Source :- LIVE HINDUSTAN
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया है कि वैश्विक तेल संकट और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दुनिया के अधिकांश देशों की तुलना में बेहद कम रही है। सरकार अब एथेनॉल आधारित ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा दे रही है।
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। लेकिन, हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी दुनिया के अधिकांश देशों की तुलना में बेहद कम रही है। उनके अनुसार, 193 देशों में भारत उन देशों में शामिल है, जहां ईंधन कीमतों में सबसे कम वृद्धि दर्ज की गई है। यह उपलब्धि भारत की मजबूत ऊर्जा नीति और दीर्घकालिक रणनीति का परिणाम मानी जा रही है।
नई दिल्ली में मारुति सुजुकी की नई वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल (WagonR Flex Fuel) कार के लॉन्च कार्यक्रम में बोलते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत अब केवल रेगुलर पेट्रोल और डीजल पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक ईंधन स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और देश में उत्पादित जैव ईंधन यानी बायोफ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इसी दिशा में एथेनॉल मिश्रित ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं, जो पेट्रोल के साथ-साथ एथेनॉल आधारित ईंधन पर भी चल सकते हैं। सरकार ने E85 यानी 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल वाले ईंधन को एक महत्वपूर्ण मानक के रूप में स्वीकार किया है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। हरदीप सिंह पुरी का मानना है कि आने वाले सालों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ेगा और यह भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव लेकर आएगा।
सरकार इस बदलाव को सफल बनाने के लिए ईंधन वितरण नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार कर रही है। शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर और मुंबई-पुणे-नागपुर कॉरिडोर में 50 से 100 एथेनॉल फ्यूल स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। साल के अंत तक इनकी संख्या 500 तक पहुंचाने की योजना है, जबकि अगले साल तक देश के प्रमुख शहरों में हजारों एथेनॉल पंप शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंत्री ने बताया कि भारत में वर्तमान में 30 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और करीब 37 लाख यात्री वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं। ऐसे में अगर इन वाहनों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ता है, तो देश की ईंधन खपत में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, किसानों को एथेनॉल उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने भी कहा कि कंपनी सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग मिशन और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को पूरा करने में पूरी तरह सहयोग करेगी। WagonR फ्लेक्स फ्यूल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आम लोगों तक नई तकनीक और वैकल्पिक ईंधन की पहुंच सुनिश्चित करेगी।
भारत अब केवल ईंधन की कीमतों को कंट्रोल रखने पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था तैयार करने पर भी ध्यान दे रहा है। एथेनॉल और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का बढ़ता उपयोग आने वाले सालों में देश की ऊर्जा तस्वीर को पूरी तरह बदल सकता है।
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