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मोहम्मद रफी के खोया-खोया चांद गाने के लिरिक्स क्यों माचिस के डिब्बे में लिखे, धुन के पीछे की कहानी कर देगी हैरान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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मोहम्मद रफी के आज हम आपको एक ऐसे गाने के बारे में बताने वाले जिसे शैलेंद्र ने लिखा था। लेकिन इस गाने के लिखने के पीछे की कहानी कुछ ऐसी है जो आप सोच भी नहीं सकते।

सिनेमा में म्यूजिक का खासकर कि गानों का खास कनेक्शन होता है। एक ही फिल्म में कई तरह के गानें होते हैं जिसमें रोमांटिक, सैड सॉन्ग से लेकर पार्टी नंबर तक शामिल होते हैं। अब आज हम आपको एक ऐसे गाने के बारे में बताने वाले हैं जिसकी धुन माचिस के डिब्बे पर बनाई गई।

कौनसा था वो गाना

जिस गाने की हम बात कर रहे हैं वो है खोया खोया चांद। इस गाने को मोहम्मद रफी ने गाया था और इसे देव आनंद और वहीदा रहमान पर फिल्माया गया था। इसके लिरिसिस्ट शैलेंद्र कुमार थे और म्यूजिक एस डी बर्मन ने दिया था। यह गाना फिल्म काला बाजार का था जिसके डायरेक्टर देव के भाई विजय आनंद थे।

शैलेंद्र पर भड़क गए थे एस डी बर्मन

अब गाने की बात करें तो इसकी धुन पूरी तरह तैयार हो चुकी थी, लेकिन गाने के बोल अभी तक नहीं लिखे गए थे। लिरिसिस्ट शैलेंद्र दूसरे काम में बिजी थे इसलिए सचिन देव बर्मन नाराज हो गए थे। उन्होंने बेटे आर डी बर्मन को फिर गाने को तैयार करवाने की जिम्मेदारी दी। उन्होंने बर्मन दा को कहा कि शैलेंद्र के पास जाओ और जब तक गाने की लाइन नहीं लिखी जाती तब तक घर मत आना।

बर्मन दा पूरे दिन शैलेंद्र के साथ रहे

अब बिचारे बर्मन दा पूरे दिन शैलेंद्र के साथ रहे। सुबह से रात हो गई, लेकिन लिरिक्स नहीं बन पा रहे थे जिससे बर्मन दा भी काफी परेशान हो गए थे, उन्हें पता था कि अगर आज लिरिक्स नहीं पूरे हुए तो पिता काफी गुस्सा होंगे।

माचिस की धुन से बना हिट गाना

वहीं शैलेंद्र भी गाने की लाइन्स को सोचने के लिए लगातार सिग्रेट पी रहे थे और सोच में डूबे थे। उनकी माचिस फिर खत्म हो गई। इसके बाद उन्होंने आर ड बर्मन से माचिस मांगी और उस धुन को फिर सुनाने को कहा। बर्मन दा ने फिर माचिस की डिब्बी में ही धुन बजाई। बस वही पल जादुई साबित हुआ। शैलेंद्र ने आसमान में चांद देखा और फिर उन्होंने ऐसी लाइन लिखीं जिसने इतिहास रच दिया। शैलेंद्र ने तुरंत डिबिया ली और उसी पर एक मुखड़ा लिख दिया और बर्मन दा से कहा कि कल पूरा गाना मिल जाएगा।

मोहम्मद रफी की आवाज ने बना दिया गाने को अमर

सचिन के म्यूजिक, शैलेंद्र के लिरिक्स और मोहम्मद रफी की आवाज ने फिर इस गाने को अमर बना दिया। आज भी जब आप इस गाने को सुनेंगे तो आप इसमें ही खो जाएंगे। रफी की आवाज वैसे भी उस वक्त काफी हिट थी। हर म्यूजिक डायरेक्टर उन्हें अपनी फिल्म में गाना गवाना चाहता था।

फिल्म की बात करें तो इसमें देव आनंद, वहीदा रहमान के अलावा नंदा, राशिद खान, विजय आनंद, किशोर साहू, लीला चिटनिस, चेतन आनंद, मदन पूरी और हेलन थे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN