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बीमा खरीदने और बेचने के तरीके में बड़े बदलाव की तैयारी है। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए दो हिस्सों वाला कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें बीमा कंपनियों के खर्च, एजेंट और वितरकों के कमीशन, बैंक के जरिए बीमा बिक्री, मिस-सेलिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कई प्रस्ताव रखे गए हैं। IRDAI ने कमीशन सिस्टम में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है।
लोन के साथ बीमा लेना अनिवार्य नहीं होगा?
ग्राहकों के लिए प्रस्तावित महत्वपूर्ण बदलाव लोन के साथ बीमा की अनिवार्यता से जुड़ा है। IRDAI ने ऐसे मामलों पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है, जहां बैंक या वित्तीय संस्था लोन देने की शर्त के रूप में किसी खास बीमा पॉलिसी को खरीदना जरूरी करती है।
प्रस्ताव के मुताबिक ग्राहक को बीमा लेने के लिए उसी बैंक या NBFC से जुड़ना जरूरी नहीं होना चाहिए। बीमा लेने या न लेने की स्थिति में ब्याज दर की जानकारी भी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए।
बीमा कंपनियों के खर्च पर लग सकती है लगाम
IRDAI ने कहा है कि बीमा वितरण की लागत लगातार बढ़ी है और कई मामलों में कमीशन तथा अन्य भुगतान प्रीमियम की तुलना में तेज गति से बढ़े हैं। प्रस्ताव के मुताबिक एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) की सीमा को अगले पांच वर्षों में फेजवाइज कम किया जा सकता है। जीवन बीमा कंपनियों के लिए पांच साल में इसे 12.5 प्रतिशत और सामान्य बीमा कंपनियों के लिए 20 प्रतिशत तक लाने का प्रस्ताव है।
एजेंट और डिस्ट्रीब्यूटर के कमीशन का तरीका बदल सकता है
मनीकंट्रोल की खबर के मुताबिक कमीशन केवल प्रीमियम की रकम के आधार पर तय करने के बजाय बीमा उत्पाद की जटिलता, ग्राहक को दी जाने वाली सर्विस, बिक्री के प्रयास और डिस्ट्रिब्यूशन चैनल जैसे पहलुओं से जोड़ने का प्रस्ताव है।
नियामक ने बताया कि वित्त वर्ष 23 से 25 के बीच एक सैंपल में कॉरपोरेट एजेंटों से जुड़े नए कारोबार का प्रीमियम 28 प्रतिशत बढ़कर 63,000 करोड़ से 80,000 करोड़ रुपये हुआ, जबकि कुल वितरक भुगतान 125 प्रतिशत बढ़कर 9,580 करोड़ से 21,600 करोड़ रुपये हो गया।
बिना निजी जानकारी दिए देख सकेंगे बीमा की कीमत
IRDAI ने बीमा वेबसाइटों पर इस्तेमाल होने वाले तथाकथित ‘डार्क पैटर्न’ पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। मसलन, किसी बीमा उत्पाद की कीमत या फीचर्स देखने से पहले ग्राहक से मोबाइल नंबर या दूसरी निजी जानकारी मांगना प्रतिबंधित किया जा सकता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि उत्पाद, कीमत और गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी सरल और मानकीकृत तरीके से उपलब्ध होनी चाहिए।
बीमा सुगम और PIR पर जोर
IRDAI बीमा खरीदने की प्रक्रिया को ज्यादा डिजिटल और ग्राहक-केंद्रित बनाने के लिए बीमा सुगम और पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री (PIR) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं को आगे बढ़ा रहा है। बीमा सुगम को एक डिजिटल बीमा मार्केटप्लेस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है, जबकि PIR का उद्देश्य बीमा से जुड़े रिकॉर्ड और जानकारी के बीच बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी बनाना है।
अभी नियम लागू नहीं हुए हैं
ध्यान रखना जरूरी है कि ये कंसल्टेशन पेपर में रखे गए प्रस्ताव हैं, अंतिम नियम नहीं। IRDAI ने संबंधित पक्षों से इन प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया मांगी है। रिपोर्ट के मुताबिक टिप्पणियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं।
यानी अगर प्रस्ताव आगे चलकर नियम बनते हैं तो बीमा खरीदते समय विकल्प और कीमत की जानकारी ज्यादा स्पष्ट हो सकती है, बैंक से लोन लेते समय बीमा की अनिवार्यता पर रोक लग सकती है और बीमा बिक्री में कमीशन आधारित प्रोत्साहनों पर ज्यादा नियंत्रण आ सकता है।
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