Source :- LIVE HINDUSTAN
रेस्क्यू टीम के मुताबिक, बाढ़ के तेज बहाव ने पूरे घर को करीब 100 मीटर ऊपर की ओर खिसका दिया था। घर की साढ़े तीन मंजिलें पूरी तरह कीचड़ और मलबे में दब गई थीं। सिर्फ ऊपर की मंजिल का कुछ हिस्सा ही बाहर दिखाई दे रहा था। बचाव के बाद चंडिका को इलाज के लिए काठमांडू के बीरेंद्र अस्पताल ले जाया गया
नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने एक तरफ जहां हजारों जिंदगियां तबाह कर दी वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसी भी कहानियां सामने आ रही हैं जो लोगों के लिए किसी उम्मीद से कम नहीं। नेपाल में आए इस विनाशकारी बाढ़ में 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है वहीं तीन हजार से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस तबाही के बीच नुवाकोट से शनिवार को एक ऐसी खबर आई जिसने लोगों को हैरान कर दिया। बिदुर में 10 दिनों से मलबे में दबी एक 60 वर्षीय महिला चंडिका श्रेष्ठा को जिंदा बाहर निकाला गया।
महिला के रेस्क्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गया। चंडिका श्रेष्ठा के परिवार ने कुछ दिनों पहले ही उन्हें मृत मानकर उनका अंतिम संस्कार तक कर दिया था। वहीं इस कहानी के सामने आने के बाद लोगों के मन में अब ये सवाल है कि, मलबे की ढे़र से महिला के जिंदा होने का पता कैसे चला और 10 दिन बाद उनका रेस्क्यू कैसे किया गया? आइए जानते हैं इन सवालों का जवाब।
परिवार ने कर दिया था अंतिम संस्कार
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल के नुवाकोट के बिदुर शहर में आई भीषण बाढ़ में एक चार मंजिला घर की सबसे ऊपरी मंजिल से एक 60 वर्षीय महिला को जिंदा बाहर निकाला। करीब 10 दिनों से चंडिका श्रेष्ठा यहां दबी हुई थी। बाढ़ आने के बाद करीब 10 दिनों तक चंडिका श्रेष्ठा का कोई पता नहीं चला। वह कहां हैं, यह परिवार और आसपास के लोगों के लिए रहस्य बना हुआ था। उनके रिश्तेदारों ने भी उनके जिंदा लौटने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। यहां तक कि आठवें दिन परिवार ने उनकी मौत के बाद होने वाली रस्में शुरू कर दी थीं। उन्होंने उनके शरीर के प्रतीक के तौर पर कुश घास से एक पुतला बनाया और धार्मिक रस्में निभानी शुरू कर दीं।
11वें दिन आई ये चौंकानी वाली खबर
लेकिन शनिवार को इस भयानक आपदा के 11वें दिन एक चौंकाने वाली खबर सामने आई। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें नेपाल के नुवाकोट जिले के ऐतिहासिक बाजार क्षेत्र बेत्रावती में बाढ़ से तबाह हुए एक घर के मलबे से एक कमजोर महिला को जिंदा बाहर निकालते हुए दिखाया गया। बाद में पता चला कि वह महिला 64 साल की चंडिका श्रेष्ठा थीं। वह बिदुर नगरपालिका-10 के बेत्रावती इलाके की रहने वाली हैं। चंडिका 26 अगस्त को अपने परिवार के चार अन्य सदस्यों के साथ लापता हो गई थीं। उस दिन अचानक आई बाढ़ ने भोटेकोशी नदी के इलाके में भारी तबाही मचाई थी और कई बस्तियां पूरी तरह तबाह हो गई थीं।
लोगों के लिए जगी ये बड़ी आस
करीब 11 दिन तक मलबे में फंसे रहने के बाद चंडिका का जिंदा मिलना उनके परिवार और स्थानीय लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। चंद्रिका के रिश्तेदार रमेश मान श्रेष्ठा ने बताया, “बाढ़ के 11वें दिन हमें खबर मिली कि एक बुजुर्ग महिला को मलबे से जिंदा बचाया गया है। यह सुनते ही हम तुरंत अस्पताल पहुंचे। जब हमें पता चला कि बचाई गई महिला चंडिका ही हैं, तो हमें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ।”
इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बावजूद, डेढ़ हफ्ते बाद दो दिनों में चार लोगों को जिंदा बचाए जाने से नई उम्मीद जगी है। इससे आशंका बढ़ी है कि मलबे में दबे घरों और सुरंगों में फंसे कुछ लोग अभी भी जिंदा हो सकते हैं। चंडिका श्रेष्ठा को जिंदा बचाए जाने से एक दिन पहले, शुक्रवार को अपर त्रिशूली 3ए परियोजना की एक सुरंग से दो मजदूरों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया था। दोनों मजदूर करीब 170 मीटर नीचे सुरंग में फंसे हुए थे। बचाए गए मजदूरों के नाम संजय शाह और कबीर महारजन हैं।
कैसे बचाई गईं चंडिका श्रेष्ठा?
बाढ़ के 11वें दिन चंडिका श्रेष्ठा के जिंदा बचने का वीडियो सामने आया। फुटेज में उन्हें बेत्रावती में कीचड़ और मलबे के बीच से बाहर निकालते हुए देखा गया। जानकारी के मुताबिक, नेपाल पुलिस की एक टीम उस इलाके में सड़क बनाने के काम के लिए पहुंची थी। इसी दौरान जवानों को मलबे में दबे एक घर के पास से हल्की रोने की आवाज सुनाई दी। टीम ने तुरंत हाथों से कीचड़ हटाना शुरू किया। इसके बाद खिड़की तोड़कर जवान घर के अंदर पहुंचे और चंडिका तक पहुंचने में कामयाब रहे।
रेस्क्यू टीम के मुताबिक, बाढ़ के तेज बहाव ने पूरे घर को करीब 100 मीटर ऊपर की ओर खिसका दिया था। घर की साढ़े तीन मंजिलें पूरी तरह कीचड़ और मलबे में दब गई थीं। सिर्फ ऊपर की मंजिल का कुछ हिस्सा ही बाहर दिखाई दे रहा था। बचाव के बाद चंडिका को इलाज के लिए काठमांडू के बीरेंद्र अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया।
चंडिका के बाकी परिवार का क्या हुआ?
चंडिका के जीजा ईश्वरी लाल श्रेष्ठा भी बाढ़ के दौरान उसी घर में थे और किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल आए। हालांकि, उनकी पत्नी सुषमा, चंडिका की बहन और उनकी चाची का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। तीनों अभी भी लापता हैं और परिवार उन्हें खोजने की उम्मीद लगाए बैठा है। ईश्वरी लाल ने अखबार को बताया कि बाढ़ की चेतावनी मिलने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी को जगाया था। लेकिन उनकी पत्नी ने सुबह की प्रार्थना पूरी करने के लिए कुछ देर रुकने का फैसला किया। इसी दौरान ईश्वरी लाल अपनी दुकान पर ग्राहकों के काम में व्यस्त हो गए। उन्होंने बताया कि कुछ ही देर बाद उन्होंने अपनी आंखों के सामने बाढ़ के तेज पानी में घर को ढहते हुए देखा। यह देखकर वह कुछ समय के लिए बेहोश हो गए। जब कुछ मिनट बाद उन्हें होश आया, तो वहां घर का लगभग कोई हिस्सा नहीं बचा था।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




