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मनीषा ने भारत के लिए रचा इतिहास, कुश्ती विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मनीषा भनवाला ने शुक्रवार को भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गईं। उन्होंने 59 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में एक रोमांचक जीत हासिल की।

मनीषा भानवाला ने शुक्रवार को विश्व चैंपियनशिप के महिला 59 किग्रा वर्ग के फाइनल में अमेरिका की अबीगैल नेट्टे को 8-6 से हराकर भारतीय कुश्ती में महिला विश्व चैंपियन का इंतजार खत्म कर दिया। वह मुकाबले में एक समय छह अंक से पिछड़ रही थीं, लेकिन शानदार वापसी करते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर इतिहास रच दिया। मनीषा विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। वह दिग्गज सुशील कुमार के बाद विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली दूसरी भारतीय पहलवान हैं। सुशील ने 2010 में पुरुषों के 66 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।

मनीषा ने जीता पहला गोल्ड मेडल

उन्नतीस वर्षीय मनीषा की इस जीत के साथ भारतीय कुश्ती का विश्व चैंपियन बनने का लंबा इंतजार खत्म हो गया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय महिला टीम के लिए भी विश्व चैंपियनशिप के इस संस्करण को ऐतिहासिक बना दिया। पहली बार एक ही विश्व चैंपियनशिप में भारत की तीन महिला पहलवानों ने स्वर्ण पदक के मुकाबलों में जगह बनाई। नीलम सिरोही (50 किग्रा) और काजल धोचक (76 किग्रा) को गुरुवार को अपने-अपने फाइनल में हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। हालांकि, मनीषा ने स्वर्ण पदक जीतकर यह सुनिश्चित किया कि भारतीय टीम इस प्रतियोगिता से बिना किसी स्वर्ण के नहीं लौटेगी।

अमेरिकी पहलवान ने की दमदार शुरुआत

फाइनल में मनीषा के कौशल के साथ-साथ धैर्य और जुझारूपन की भी परीक्षा हुई। मुकाबले में नेट्टे ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाते हुए दाएं पैर पर हमला कर मनीषा पर मजबूत पकड़ बना लिया। उन्होंने मनीषा का पैर उठाकर मुकाबले पर नियंत्रण बना लिया। मनीषा ने करीब 30 सेकेंड तक खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन अंततः उन्हें मैट के किनारे से उठाकर पटक दिया गया। इस दांव से अमेरिकी पहलवान को चार अंक मिले।

मनीषा के खिलाफ इस फैसले को चुनौती दी गई, लेकिन वीडियो समीक्षा का फैसला भारत के खिलाफ गया। समीक्षा में पुष्टि हुई कि मनीषा खतरनाक स्थिति में मैट पर गिरी थीं। चुनौती नाकाम रहने के कारण अमेरिका की पहलवान को एक अतिरिक्त अंक भी मिल गया। मनीषा ने इसके बाद अपनी प्रतिद्वंद्वी को मैट से बाहर धकेलकर एक अंक हासिल करने की कोशिश की लेकिन नेट्टे ने चतुराई से खुद को बचा लिया। इसके बाद मनीषा को चेतावनी मिली और नेट्टे की बढ़त 6-0 हो गई।

पहले दौर के समाप्त होने से पहले मनीषा ने एक अंक हासिल किया, लेकिन मुकाबले पर अमेरिकी पहलवान का दबदबा बना हुआ था। बड़े अंतर से पिछड़ने के बावजूद मनीषा ने हार नहीं मानी। वह दूसरे दौर में आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ मैट पर उतरीं। नेट्टे ने एक बार फिर पैर पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन इस बार मनीषा ने शानदार बचाव करते हुए पीछे से पकड़ बनाई और टेकडाउन के जरिए अंक हासिल किए। अमेरिका की टीम ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दावा किया कि रेफरी मुकाबला रोकने के लिए सीटी बजा चुके थे। उनकी चुनौती हालांकि खारिज हो गई और मनीषा को एक अतिरिक्त अंक मिल गया।

मनीषा ने बनाया दबाव

इसके बाद नेट्टे को ‘पार टेरे’ स्थिति (मैट पर घुटनों और हाथों के बल की स्थिति) में रखा गया। मनीषा ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए पेट के पास पकड़ बनाकर पलटने का दांव पूरा कर 6-6 से बराबर कर दिया। स्कोर बराबर होने के बावजूद अमेरिका की पहलवान के पास अब भी तकनीकी बढ़त थी। मनीषा ने हालांकि मुकाबले पर मनीषा का नियंत्रण बना लिया था। उन्होंने एक और मौका तलाशा और दो अंकों का दांव लगाकर 8-6 की बढ़त हासिल कर ली।

जब मुकाबला समाप्त होने में केवल 27 सेकेंड बाकी थे। नेट्टे ने बराबरी करने की पूरी कोशिश की, लेकिन मनीषा ने अपना पूरा दम लगाकर बढ़त बरकरार रखी और अमेरिकी पहलवान को कोई मौका नहीं दिया। आखिरी सीटी बजते ही मनीषा ने वह उपलब्धि हासिल कर ली, जो उनसे पहले कोई भारतीय महिला पहलवान नहीं कर सकी थी। ऐतिहासिक जीत के बाद मनीषा खुशी से उछल पड़ीं। उन्होंने झुककर मैट को चूमा कर अपने करियर की सबसे बड़ी जीत के प्रति आभार जताया।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN