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पंजाब SIR: 3 देशों में भारत के पूर्व दूत ने ECI को नागरिकता समस्या बताई

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नवदीप सिंह सूरी, पूर्व भारतीय राजनयिक, ने पंजाब में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनकी समस्या क्या है? भारत का विदेशों में उच्च-स्तरीय राजनयिक भूमिकाओं में प्रतिनिधित्व करने के बावजूद, अब उनसे नागरिकता का प्रमाण देने को कहा जा रहा है — जिससे वे सवाल कर रहे हैं कि आम नागरिकों का क्या हाल होगा।

## SIR को लेकर सूरी का अनुभव

रविवार को सूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी परेशानियों के बारे में बताया। SIR प्रक्रिया के दौरान उन्होंने अपना Voter ID और Aadhaar card पहले ही Booth Level Officer (BLO) को जमा कर दिया था, लेकिन उन्हें एक संदेश मिला कि 2003 से जुड़े उनके कुछ विवरण रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।

जब इस विसंगति की ओर ध्यान दिलाया गया, तो उन्हें आधिकारिक नोटिस लेने और अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ लौटने के लिए कहा गया। हालांकि, 2003 में वे भारत में नहीं थे, इसलिए उन्होंने कहा कि वे अपनी नागरिकता के प्रमाण के रूप में पासपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे।

उन्होंने पूछा: “अगर तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद भी मुझे अपनी नागरिकता साबित करने में परेशानी हो रही है, तो आम नागरिक का क्या होगा? Ease of Living, I presume!”

## राजनयिक पृष्ठभूमि

उनकी चिंता की गंभीरता को समझने के लिए सूरी के राजनयिक कार्य रिकॉर्ड पर नजर डालना उपयोगी है:

– **United Arab Emirates (UAE)** में राजदूत
– **Egypt** में राजदूत
– **Australia** में उच्चायुक्त

उनकी सेवा को देखते हुए, अतिरिक्त प्रमाण देने का अनुरोध कई लोगों को अत्यधिक लगा — खासकर उनके मामले में।

## पंजाब में SIR: क्या हो रहा है

पंजाब ने हाल ही में मतदाता सूची में संशोधन के प्रयासों के तहत घर-घर जाकर गणना का चरण पूरा किया है। 90% से अधिक मतदाताओं ने इसमें भाग लिया। विशेष रूप से, पंजीकृत मतदाताओं में से 90.4% ने आवश्यक गणना फॉर्म जमा किए।

इस प्रक्रिया के दौरान, सूरी जैसे मतदाताओं के समूहों से नागरिकता संबंधी प्रमाणों की पुष्टि करने को कहा गया। वैध पहचान-पत्र रखने वाले लोगों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

## नागरिकता का सवाल उठना

सूरी की पोस्ट के अनुसार:

– उनके दस्तावेजों और SIR सिस्टम में दर्ज 2003 के रिकॉर्ड के बीच कुछ विवरण मेल नहीं खाते थे।
– चूंकि उस वर्ष वे भारत में नहीं थे, इसलिए उनसे प्रमाण के तौर पर पासपोर्ट मांगा गया।
– Voter ID और Aadhaar card जैसे आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद, अधिकारियों ने अतिरिक्त प्रमाण की मांग की।

## अधिकारियों की प्रतिक्रिया

जब सूरी ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए संपर्क किया:

– अमृतसर के Deputy Commissioner, Dalwinderjit Singh ने कहा कि वह मामले की जांच करेंगे।
– रिपोर्ट लिखे जाने तक ECI, पंजाब सरकार या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई थी।

## व्यापक तस्वीर: जनता पर प्रभाव

सूरी की स्थिति इस बात को लेकर व्यापक सवाल उठाती है कि SIR के तहत भारत के निर्वाचन अधिकारी नागरिकता का सत्यापन किस तरह कर रहे हैं, खासकर:

– विदेशों में रह चुके या विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके लोगों का आकलन कैसे किया जाएगा
– नागरिकता के स्वीकार्य प्रमाण के रूप में क्या मान्य होगा
– आधुनिक समय के दावों की पुष्टि के लिए 2003 के सिस्टम का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है

उन्होंने संकेत दिया कि यह प्रक्रिया उन आम नागरिकों पर अनुचित बोझ डाल सकती है, जिनके पास व्यापक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।

## SIR के आंकड़े

संदर्भ के लिए: पंजाब के संशोधित मतदाता सूची अभियान में घर-घर जाकर गणना शामिल थी, जिसका उद्देश्य रिकॉर्ड को अपडेट या सत्यापित करना था। भागीदारी दर मजबूत रही — हर दस में से नौ से अधिक मतदाताओं ने फॉर्म जमा किए।

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