Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- बलरामपुर चीनी, धामपुर शुगर, EID Parry, त्रिवेणी इंजीनयरिंग और उत्तम शुगर समेत कई शुगर स्टॉक्स में मंगलवार को 8% तक तेजी आई
- रॉ शुगर फ्यूचर करीब 2 साल के ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं
- आइए इस रैली के पीछे की 3 बड़ी वजहें जानते हैं
- साथ ही समझते हैं कि आगे क्या ट्रिगर है?
बलरामपुर चीनी, धामपुर शुगर, EID Parry, त्रिवेणी इंजीनयरिंग और उत्तम शुगर समेत कई शुगर स्टॉक्स में मंगलवार को आई 8% तक तेजी।
चीनी कंपनियों के शेयरों में मंगलवार को जोरदार खरीदारी देखने को मिली। बलरामपुर चीनी (Balrampur Chini), धामपुर शुगर (Dhampur Sugar), EID Parry, त्रिवेणी इंजीनयरिंग (Triveni Engineering) और उत्तम शुगर (Uttam Sugar) समेत कई शुगर स्टॉक्स (Sugar Stocks) में 3% से 8% तक की तेजी आई। इस तेजी के पीछे ग्लोबल मार्केट में रॉ शुगर फ्यूचर (Raw Sugar Futures) की मजबूत कीमतें, प्रमुख उत्पादक देशों में सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता और भारत में फेस्टिव सीजन (Festive Season) के दौरान मांग बढ़ने की उम्मीद को अहम वजह माना जा रहा है।
किन शुगर स्टॉक्स में आई तेजी?
6 अक्टूबर मंगलवार को कारोबारी सत्र के दौरान बलरामपुर चीनी मिल्स (Balrampur Chini Mills Ltd) का शेयर 6% से ज्यादा चढ़कर करीब ₹714 तक पहुंच गया। वहीं, धामपुर शुगर मिल्स (Dhampur Sugar Mills) में करीब 8% की तेजी आई और शेयर ₹192 के आसपास कारोबार करता दिखा। इसके अलावा उत्तम शुगर (Uttam Sugar) करीब 5% बढ़कर ₹310, त्रिवेणी इंजीनयरिंग (Triveni Engineering) करीब 4% चढ़कर ₹249 और EID Parry 3% से ज्यादा की तेजी के साथ ₹711 के आसपास पहुंच गया।
फेस्टिव सीजन से बढ़ी चीनी की मांग
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi), दशहरा (Dussehra) और दीवाली (Diwali) जैसे त्योहारों के कारण मिठाई, बिस्किट और दूसरे प्रोडक्ट्स की खपत बढ़ती है। इस साल भी फेस्टिव डिमांड मजबूत रहने की उम्मीद है। सरकार ने भी बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए 15 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच डीलर्स (Dealers) के लिए स्टॉक होल्डिंग (Stock Holding) के नियम सख्त किए हैं।
नए नियमों के तहत डीलर्स किसी जगह पर प्राप्त चीनी का स्टॉक 15 दिनों से ज्यादा नहीं रख सकेंगे और एक स्थान पर अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी रखने की सीमा होगी। सरकार का उद्देश्य जमाखोरी और अनावश्यक स्टॉक जमा करने पर रोक लगाना तथा मिल्स से डीलर्स और फिर कंज्यूमर तक चीनी की सप्लाई को सुचारू रखना है।
ब्राजील समेत बड़े उत्पादक देशों में सप्लाई चिंता
चीनी की कीमतों को सबसे बड़ा सहारा ग्लोबल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता से मिल रहा है। दुनिया के सबसे बड़े शुगर प्रड्यूसर ब्राजील में खराब मौसम और भारी बारिश के कारण गन्ने की हार्वेस्टिंग और माइनिंग की रफ्तार प्रभावित हुई है। इससे उत्पादन को लेकर अनुमान कमजोर हुए हैं। यूरोप में भी हीटवेब और मौसम से जुड़ी परिस्थितियों के कारण उत्पादन पर दबाव की आशंका है। वहीं, थाईलैंड ने अपने शुगर आउटपुट का अनुमान घटाकर करीब 9.5 मिलियन टन कर दिया है।
इन घटनाक्रमों के कारण साल की शुरुआत में जिस ग्लोबल शुगर सरप्लस की उम्मीद की जा रही थी, उसकी तस्वीर अब बदलती दिख रही है। बाजार में सप्लाई और डिमांड के बीच अंतर कम होने की संभावना ने शुगर प्राइस को सपोर्ट दिया है। रॉ शुगर फ्यूचर्स फिलहाल करीब दो साल के ऊंचे स्तरों के आसपास कारोबार कर रहे हैं।
शुगर मार्केट में सेंटीमेंट हुआ मजबूत
शुगर प्राइस (Sugar Prices) में तेजी के साथ बड़े ट्रेडर (Traders) की स्थिति में भी बदलाव आया है। 29 सितंबर तक के CFTC आंकड़ों के मुताबिक रॉ शुगर (Raw Sugar) में नेट शॉर्ट पोजिशन 21 महीने से ज्यादा समय के सबसे निचले स्तर पर आ गई थीं। इसका मतलब है कि बड़े स्पेकुलेटर्स ने चीनी की कीमतों में गिरावट पर लगाए गए दांव काफी हद तक कम किए हैं।
सरकार के मुताबिक, रिटेल शुगर प्राइस अगस्त के पीक से करीब 15% नीचे आ चुके हैं, जबकि एक्स-मिल प्राइसेस में करीब 28% की गिरावट आई है। सरकार को उम्मीद है कि कम एक्स-मिल प्राइस का फायदा आगे कंज्यूमर तक पहुंच सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर अब ग्लोबल शुगर सप्लाई, फेस्टिव डिमांड और चीनी कंपनियों के आने वाले फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर रहेगी।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




