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ट्रंप ने AI का नाम ही बदल डाला, अब ‘सुपर इंटेलिजेंस’ कहेगी सरकार; आदेश लागू

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI का नाम बदलकर ‘Super Intelligence’ और SI करने का आदेश दिया है। अब अमेरिकी सरकार के आधिकारिक संचार, वेबसाइट, रिपोर्ट और नीति दस्तावेजों में AI की जगह नए नाम का इस्तेमाल किया जाएगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अमेरिकी सरकार के कामकाज में अब ‘Artificial Intelligence’ और ‘AI’ की जगह ‘Super Intelligence’ और ‘SI’ शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि मौजूदा तकनीक की क्षमताएं उस पुराने विचार से कहीं आगे निकल चुकी हैं, जिसे करीब 70 साल पहले ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ कहा गया था।

सरकारी कामकाज में अब AI नहीं, ‘सुपर इंटेलिजेंस’

ट्रंप के आदेश का शीर्षक ‘सुपर इंटेलिजेंस के युग की शुरुआत’ है। इसके तहत अमेरिकी केंद्र सरकार के विभागों और एजेंसियों को आधिकारिक पत्राचार, सार्वजनिक संचार, वेबसाइट, रिपोर्ट और प्रशासनिक नीति दस्तावेजों में ‘सुपर इंटेलिजेंस’ और ‘SI’ शब्दों का इस्तेमाल करना होगा।

आदेश में कहा गया है कि यह बदलाव कानून की अनुमति की अधिकतम सीमा तक लागू किया जाएगा। संबंधित आधिकारिक जगहों पर सरकार ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और ‘AI’ के इस्तेमाल को मान्यता नहीं देगी। हालांकि, यह बदलाव पहले से मौजूद रिकॉर्ड पर लागू नहीं होगा। पुराने नियम, सरकारी कॉन्ट्रैक्ट, ग्रांट और ऐतिहासिक अभिलेख इस आदेश के कारण नहीं बदले जाएंगे।

क्यों बदला गया AI का नाम?

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि आज के अत्याधुनिक AI सिस्टम की क्षमताएं केवल इंसानी बुद्धिमत्ता के कुछ हिस्सों की नकल करने या उन्हें स्वचालित करने तक सीमित नहीं हैं।

आदेश में कहा गया है कि ये सिस्टम तेजी से इंसानी रचनात्मकता और क्षमता को बढ़ा रहे हैं और विज्ञान, चिकित्सा तथा मानव प्रयास के लगभग हर क्षेत्र में ऐसे कामों को संभव बना रहे हैं, जिन्हें पहले असंभव माना जाता था।

इसी वजह से ट्रंप प्रशासन का मानना है कि सरकार की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली भी तकनीक की इन बढ़ी हुई क्षमताओं को प्रतिबिंबित करनी चाहिए।

अभी कानून में AI की मौजूदा परिभाषा ही लागू

फिलहाल ‘सुपर इंटेलिजेंस’ के लिए अमेरिका के यूएस कोड के टाइटल 15 में दी गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मौजूदा वैधानिक परिभाषा ही लागू होगी। इसके साथ ही राष्ट्रपति के विज्ञान और तकनीक मामलों के सहायक को 60 दिनों के भीतर कांग्रेस के सामने प्रस्तावित कानून पेश करने की समयसीमा दी गई है। इस प्रस्ताव में ‘सुपर इंटेलिजेंस’ की नई संघीय वैधानिक परिभाषा तय करने और मौजूदा अमेरिकी कानूनों में उससे जुड़े बदलाव सुझाने की बात कही गई है।

ट्रंप बोले- इंटरनेट से भी बड़ा है यह बदलाव

यह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर ट्रंप की व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गजों के साथ हुई हाई-लेवल लंच मीटिंग के बाद आया। इस बैठक में SpaceX और Tesla के प्रमुख एलन मस्क, Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग, Google के CEO सुंदर पिचाई और NVIDIA के CEO जेनसन हुआंग समेत कई प्रमुख टेक अधिकारी शामिल हुए। ट्रंप ने इस तकनीकी बदलाव को अमेरिका के लिए अभूतपूर्व अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बहुत बड़ा बदलाव है और यह इंटरनेट से भी बड़ा हो सकता है।

टेक कंपनियों ने सुरक्षित विकास पर दिया जोर

बैठक के बाद टेक्नोलॉजी कंपनियों के अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने ‘White House Accord’ के बारे में पत्रकारों को जानकारी दी। इसका फोकस सुपर इंटेलिजेंस को सुरक्षित तरीके से विकसित करने पर था।

Meta CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि लोगों को इस तकनीक पर भरोसा होना जरूरी है। वहीं Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने टेक इंडस्ट्री और प्रशासन के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी दौड़ में अमेरिका की स्थिति पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका का AI में अग्रणी बने रहना सबसे महत्वपूर्ण है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN