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पाकिस्तान में हड़कंप…इमरजेंसी की तैयारी; खैबर पख्तूनख्वा में खत्म होगा PTI का शासन?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

शहबाज कैबिनेट ने खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर रूल लगाने का रास्ता साफ कर दिया है। रविवार सुबह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में कैबिनेट ने एकमत से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को संविधान के आर्टिकल 232 और 234 लागू करने की सलाह दी है।

पाकिस्तान की फेडरल कैबिनेट ने खैबर पख्तूनख्वा (KP) में तुरंत इमरजेंसी लगाने और गवर्नर रूल लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है। रविवार सुबह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय कैबिनेट ने एकमत से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को सलाह दी कि वे संविधान के आर्टिकल 232 और 234 के तहत यह कदम उठा सकते हैं। यह फैसला केंद्र और पीटीआई की अगुवाई वाली प्रांतीय सरकार के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पूरी तरह खत्म होने और राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद लिया गया।

गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि केपी में कानून-व्यवस्था की हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि इमरजेंसी लगाने के अलावा अब कोई और रास्ता नहीं बचा था। कैबिनेट के सामने रखी गई खुफिया फाइलों में बताया गया कि मार्च 2024 से क्षेत्र में आतंकी घटनाओं में 195 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। केंद्र सरकार का आरोप है कि प्रांतीय सरकार जानबूझकर आतंक के खिलाफ संघीय रणनीति से दूर रह रही है और निर्देशों का पालन नहीं कर रही।

केसी सीएम ने केंद्र को दी चुनौती

वहीं, केपी के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने केंद्र के इस कदम को सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर आपमें हिम्मत है तो खुलेआम इमरजेंसी या गवर्नर रूल का ऐलान कर दो। अफरीदी ने इसे प्रांतीय सरकार के अधिकारों के खिलाफ कदम बताया और कहा कि बिना सूचना दिए संघीय सख्ती लागू करना गलत है। पीटीआई की कोर कमेटी ने भी आधिकारिक तौर पर इस फैसले को खारिज कर दिया।

अफरीदी ने पुलिस चीफ और चीफ सेक्रेटरी को साफ आदेश दिया है कि इस्लामाबाद से आने वाले किसी भी गैर-कानूनी या अवैध आदेश को नजरअंदाज कर दें। मुख्यमंत्री अफरीदी ने दोहराया कि गिरफ्तारियों, धमकियों और पीटीआई सांसदों से सुरक्षा वापस लेने के बावजूद उनका लॉन्ग मार्च नहीं रुकेगा। उन्होंने कहा कि काफिला लगातार आगे बढ़ रहा है और 13 अक्टूबर को स्वाबी इंटरचेंज पर अगली बड़ी रणनीति का ऐलान किया जाएगा।

पेशावर में तैयारी पूरी

इस बीच पेशावर में पूरी तैयारी तेज हो गई है। हाई सिक्योरिटी कैंटोनमेंट एरिया के आसपास के मुख्य रास्तों को भारी शिपिंग कंटेनरों से पूरी तरह सील कर दिया गया है। ऐतिहासिक जीटी रोड पर ट्रैफिक रुक गया है। फिरदौस के पास और बाला हिसार किले के बाहरी इलाकों में बैरिकेड्स लगाए गए हैं, ताकि कोई बड़ी राजनीतिक सभा या प्रदर्शन न हो सके।

कैबिनेट का यह फैसला जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के आखिरी क्षण के बीच-बचाव प्रयास के बावजूद लिया गया। फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बातचीत का प्रस्ताव दिया था, ताकि संविधानिक कदम उठाने से पहले केंद्र और प्रांत के बीच की रुकावट दूर की जा सके। लेकिन कैबिनेट ने अपना दबाव बनाए रखा और सिफारिश को मंजूरी दे दी।

फैसले के बाद स्थिति तनावपूर्ण

इस फैसले से केपी में राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। केंद्र सरकार का कहना है कि आतंकवाद पर काबू पाने के लिए यह कदम जरूरी था, जबकि प्रांतीय सरकार इसे अपने अधिकारों में दखल बता रही है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि राष्ट्रपति इस सलाह पर क्या फैसला लेते हैं और प्रांतीय प्रशासन कितना सहयोग करता है। अब इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN