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रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के शेयरों में सोमवार 28 सितंबर 2026 को तेज गिरावट देखने को मिली और स्टॉक नए 52-वीक लो पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में शेयर ₹1,208 के आसपास तक फिसल गया। इससे साल 2026 में अब तक शेयर के प्रदर्शन पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। हालिया कमजोरी ऐसे समय आई है, जब कंपनी का कारोबार कई बड़े सेगमेंट में एक्टिव है और बाजार की नजर Jio, रिटेल, ऑयल-टू-केमिकल (O2C) तथा नए निवेशों से मिलने वाले रिटर्न पर बनी हुई है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
रिलायंस का नेट प्रॉफिट ₹20,946 करोड़
रिलायंस (Reliance) के शेयर में गिरावट को केवल कंपनी के तिमाही नतीजों से जोड़कर देखना आसान नहीं है। Q1 FY27 में कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स (Revenue from Operations) करीब ₹3.12 लाख करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 25.4% अधिक था। वहीं, शेयरधारकों के लिए कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Consolidated Net Profit) ₹20,946 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹26,994 करोड़ से कम था। हालांकि, पिछले साल के आंकड़े में एशियन पेंट्स (Asian Paints) में हिस्सेदारी बेचने से जुड़ा बड़ा वन-टाइम गेन शामिल था। कंपनी का EBITDA भी करीब 10% बढ़कर ₹54,067 करोड़ रहा।
Q1 में रिटेल रेवेन्यू 7.4% बढ़कर ₹90,409 करोड़
बाजार की चिंता मुख्य रूप से कंपनी के रिटेल कारोबार की रफ्तार, बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) और फ्री कैश फ्लो को लेकर है। Q1 में रिटेल रेवेन्यू 7.4% बढ़कर ₹90,409 करोड़ रहा, लेकिन रिटेल EBITDA करीब 1.1% घटकर ₹6,309 करोड़ रहा। दूसरी ओर डिजिटल सर्विसेस में रेवेन्यू 11.8% बढ़ा और EBITDA 16.1% बढ़ा। O2C कारोबार का रेवेन्यू भी 30.4% बढ़ा, जबकि उसका EBITDA 17.2% बढ़कर ₹17,010 करोड़ रहा, यानी कंपनी के अलग-अलग कारोबारों की तस्वीर एक जैसी नहीं है।
Q1 FY27 में कैपिटल एक्सपेंडिचर ₹38,682 करोड़
रिलायंस (Reliance) के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू उसका कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) है। कंपनी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार Q1 FY27 में कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) करीब ₹38,682 करोड़ रहा। ऐसे में निवेशक यह देख रहे हैं कि कंपनी द्वारा Jio, रिटेल, न्यू एनर्जी और दूसरे क्षेत्रों में किए जा रहे निवेश भविष्य में कितनी तेजी से कैश फ्लो और अर्निंग में बदलते हैं। इसी के साथ कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव का असर O2C कारोबार पर भी पड़ सकता है।
शेयर खरीदें या करें या इंतजार?
अब सवाल है कि 52-वीक लो पर पहुंचने के बाद रिलायंस (Reliance) का शेयर खरीदना चाहिए या इंतजार करना चाहिए? मार्केट एक्सपर्ट की राय में लंबी अवधि की कहानी में Jio की ग्रोथ, O2C मार्जिन, रिटेल में सुधार और संभावित Jio प्लेटफॉर्म्स IPO जैसे फैक्टर महत्वपूर्ण रहेंगे। वहीं तकनीकी नजरिए से शेयर अभी दबाव में है। इसलिए, निवेशकों के लिए केवल गिरती कीमत को खरीदारी का संकेत मानने के बजाय कंपनी की अर्निंग, वैल्युएशन, कैश फ्लो और अलग-अलग कारोबारों के प्रदर्शन को साथ में देखना जरूरी है।
28 सितंबर को 52-वीक लो पर शेयर
टेक्निकल लेवल पर भी शेयर की चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों में 28 सितंबर को इसका 52-वीक लो करीब ₹1,208 दर्ज हुआ, जबकि जनवरी 2026 में शेयर का 52-वीक हाई ₹1,611.20 था। इसका मतलब है कि स्टॉक अपने साल के शिखर से काफी नीचे कारोबार कर रहा है। ऐसे माहौल में शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स और लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए जोखिम अलग हो सकते हैं। इसलिए, रिलायंस में अगला कदम उठाने से पहले निवेश की अवधि और जोखिम क्षमता के हिसाब से फैसला करना अधिक महत्वपूर्ण होगा।
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