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दूध पीने से 33 साल के युवा का हार्ट फेल! डॉक्टर ने बताईं 2 बड़ी गलतियां जो बनीं वजह

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Source :- LIVE HINDUSTAN

डॉ शालिनी सिंह सालुंके एक मेडिकल केस शेयर करते हुए बताती हैं कि दूध पीने से 33 साल के युवा का हार्ट फेल हो गया। इसके पीछे डॉक्टर ने दो बड़ी गलतियां बताई हैं, जो हर किसी को अवॉइड करनी चाहिए। इस पूरे केस को विस्तार में समझते हैं।

दूध पीना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है, लेकिन क्या हो अगर दूध पीने की वजह से हार्ट फेलियर हो जाए? ये सुनने में सनसनीखेज लग सकता है लेकिन 33 साल के एक युवा लड़के के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए डॉ शालिनी सिंह सालुंके एक मेडिकल केस साझा करती हैं, जिसमें एक यंग लड़के का हार्ट फेल हो गया और उसमें एक कारण दूध पीना भी था। ऐसा नहीं है कि सिर्फ दूध पीने से हार्ट पर कोई असर पड़ता है, लेकिन कई बार दूध पीने का गलत तरीका और साथ में की जाने वाली छोटी-छोटी गलतियां गंभीर साबित हो सकती हैं। डॉक्टर बताती हैं कि इसके पीछे मुख्य रूप से दो चीजें जिम्मेदार थीं, जिन्हें हर किसी को हर हाल में अवॉइड करना चाहिए। आइए विस्तार में जानते हैं।

आखिर 33 साल के युवा को अचानक हुआ क्या?

डॉ शालिनी बताती हैं कि 33 साल के रमेश को ब्रुसेलोसिस इंफेक्शन हुआ था, जिस वजह से उसे 20 दिनों तक लंबा बुखार रहा और फिर हार्ट फेल हो गया। ब्रुसेलोसिस Brucella नाम के बैक्टीरिया से होने वाला एक संक्रमण है, जो संक्रमित जानवरों के संपर्क और उनके दूध से इंसानों में फैल सकता है। खासकर अनपाश्चराइज्ड या कच्चा दूध और उससे बने डेयरी प्रोडक्ट्स इसके संक्रमण का स्रोत बन सकते हैं।

ये 2 गलतियां बनी वजह

सालों से एंटासिड्स (एसिडिटी की टैबलेट) लेना

डॉ शालिनी बताती हैं कि रमेश को एसिडिटी की प्रॉब्लम थी इसलिए वो सालों से एंटासिड्स ले रहा था। इन दवाओं के लंबे इस्तेमाल से पेट में बनने वाला एसिड कम हो सकता है। ऐसे में सामान्य एसिड बैरियर कमजोर पड़ सकता है, जो खाने के साथ शरीर में पहुंचने वाले कुछ हानिकारक बैक्टीरिया से बचाव में भूमिका निभा सकता है।

कच्चे दूध से पेट में पहुंचा बैक्टीरिया

डॉक्टर कहती हैं कि रमेश की दूसरी गलती थी भैंस का कच्चा दूध पीना। दरअसल कच्चे दूध में कभी-कभार ब्रुसेला नाम का बैक्टीरिया मौजूद हो सकता है। चूंकि पेट का एसिड पहले से कमजोर था इसलिए बैक्टीरिया मरा नहीं और ब्लड के जरिए वो हार्ट में एंटर हुआ, जिस वजह से रमेश को इन्फेक्टिव एंडोकार्डाइटिस (दिल की अंदरूनी परत और वाल्व में होने वाला संक्रमण) हुआ, जो बाद में हार्ट फेलियर की वजह बना।

आपको नहीं करनी हैं ये 2 गलतियां

डॉक्टर कहती हैं कि इस मेडिकल केस से आप दो बातें सीख सकते हैं। पहला, आपको एंटासिड्स यानी एसिडिटी की गोलियां भर-भर के नहीं खानी हैं। लंबे समय तक एसिडिटी बनी हुई है तो अपने डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। दूसरा, आपको कभी भी कच्चा और अनपाश्चराइज्ड दूध नहीं पीना चाहिए। इनमें हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं, जो सीधा आपके ब्लड में एंटर कर सकते हैं।

हार्ट फेलियर के क्या लक्षण हो सकते हैं?

  • चलने या थोड़ा सा कम करने पर भी सांस फूलना।
  • लेटने और सांस लेने में परेशानी।
  • पैरों और टखनों में सूजन दिखाई देना।
  • लगातार थकान और कमजोरी बने रहना।
  • लगातार खांसी या सीने में भारीपन।
  • दिल की धड़कन तेज या अनियमित महसूस होना।
  • सीने में एक दर्द , बहुत ज्यादा सांस फूलना, बेहोशी या होंठ नीले पड़ना जैसी गंभीरी स्थिति में तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर मौजूद यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। लाइव हिन्दुस्तान ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN