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मिडटर्म चुनावों की परवाह नहीं; ईरान का ट्रंप को डबल मैसेज- युद्ध के लिए तैयार लेकिन…

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि तेहरान को अमेरिका के आने वाले मिडटर्म चुनावों की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों पर ध्यान देगा।

ईरान ने अमेरिका को एक साथ डबल मैसेज दिया है। एक तरफ तेहरान कह रहा है कि वह नया युद्ध छिड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। दूसरी तरफ उसने बातचीत के दरवाजे भी खुले रखे हैं। यह बयान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को अमेरिकी न्यूज चैनल एनबीसी के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में दिया। अराघची ने साफ कहा कि ईरान को नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अमेरिका के मिडटर्म चुनावों की परवाह नहीं है। हमें अपने देश के हित की परवाह है। उनके मुताबिक तेहरान का फैसला वॉशिंगटन की राजनीति पर नहीं, बल्कि ईरान के राष्ट्रीय हितों पर आधारित होगा।

यह बयान उस समय आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। पिछले महीनों के संघर्ष के बाद यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और तेल बाजार पर भी असर पड़ा है। अराघची ने कहा कि ईरान युद्ध दोबारा शुरू होने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि हम युद्ध फिर से शुरू होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका नया हमला करता है तो ईरान मजबूती से खड़ा रहेगा, भले ही स्थिति बहुत गंभीर हो जाए और लड़ाई ‘कयामत की लड़ाई’ जैसी बन जाए।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान कूटनीति के लिए भी तैयार है। उनके अनुसार अब गेंद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाले में है। अराघची ने कहा कि ईरान बातचीत से समाधान चाहता है, लेकिन दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा। दरअसल, इस हफ्ते की शुरुआत में ईरान ने एक सात दिन का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव के मुताबिक अगर अमेरिका कुछ शर्तें मान लेता है तो होर्मुज जलमार्ग सात दिन के अंदर फिर से खोला जा सकता है और बातचीत भी दोबारा शुरू हो सकती है। ईरान का कहना है कि यह प्रस्ताव कतर जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए वॉशिंगटन को भेजा गया था।

अराघची के अनुसार ये शर्तें नई नहीं हैं। तेहरान का दावा है कि ये वही बातें हैं जो पहले दोनों देशों के बीच हुए समझौते या समझ में शामिल थीं। इनमें युद्ध रोकना, ईरान पर लगे समुद्री घेरे को हटाना, ईरान की बंद संपत्तियां और पैसा जारी करना और होर्मुज में जहाजों के लिए तय समुद्री रास्ते को मानना शामिल बताया जा रहा है।

हालांकि ट्रंप ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि ट्रंप मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर हमले फिर से शुरू करने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन अराघची ने कहा कि ट्रंप का शुरुआती रिएक्शन तो तेहरान ने सुन लिया है, लेकिन मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका का औपचारिक जवाब अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ईरान अभी भी आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। उनके मुताबिक होर्मुज को खोलने या बातचीत आगे बढ़ाने का कोई भी कदम तभी होगा जब ईरान की शर्तें पूरी होंगी। अराघची ने कहा कि इन शर्तों से तेहरान पीछे नहीं हटेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN