सरकार कोल इंडिया में 12.32 करोड़ से अधिक शेयर यानी दो प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेच रही है। इसके लिए न्यूनतम 412 रुपये प्रति शेयर का प्राइस तय किया गया है। इसमें एक प्रतिशत का ग्रीन-शू विकल्प यानी अधिक बोली आने पर उसे रखने का विकल्प भी शामिल है। इसके अलावा, खुदरा निवेशक 29 मई को बिक्री पेशकश (ओएफएस) में बोली लगा सकेंगे।
दीपम सचिव ने क्या कहा?
निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला ने कहा कि ऑफर फॉर सेल के पहले दिन निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और आवंटन मूल्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि सरकार ने ‘ग्रीन शू’ विकल्प का प्रयोग करने का निर्णय लिया है।
पहले दिन कितने शेयर के लिए बोली?
पहले दिन गैर-खुदरा या संस्थागत निवेशकों ने 45.15 करोड़ से अधिक शेयर के लिए बोली लगाई, जो उनके लिए आरक्षित शेयरों की संख्या से आठ गुना अधिक है। यह बोली 436.69 रुपये प्रति शेयर के भाव पर लगायी गई, जो निर्धारित न्यूनतम मूल्य से काफी अधिक है। इस मूल्य पर 45.15 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए बोलियां लगभग 19,000 करोड़ रुपये की बैठती है। सरकार द्वारा तय 412 रुपये का न्यूनतम मूल्य मंगलवार के बंद भाव 458.25 रुपये से लगभग 10 प्रतिशत कम है। इस बीच, बुधवार को कंपनी का शेयर पिछले बंद भाव से 1.01 प्रतिशत बढ़कर 462.90 रुपये पर बंद हुआ।
चालू वित्त वर्ष में यह किसी सरकारी कंपनी का दूसरा ओएफएस है। इससे पहले सरकार ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8.08 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 2,266 करोड़ रुपये जुटाए थे।
कोल इंडिया की कंपनी को लेकर बड़ा अपडेट
कोल इंडिया की इकाई भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में अपनी 20 लाख टन सालाना क्षमता वाली भोजूडिह कोकिंग कोयला वॉशरी में व्यावसायिक परिचालन शुरू करने की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य इस्पात क्षेत्र को धुले हुए कोंकिंग कोयले की आपूर्ति बढ़ाना है।
बता दें कि कोकिंग कोयला इस्पात उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला एक अहम कच्चा माल है। इस वॉशरी की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कोकिंग कोयले के आयात पर काफी निर्भर है, जिसपर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
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