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महंगाई से ग्रामीण परिवारों की बढ़ी चिंता, RBI के सर्वे में घटा भरोसा; जानिए आगे क्या होगा?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • RBI Survey: गांवों में महंगाई का डर बढ़ा है
  • मौजूदा आर्थिक हालात, रोजगार और घरेलू इनकम को लेकर लोगों की धारणा कमजोर हुई है
  • हालांकि, अगले 1 साल को लेकर उम्मीदें अब भी कायम हैं
  • सर्वे में सामान्य आर्थिक स्थिति, रोजगार, कीमतों और घरेलू आय जैसे प्रमुख पहलुओं पर लोगों की धारणा में कमजोरी के संकेत मिले

महंगाई की चिंता ग्रामीण परिवारों के आर्थिक भरोसे पर भारी पड़ने लगी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सितंबर 2026 के ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वे में मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को लेकर लोगों की धारणा कमजोर होने के संकेत मिले हैं। सर्वे के मुताबिक, महंगाई को लेकर परिवारों का अनुमान बढ़ा है। इसके बावजूद आने वाले एक साल की आर्थिक स्थिति को लेकर लोगों की उम्मीदें सकारात्मक बनी हुई हैं।

कैसे हुआ सर्वे?

RBI ने सितंबर 2026 का ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास सर्वे 10 से 20 सितंबर के बीच कराया। इसमें देश के सभी राज्यों और तीन प्रमुख केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के 8,799 लोगों को शामिल किया गया। मनीकंट्रोल के मुताबिक इसमें परिवारों से मौजूदा आर्थिक हालात, रोजगार, घरेलू आय, खर्च और महंगाई के बारे में उनकी राय पूछी गई।

मौजूदा आर्थिक हालात पर कितना भरोसा?

RBI के सर्वे में करंट सिचुएशन इंडेक्स (CSI) सितंबर 2026 में घटकर 90.6 पर आ गया। यह इंडेक्स बताता है कि लोग मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को एक साल पहले के मुकाबले किस तरह देख रहे हैं।

इस इंडेक्स का 100 से नीचे रहना मौजूदा हालात के प्रति निगेटिविटी को दर्शाता है। ऐसे में 90.6 का स्तर बताता है कि ग्रामीण और अर्धशहरी परिवारों के बीच मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को लेकर भरोसा कमजोर बना हुआ है।

महंगाई को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

सर्वे का सबसे अहम संकेत महंगाई को लेकर परिवारों की बढ़ती चिंता है। सितंबर में महंगाई की मौजूदा धारणा बढ़कर 6.8 प्रतिशत हो गई। पिछले सर्वे के मुकाबले इसमें 0.70 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, अगले एक साल में महंगाई की उम्मीद बढ़कर 7.9 प्रतिशत हो गई। इसमें 0.50 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

इन आंकड़ों का मतलब है कि परिवारों को आने वाले समय में भी कीमतों के दबाव से पूरी राहत मिलने का भरोसा नहीं है। जब खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ता है, तो घरेलू बजट पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में परिवारों को अपनी जरूरतों और बचत के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

भविष्य को लेकर उम्मीद क्यों कायम है?

RBI का फ्यूचर एक्सपेक्टेशंस इंडेक्स (FEI) सितंबर 2026 में 112.8 पर रहा। यह इंडेक्स अगले 12 महीनों को लेकर परिवारों की उम्मीदों को दर्शाता है। इसका 100 से ऊपर रहना बताता है कि भविष्य को लेकर लोगों की कुल धारणा सकारात्मक बनी हुई है।

ग्रामीण बाजार पर क्या पड़ सकता है असर?

ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास में बदलाव का असर बाजार की मांग पर भी पड़ सकता है। ग्रामीण परिवारों की कमाई, खर्च और भविष्य को लेकर सोच कंपनियों की बिक्री के लिए महत्वपूर्ण होती है।

अगर महंगाई का दबाव लंबे समय तक बना रहता है, तो परिवार गैर-जरूरी खरीदारी टाल सकते हैं। इसका असर रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पादों, दोपहिया वाहनों और दूसरे टिकाऊ सामान की मांग पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, अगर आय में सुधार होता है और महंगाई को लेकर चिंता कम होती है, तो ग्रामीण बाजार में मांग को सहारा मिल सकता है।

हालांकि, RBI का उपभोक्ता विश्वास सर्वे वास्तविक बिक्री या खपत का आंकड़ा नहीं है। ग्रामीण बाजार में आगे क्या बदलाव होगा, यह आय, कीमतों, रोजगार और दूसरी आर्थिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN