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लड़ाई तो अंदर हुई, फिर फ्लाईदुबई के विमान की टेल कैसे टूटी, हवा में नीचे गिरने के दौरान ऐसा क्या हुआ?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

जब पायलट इमरजेंसी डिसेंट की प्रक्रिया शुरू करते हैं, तो वे कुछ खास नियम और ट्रिक का पालन करते हैं, ताकि विमान की बॉडी को कोई नुकसान पहुंचाए बिना इसे तेजी से नीचे लाया जाए।

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबाई की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर हुई हिंसक झड़प और चाकूबाजी के दौरान यह विमान 34,000 फीट की ऊंचाई से मात्र दो मिनट के भीतर घटकर करीब 16,600 फीट की ऊंचाई पर पहुंच गया था। सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग के बाद सामने आई तस्वीरों में बोइंग 737 विमान के टेल सेक्शन (रडर और APU एरिया) में टूट-फूट और पैनल उखड़े हुए दिखाई दिए हैं।

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, यह नुकसान विमान के बहुत ज्यादा रफ्तार से अचानक नीचे की तरफ गिरने और एयरोडायनामिक दबाव का नतीजा है। एयरोडायनामिक दबाव आम तौर पर चलती हुई हवा के कारण किसी वस्तु पर पड़ने वाले दबाव को कहते हैं। विमान, कार, रॉकेट या इमारत के आसपास हवा की रफ्तार और दिशा बदलने से उस पर बल और दबाव पैदा होता है।

‘इमरजेंसी डिसेंट’ क्या होता है?

इमरजेंसी डिसेंट एक बेहद तेज लेकिन नियंत्रित गति से विमान को नीचे लाने की प्रक्रिया है। जब विमान में कोई गंभीर स्थिति पैदा होती है, जैसे केबिन का दबाव अचानक कम होना, कॉकपिट या केबिन में आग लगना या विमान के कंट्रोल में कोई खराबी आना- तब पायलट विमान को जल्द से जल्द सुरक्षित ऊंचाई, जो आमतौर पर 10,000 फीट, उस पर लाने के लिए यह कदम उठाते हैं।

10,000 फीट की ऊंचाई पर बाहर की हवा इतनी सघन होती है कि यात्री और क्रू मेंबर्स बिना ऑक्सीजन मास्क के भी सामान्य रूप से सांस ले सकते हैं।

इमरजेंसी डिसेंट कैसे काम करता है?

जब पायलट इमरजेंसी डिसेंट की प्रक्रिया शुरू करते हैं, तो वे कुछ खास नियम और ट्रिक का पालन करते हैं, ताकि विमान की बॉडी को कोई नुकसान पहुंचाए बिना इसे तेजी से नीचे लाया जाए।

थ्रस्ट में कमी: पायलट इंजन के थ्रस्ट यानी पावर को तुरंत ‘आइडल’ पर ले आते हैं, ताकि नीचे की ओर जाते समय विमान बहुत ज्यादा स्पीड न पकड़े।

स्पीडब्रेक खोलना: विंग पर बने फ्लाइट स्पॉइलर या स्पीडब्रेक को पूरी तरह खोल दिया जाता है। ये हवा के खिलाफ ब्रेक का काम करते हैं, जिससे विमान प्रति मिनट 5,000 से 7,000 फीट या उससे ज्यादा की दर से नीचे गिरता है, बिना अपनी आगे की सुरक्षित स्पीड लिमिट को पार किए।

टारगेट ऊंचाई: 10,000 फीट (3,000 मीटर) की सुरक्षित सीमा तक पहुंचना।

फ्लाईदुबाई FZ1073 के टेल सेक्शन को क्यों हुआ भारी नुकसान?

सामान्य हालात में यह प्रक्रिया बेहद सुचारू तरीके से की जाती है ताकि विमान के ढांचे पर इसका कोई गलत असर न पड़े। लेकिन फ्लाईदुबाई की फ्लाइट FZ1073 के मामले में परिस्थितियां बिल्कुल अलग और बेकाबू थीं।

कॉकपिट में दो पायलटों के बीच हुई खूनी जंग के दौरान विमान अचानक बेकाबू होकर महज 29 सेकंड से 2 मिनट के भीतर करीब 17,000 फीट से ज्यादा नीचे आ गिरा।

इतनी तेज और अचानक गिरावट के कारण हवा का बहुत ज्यादा दबाव पैदा हुआ।

हवा के प्रचंड दबाव के कारण टेल सेक्शन यानी पिछला हिस्सा पर कहीं अधिक दबाव पड़ा, जिससे बोइंग 737 के रडर- यानी दिशा नियंत्रित करने वाला हिस्सा और रियर APU (ऑक्सिलरी पावर यूनिट) के पास लगे कंपोजिट पैनल उखड़ गए और स्ट्रक्चरल स्किन में दरारें आ गईं।

विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ और सऊदी हवाई अड्डा के अधिकारी इस बात की विस्तृत तकनीकी जांच कर रहे हैं कि क्या यह नुकसान केवल वायुमंडल के दबाव से हुई या उड़ान के दौरान विमान को अत्यधिक तेज मोड़ देने के कारण यह नुकसान पहुंचा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN