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‘ट्रंप ने विनाश होने से बचा लिया’… ऑपरेशन सिंदूर की मार को पाकिस्तान ने UN में भी किया याद

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Shehbaz Sharif at UNGA: भारत हमेशा से यह साफ करता आया है कि मई 2025 का युद्धविराम दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत का नतीजा था और इसमें किसी तीसरे पक्ष यानी ट्रंप या अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।

Shehbaz Sharif at UNGA: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव का राग अलापा। शरीफ ने मई 2025 में भारत के चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हुई सैन्य झड़प का जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “समय पर मध्यस्थता” की तारीफ की। इसके साथ ही, सिंधु जल समझौते को लेकर बौखलाए शरीफ ने भारत को सीधी धमकी देते हुए कहा कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश को “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा।

हालांकि, भारत हमेशा से यह साफ करता आया है कि मई 2025 का युद्धविराम दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत का नतीजा था और इसमें किसी तीसरे पक्ष यानी ट्रंप या अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ट्रंप की तारीफ में क्या बोले शहबाज?

शहबाज शरीफ ने यूएन असेंबली के मंच से कहा कि मई 2025 में जब दो परमाणु संपन्न पड़ोसी ऑल-आउट वॉर की कगार पर खड़े थे, तब डोनाल्ड ट्रंप के दखल ने बड़े विनाश को टाल दिया।

शरीफ ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का समय पर हस्तक्षेप उस निर्णायक मोड़ पर आया जब दो परमाणु हथियारबंद पड़ोसी युद्ध के मुहाने पर थे। अगर ट्रंप सही समय पर कदम न उठाते, तो पता नहीं कितना विनाश होता।”

शरीफ ने अपने फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर का जिक्र करते हुए दावा किया कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ का इस्तेमाल किया था।

क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले में 26 मासूमों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसके बाद 4 दिनों तक दोनों देशों के बीच भारी सैन्य टकराव हुआ था।

सिंधु जल समझौते पर भारत को क्या दी चेतावनी?

1960 के ‘सिंधु जल समझौते’ को भारत की ओर से स्थगित रखे जाने के फैसले पर शहबाज शरीफ ने सबसे ज्यादा तल्खी दिखाई।

शरीफ ने चेतावनी देते हुए कहा, “सिंधु नदी प्रणाली का पानी न केवल पाकिस्तान के लोगों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जीवन रेखा है। भारत का इस संधि को एकतरफा स्थगित करने के फैसले का कोई कानूनी आधार नहीं है। पानी को कभी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। नदियां देशों को पालती हैं, उन्हें बांटती नहीं हैं। इसलिए, पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने या उसका रुख मोड़ने की किसी भी कोशिश को ‘युद्ध का ऐलान’ माना जाएगा। भारत को इसमें कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।”

शरीफ ने यह भी दावा किया कि मध्यस्थता अदालत और यूएन विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के रुख का समर्थन किया है कि 1960 की संधि पूरी तरह से वैध और लागू है।

भारत का रुख: तीसरा पक्ष मंजूर नहीं

भारत ने शहबाज शरीफ के दावों को सिरे से खारिज किया है। भारत का साफ रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।

सिंधु जल समझौते पर भारत पहले ही साफ कर चुका है कि जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं से भारत के खिलाफ प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक 1960 की संधि की शर्तों पर पुनर्विचार और उसकी रोक जारी रहेगी। वहीं मध्यस्थता या ट्रंप के दखल के दावे पर विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को कभी स्वीकार नहीं करता।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN