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रेपो रेट बढ़ने से महंगे हो सकते हैं लोन, कितनी बढ़ सकती है EMI, FD में क्यों होगा फायदा?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Repo Rtae Impacts: 20 साल की अवधि वाले 50 लाख रुपये के होम लोन पर 8.50 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से EMI करीब 43,391 रुपये बैठती है
  • ब्याज दर 8.75 प्रतिशत होने पर यही EMI करीब 44,186 रुपये हो जाएगी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% कर दिया है। केंद्रीय बैंक का यह फैसला होम लोन की ईएमआई भरने वालों और त्योहारों के चलते लोन की प्लानिंग करने वालों के लिए एक झटका है। रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंक लोन महंगा कर सकते हैं और पहले से चल रही ईएमआई बढ़ा सकते हैं। EMI में बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि होम लोन चुकाने में अभी कितना वक्त बाकी है। अगर समय बहुत ज्यादा बचा है तो आप पर ब्याज बढ़ने का ज्यादा असर पड़ेगा।

रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर उन कर्जदारों पर पड़ सकता है, जिनका होम लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर है। बैंक अगर इस बढ़ोतरी का पूरा भार ग्राहकों पर डालते हैं तो होम लोन की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।

मान लीजिए किसी बैंक ने होम लोन की ब्याज दर 8.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.75 प्रतिशत कर दी। 20 साल की अवधि वाले लोन में 25 बेसिस पॉइंट की यह बढ़ोतरी छोटी दिखाई देती है, लेकिन बड़े होम लोन पर इसका असर हर महीने हजारों रुपये तक पहुंच सकता है।

50 लाख रुपये के होम लोन पर करीब ₹800 ज्यादा EMI

अपस्टॉक्स डॉट कॉम के मुताबिक 20 साल की अवधि वाले 50 लाख रुपये के होम लोन पर 8.50 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से EMI करीब 43,391 रुपये बैठती है। ब्याज दर 8.75 प्रतिशत होने पर यही EMI करीब 44,186 रुपये हो जाएगी। यानी हर महीने लगभग 794 रुपये अधिक भुगतान करना पड़ेगा।

एफडी में निवेश करने का सबसे अच्छा समय

पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक निश्चित इनकम वाली योजनाओं में निवेश करने का यह अच्छा समय है। निवेशक कम अवधि की श्रेणी में और मध्यम से लंबी अवधि की श्रेणी में निवेश कर सकते हैं। यह फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए यह वास्तव में एक अच्छी खबर है, क्योंकि बैंक डिपॉजिट दरें बढ़ाएंगे।

जमा की दर भी कुछ मार्जिन से बढ़ जाएगी, जिससे एफडी अधिक आकर्षक हो जाएगी। इसके कारण अधिक लोग एफडी में निवेश करने के लिए इच्छुक होंगे जिससे बाजार में फ्री फ्लोटिंग मनी की कमी पैदा होगी। इससे बदले में बैंकों के खुदरा ग्राहकों द्वारा किए जाने वाले खर्च में कमी आएगी।

आगे भी EMI कम होने की उम्मीद नहीं

आरबीआई गवर्नर ने मौद्रिक नीति के अगले कदम को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिया। RBI गवर्नर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में निकट अवधि में ब्याज दरों में कटौती का विकल्प नहीं है। आगे की नीति कार्रवाई आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर या तो दर बढ़ाने या दरों को यथावत रखने तक सीमित रह सकती है। यानी इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में लोन सस्ते होने और EMI के कम होने की उम्मीद नहीं है।

रेपो रेट और EMI में क्या है नाता

रेपो रेट वह दर है, जिस पर क‍िसी भी बैंक को आरबीआई की तरफ से कर्ज दिया जाता है। बैंक इसी के आधार पर ग्राहकों को कर्ज देते हैं। आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने पर बैंकों के ऊपर बोझ बढ़ता है और इसकी भरपाई ब्‍याज दर बढ़ाकर यानी लोन महंगा कर और EMI बढ़ाकर, बैंक अपने कस्टमर से करते हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN