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क्या आप सच में फिट हैं? सिर्फ 30 सेकंड में चेयर टेस्ट से पता लगाएं

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Source :- LIVE HINDUSTAN

फिटनेस का अंदाजा लगाने के लिए हमेशा जिम या मशीनों की जरूरत नहीं होती। घर पर किया जाने वाला 30 सेकंड का सिट-टू-स्टैंड टेस्ट पैरों की ताकत और सहनशक्ति के बारे में अंदाजा दे सकता है। जानें इसके बारे में –

क्या आप जानना चाहते हैं कि आपके पैरों में कितनी ताकत है? इसके लिए आपको जिम जाने या किसी खास मशीन की जरूरत नहीं है। घर में रखी एक मजबूत कुर्सी की मदद से आप यह आसान टेस्ट कर सकते हैं। इसे सिट-टू-स्टैंड टेस्ट कहा जाता है। इसमें आपको 30 सेकंड तक कुर्सी से उठना और फिर वापस बैठना होता है। इस दौरान कितनी बार आप बिना हाथों का सहारा लिए पूरी तरह खड़े हो पाते हैं, उसकी गिनती की जाती है। इससे खासतौर पर पैरों की ताकत और उन्हें लगातार काम करने की क्षमता का अंदाजा लगाया जाता है।

कैसे करें सिट-टू-स्टैंड टेस्ट?

इस टेस्ट के लिए एक मजबूत कुर्सी लें जिसमें आर्मरेस्ट ना हो। ध्यान रखें कि कुर्सी हिले नहीं इसलिए बेहतर होगा कि इसे दीवार के पास रखें।

अब इस तरह टेस्ट करें:

  • कुर्सी के बीच में सीधे बैठ जाएं।
  • दोनों पैर जमीन पर रखें।
  • पीठ सीधी रखें।
  • दोनों हाथों को सीने पर क्रॉस करके रखें।
  • अब 30 सेकंड का समय शुरू करें।
  • बिना हाथों का सहारा लिए पूरी तरह खड़े हों।
  • फिर वापस कुर्सी पर बैठें।
  • 30 सेकंड तक यही करते रहें।
  • जितनी बार पूरी तरह खड़े हुए, उसकी गिनती करें।

इस दौरान हाथों से कुर्सी को पकड़कर उठने की कोशिश ना करें। अगर आपको हाथों का सहारा लेना पड़ रहा है, तो टेस्ट का नतीजा सही तरीके से नहीं आएगा।

उम्र के हिसाब से कितना स्कोर ठीक माना जाता है?

इस टेस्ट में आप कितनी बार उठ-बैठ पाते हैं, यह आपकी उम्र और जेंडर पर निर्भर करता है। उम्र बढ़ने के साथ पैरों की ताकत में थोड़ा बदलाव आना सामान्य है। इसलिए अपने स्कोर की तुलना अपनी उम्र के लोगों से ही करना ज्यादा सही है। सीडीसी (Center for Disease Control and Prevention) के अनुसार 30 सेकंड में कुर्सी से उठने का नॉर्मल काउंट इतना हो सकता है:

20–24 साल 25 बार 23 बार

25–50 साल 21 बार 19 बार

60–64 साल 14 बार 12 बार

65–69 साल 12 बार 11 बार

70–74 साल 12 बार 10 बार

75–79 साल 11 बार 10 बार

80–84 साल 10 बार 9 बार

85–89 साल 8 बार 8 बार

90–94 साल 7 बार 4 बार

(इन आंकड़ों को एक सामान्य मानक की तरह देखें, अपनी सेहत का पक्का फैसला मानकर नहीं। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है।)

स्कोर कम आए तो?

इस टेस्ट में कम बार उठ पाने का मतलब यह नहीं है कि आप बीमार हैं। इससे मुख्य रूप से पैरों की ताकत और सहनशक्ति का अंदाजा मिलता है। किसी बीमारी का पता लगाने के लिए सिर्फ इस टेस्ट पर भरोसा नहीं कर सकते। अगर आपको रोज के काम करने, चलने या कुर्सी से उठने में लगातार परेशानी होती है या बार-बार चक्कर आते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए क्या करें?

अगर आपको लगता है कि आपके पैर पहले के मुकाबले कमजोर हो गए हैं, तो रोज थोड़ा ज्यादा एक्टिव रहने की कोशिश करें। ज्यादा देर तक एक ही जगह बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलें। रोज टहलना भी अच्छी शुरुआत हो सकती है।

नोट:

  • यह टेस्ट करते समय जल्दबाजी न करें। अगर आपको बैलेंस बनाने में परेशानी होती है या पहले से चलने-फिरने में दिक्कत है, तो इसे अकेले करने से बचें।
  • 30 सेकंड का यह टेस्ट आपकी पूरी फिटनेस नहीं बताता। यह मुख्य रूप से पैरों की ताकत और सहनशक्ति का एक आसान अंदाजा देता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN