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टीवीके विधायक पल्लवी के अपने बच्चे के साथ कार्यक्रमों में जाने पर विवाद

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Source :- BBC INDIA

अपने छोटे बच्चे के साथ टीवीके विधायक पल्लवी.

टीवीके विधायक पल्लवी लगातार अपने छोटे बच्चे के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हो रही हैं. इसे लेकर तमिलनाडु की राजनीति में बहस छिड़ गई है.

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा है, “मुख्यमंत्री विजय को टीवीके विधायक को सही सलाह देनी चाहिए.”

उन्होंने यह टिप्पणी आईआईटी मद्रास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में विधायक पल्लवी के अपने छोटे बच्चे के साथ शामिल होने पर की थी.

इस मामले पर बच्चों की देखभाल से जुड़े कार्यकर्ताओं की अलग-अलग राय है. सवाल यह है कि क्या छोटे बच्चे को लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना सही है?

कौन हैं पल्लवी?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में आर. पल्लवी चेन्नई की थिरु वी. का. नगर सीट से टीवीके के टिकट पर जीती थीं.

इसके बाद वह सरकारी और पार्टी के कार्यक्रमों में अपने छोटे बच्चे के साथ शामिल होती रही हैं.

तमिलनाडु में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पिछले जून में ‘सिंगप्पेन स्पेशल टास्क फ़ोर्स योजना’ शुरू की गई थी. इसके उद्घाटन कार्यक्रम में भी विधायक पल्लवी अपने छोटे बच्चे के साथ पहुंची थीं.

पिछले अगस्त में विधानसभा का सत्र चल रहा था, तब वह बच्चे को लेकर सचिवालय आई थीं. विधानसभा में जाने से पहले उन्होंने बच्चा अपने एक सहायक को सौंप दिया और फिर सदन की कार्यवाही में शामिल हुईं.

इसके बाद भी वह सरकारी कार्यक्रमों और पार्टी की बैठकों में अपने छोटे बच्चे के साथ आती रहीं. इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए.

मीडिया से बातचीत में विधायक पल्लवी ने क्या कहा?

पल्लवी ने कहा, “मैं राजनीति करने के लिए बच्चे को अपने साथ लेकर नहीं आती. अगर आप दूसरों का दर्द नहीं समझ सकते, तो कम से कम सोच-समझकर अपनी राय रखें.”

विधायक पल्लवी पर आरोप लगाया गया कि वह लोगों का ध्यान खींचने के लिए ऐसा कर रही हैं.

इस पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं इतने छोटे बच्चे को घर पर छोड़कर बाहर कैसे आ सकती हूं? इसमें लोगों का ध्यान खींचने जैसी क्या बात है?”

उन्होंने कहा, “मैं राजनीति करने के लिए बच्चे को अपने साथ लेकर नहीं आती. अगर आप दूसरों का दर्द नहीं समझ सकते, तो कम से कम सोच-समझकर अपनी राय रखें. मज़ाक़ न उड़ाएं.”

इसके बाद भी उन्होंने अपने छोटे बच्चे के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाना बंद नहीं किया.

दो अक्तूबर को मदुरांतकम उपचुनाव में मुख्यमंत्री जोसेफ़ विजय प्रचार करने पहुंचे थे. उस दौरान विधायक पल्लवी अपने छोटे बच्चे के साथ उनके प्रचार वाहन के आगे खड़ी थीं.

मुख्यमंत्री ने यह देखकर उन्हें थोड़ा दूर खड़े होने का इशारा किया. पल्लवी के प्रचार सभा में बच्चे के साथ शामिल होने पर भी उनकी आलोचना हुई.

‘राजनीतिक रूप से चर्चा में रहने की कोशिश’

कार्ति चिदंबरम ने एक्स पर लिखा, “छोटे बच्चे के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में आना चर्चा में रहने की कोशिश है.”

इसके बाद बीते रविवार को विधायक पल्लवी आईआईटी मद्रास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में अपने बच्चे के साथ शामिल हुईं.

कार्यक्रम में अभिनेत्री कस्तूरी के उनसे बात करने का वीडियो मीडिया में सामने आया.

इस बारे में पत्रकारों से बातचीत में कस्तूरी ने कहा, “मैं उनके इस क़दम का बहुत सम्मान करती हूं. मुख्यमंत्री महिलाओं को अपने बच्चे को साथ लाकर काम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.”

कस्तूरी ने कहा कि बच्चे को प्रचार के लिए साथ लाने की बात कहकर पल्लवी की आलोचना की जा रही है.

उन्होंने कहा, “जब महिलाएं खेतों में धान की रोपाई करती थीं, तो पेड़ पर कपड़ा बांधकर उसमें बच्चे को सुलाती थीं और अपना काम करती थीं. उन्होंने कभी बच्चों को सार्वजनिक जीवन से अलग नहीं रखा.”

लेकिन कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसकी आलोचना की है.

उन्होंने एक्स पर लिखा कि वह कामकाज की जगहों पर बच्चों की देखभाल के लिए केंद्र बनाने और मां व पिता को छुट्टी देने जैसी परिवार के हित से जुड़ी नीतियों का पूरा समर्थन करते हैं.

उन्होंने लिखा, “इसके बावजूद छोटे बच्चे को लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों में ले जाना किसी व्यावहारिक ज़रूरत से ज़्यादा राजनीतिक रूप से चर्चा में रहने की कोशिश लगता है.”

कार्ति चिदंबरम की आलोचना पर विधायक पल्लवी की ओर से कोई जवाब सामने नहीं आया है.

वहीं, बच्चों की देखभाल से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच इसके समर्थन और विरोध, दोनों में आवाज़ें उठी हैं.

बच्चों की देखभाल से जुड़े कार्यकर्ता क्या कहते हैं?

बच्चों की देखभाल से जुड़ी कार्यकर्ता कन्या.

बच्चों की देखभाल से जुड़े कार्यकर्ता देवनैयन अरसु कहते हैं, “छोटे बच्चे को सुरक्षा और देखभाल की ज़रूरत होती है. उसे संक्रमण बहुत आसानी से हो सकता है. इसलिए बच्चे को सार्वजनिक जगहों पर लेकर जाने से बचना बेहतर है.”

उन्होंने बीबीसी तमिल से कहा कि बच्चे के हित को ध्यान में रखकर ही मातृत्व अवकाश दिया जाता है.

उनका कहना है, “जनप्रतिनिधि को लोगों के सामने उदाहरण पेश करना चाहिए. ऐसी चीज़ों से बचना बेहतर है.”

देवनैयन अरसु ने मदुरांतकम उपचुनाव में मुख्यमंत्री के प्रचार कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए कहा, “मुख्यमंत्री को देखने के लिए बड़ी भीड़ जमा हुई थी. ऐसी जगहों पर बड़ों की सुरक्षा भी तय नहीं होती. विधायक का बच्चे को लेकर वहां पहुंचना स्वीकार नहीं किया जा सकता.”

उन्होंने कहा, “बस और रेलवे स्टेशनों पर बच्चों को स्तनपान कराने के लिए कमरे होते हैं. सार्वजनिक कार्यक्रमों में ऐसी व्यवस्था करना बहुत मुश्किल है. माता-पिता को बच्चे के हित को ध्यान में रखकर फ़ैसला करना चाहिए.”

तमिलनाडु प्रोग्रेसिव वूमेन लॉयर्स एसोसिएशन की प्रदेश उपाध्यक्ष दमयंती की राय थोड़ी अलग है.

वह कहती हैं, “अगर परिवार में बच्चे की देखभाल करने वाला कोई और नहीं है, तो बच्चे को सार्वजनिक कार्यक्रम में साथ ले जाने में कोई ग़लती नहीं है.”

उन्होंने बीबीसी तमिल से कहा, “हर कार्यक्रम में बच्चे को लेकर जाना सही नहीं है. इसे इस तरह देखा जा सकता है कि वह दिखाना चाहती हैं कि ऐसी परिस्थितियों में भी समाज के लिए काम कर रही हैं.”

‘यह ध्यान खींचने की कोशिश नहीं है’

बच्चों की देखभाल से जुड़े कार्यकर्ता देवनैयन अरसु.

बच्चों की देखभाल से जुड़ी कार्यकर्ता कन्या इससे पूरी तरह असहमत हैं.

उन्होंने बीबीसी तमिल से कहा, “बच्चे की देखभाल के लिए किसी दूसरे व्यक्ति को रखने के बजाय मां अगर ख़ुद उसे बाहर लेकर आती है, तो इसे अच्छी परवरिश के तौर पर देखा जा सकता है.”

“बच्चों की देखभाल करने वाले कुछ केंद्रों में बच्चों को नुक़सान पहुंचने के मामले सामने आए हैं. मां ही बच्चे को सुरक्षा दे सकती है. हालांकि, बच्चों को सार्वजनिक सभाओं में ले जाने से बचा जा सकता है.”

विधायक पल्लवी पर हो रही आलोचना को लेकर उनका जवाब जानने के लिए बीबीसी तमिल ने उनसे संपर्क किया. लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया है. अगर वह जवाब देती हैं, तो उसे इस लेख में शामिल किया जाएगा.

इस मामले पर बच्चों से जुड़े डॉक्टर का क्या कहना है?

एग्मोर चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के पूर्व निदेशक अरसर सीरालर.

चेन्नई के एग्मोर चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के पूर्व निदेशक अरसर सीरालर ने कहा, “छोटे बच्चे को सार्वजनिक जगहों पर लेकर जाने से बचना चाहिए. जब कई लोग बच्चे को गोद में लेते या उसे दुलारते हैं, तो संक्रमण फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है.”

उन्होंने बीबीसी तमिल से कहा, “अगर बच्चे को घर पर छोड़कर आना संभव नहीं है, तो दूसरे विकल्प तलाशने चाहिए. पास के किसी घर में बच्चे को छोड़ना भी सुरक्षित नहीं है.”

“सार्वजनिक कार्यक्रमों में तेज़ आवाज़, प्रदूषण और बहुत ज़्यादा रोशनी जैसी चीज़ें बच्चे को नुक़सान पहुंचा सकती हैं. लाउडस्पीकर की तेज़ आवाज़ बच्चे की सुनने की क्षमता पर असर डाल सकती है.”

अरसर सीरालर ने कहा, “कुछ लोगों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपने बच्चे को साथ ले जाना और लोगों को दिखाना अच्छा लग सकता है. लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि इससे बच्चे की सेहत पर क्या असर पड़ सकता है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS