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शी जिनपिंग: चीन के ताक़तवर नेता बनने से पहले सब कुछ गंवाने वाले ‘राजकुमार’

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Source :- BBC INDIA

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ये तस्वीर 12 सितंबर 2026 को दिल्ली, भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के स्वागत समारोह में ली गई थी

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार को जब वॉशिंगटन डीसी पहुंचेंगे, तो यह 11 साल में उनका पहला अमेरिकी राजकीय दौरा होगा.

लेकिन अमेरिका से उनका पहला सामना चीन की कई पीढ़ियों के सबसे ताक़तवर नेता बनने से बहुत पहले हुआ था.

चार दशक पहले शी चीन के उत्तरी हिस्से में ज़िले के एक अधिकारी थे. वह जानकारी जुटाने के लिए अमेरिका के मध्य-पश्चिमी इलाक़े के दौरे पर गए थे.

उन्होंने आयोवा में कई दिन बिताए. इस दौरान उन्होंने खेती के बारे में जाना, खेतों का दौरा किया और एक स्थानीय परिवार के घर में रहे.

शी ने काफ़ी दिन अमेरिका में बिताए

चीन के सरकारी मीडिया ने उस परिवार के घर में शी के रहने और टेरी ब्रैनस्टैड के साथ उनकी दोस्ती को प्रमुखता से दिखाया. ब्रैनस्टैड उस समय आयोवा के गवर्नर थे. बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में वह चीन में अमेरिका के राजदूत बने. सरकारी मीडिया ने इसके ज़रिए अमेरिका से शी के निजी संबंधों को दिखाने की कोशिश की.

आज अमेरिका और चीन के रिश्ते उस समय से बिल्कुल अलग हैं. दोनों देशों के बीच दुनिया में अपना असर बढ़ाने की होड़ है. एक-दूसरे के जवाब में टैरिफ़ लगाए जा रहे हैं, तकनीक पर पाबंदियां हैं और सैन्य क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा चल रही है.

अब 73 साल के शी कोई छोटे अधिकारी नहीं हैं. चीन के नेता के रूप में लगभग 14 साल के दौरान उन्होंने दुनिया में चीन का रुतबा क़ायम किया है.

सब कुछ गंवाने वाले ‘राजकुमार’

साल 1966 से 1976 तक चली सांस्कृतिक क्रांति के दौरान शी के परिवार को भी निशाना बनाया गया था. यह अभियान उस समय के नेता माओ ज़ेदोंग ने उन लोगों के ख़िलाफ़ शुरू किया था, जिन्हें वह अपना राजनीतिक दुश्मन मानते थे.

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शी की कहानी सुख-सुविधाओं के बीच शुरू हुई थी.

उनका जन्म 1953 में बीजिंग में हुआ था. वह कम्युनिस्ट क्रांतिकारी शी झोंगशुन की छठी संतान हैं. उनके पिता ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की स्थापना में मदद की थी. बाद में वह कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और उप प्रधानमंत्री बने.

बचपन में शी ने नामी स्कूलों में पढ़ाई की. उन्हें वे सुविधाएं मिलीं, जो उस समय ज़्यादातर परिवारों को उपलब्ध नहीं थीं.

लेकिन फिर राजनीति उनके परिवार के ख़िलाफ़ हो गई.

1960 के दशक की शुरुआत में शी के पिता पर एक ‘पार्टी विरोधी’ गुट का हिस्सा होने का आरोप लगाया गया. उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया और एक फ़ैक्ट्री में काम करने के लिए गांव भेज दिया गया.

दूर-दराज़ के गांव लियांगजियाहे में रहने के दौरान शी पहाड़ी के भीतर बनाई गई गुफ़ानुमा जगह में रहते थे

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शी को एक ऐसे व्यक्ति का बेटा माना गया, जिसे ‘क्रांति विरोधी’ बताया गया था. किशोर उम्र में उन्हें ज़बरदस्ती एक पुनर्शिक्षा केंद्र भेज दिया गया. उस समय के नेता माओ ज़ेदोंग ने युवाओं से गांवों में जाकर किसानों से सीखने को कहा था. इसके बाद 15 साल के शी शहर से गांव भेजे गए लाखों बच्चों के साथ चले गए.

साल 2004 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने उस सफ़र को याद करते हुए कहा था, “ट्रेन में हर कोई रो रहा था. सिर्फ़ मैं मुस्कुरा रहा था… अगर मैं वहां से नहीं निकल पाता, तो मैं भी रो रहा होता. अगर मैं वहीं रुक जाता, तो मुझे नहीं पता कि मैं आज ज़िंदा भी होता या नहीं.”

वह चीन के पश्चिमी शान्शी प्रांत के पहाड़ी गांव लियांगजियाहे पहुंचे. वहां उन्होंने सात साल एक ‘याओदोंग’ में बिताए. याओदोंग पहाड़ी के भीतर बनी गुफ़ानुमा रहने की जगह होती है. वहां उन्होंने खेती की, खाद उठाई और खाइयां खोदीं.

उन्होंने वहां बिताए समय के बारे में कहा था, “अचार वाली सब्ज़ियां मेरा पसंदीदा खाना बन गई थीं. आज भी मुझे वह समय बहुत याद आता है.”

काम का बोझ देखकर वह “हैरान” थे. शुरुआत में उन्हें भूख और पिस्सुओं से भी जूझना पड़ा. दोपहर के खाने से पहले सिगरेट पीने के लिए मिलने वाला छोटा सा समय उन्हें कुछ राहत देता था.

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सत्ता तक का सफ़र

शी ने 22 साल की उम्र में गांव छोड़ दिया और चीन के सबसे अच्छे शिक्षा संस्थानों में शामिल सिंघुआ यूनिवर्सिटी में केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बीजिंग से दूर स्थानीय अधिकारी के तौर पर काम किया. वह फ़ुजियान और झेजियांग जैसे तटीय प्रांतों में तैनात रहे. 1980 के दशक में चीन की अर्थव्यवस्था खुलने के बाद ये प्रांत देश के सबसे अमीर इलाक़ों में शामिल हो गए.

माओ की मौत के बाद शी के पिता की राजनीति में वापसी हुई. इससे शी को केंद्र सरकार और सेना में पद हासिल करने में मदद मिली. यहां उन्होंने पार्टी के कई अधिकारियों के साथ संबंध बनाए.

बाद में इनमें से कई अधिकारी उनके भरोसेमंद नेतृत्व समूह का हिस्सा बने.

शी जिनपिंग की पत्नी पेंग लियुआन अक्सर उनके साथ विदेश यात्राओं पर जाती हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

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शी ने 1979 में के लिंगलिंग से शादी की थी. ये उनकी पहली शादी थी. वह ब्रिटेन में चीन के पूर्व राजदूत की बेटी थीं. तीन साल बाद दोनों का तलाक़ हो गया.

एक साझा दोस्त ने शी की मुलाक़ात उनकी दूसरी और मौजूदा पत्नी पेंग लियुआन से कराई. पेंग सेना से जुड़ी लोक गायिका थीं. वह चीन में पहले से ही बहुत मशहूर थीं. वह हर साल चंद्र नववर्ष पर प्रसारित होने वाले टीवी कार्यक्रमों में गाती थीं, जिन्हें करोड़ों लोग देखते थे.

1980 और 1990 के दशक में चीन के बहुत से लोग पेंग को उनके प्रांतीय अधिकारी पति से ज़्यादा पहचानते थे.

पेंग अक्सर विदेशी दौरों पर शी के साथ जाती हैं. यह चीन की प्रथम महिलाओं की पहले वाली कम चर्चा में रहने की परंपरा से अलग है.

उनकी बेटी और इकलौती संतान शी मिंगज़े का जन्म 1992 में हुआ था. उनके बारे में ज़्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है. बस इतना पता है कि उन्होंने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी.

साल 2007 में शंघाई के सबसे बड़े नेता के तौर पर कुछ समय काम करने के बाद शी चीन की सबसे बड़ी फ़ैसले लेने वाली संस्था पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति में शामिल हुए.

पांच साल बाद उन्होंने हू जिंताओ की जगह कम्युनिस्ट पार्टी के नेता का पद संभाला.

चीन का नेता बनने के बाद शी ने देश की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं में ऐसे बदलाव किए, जिनकी उम्मीद बहुत कम लोगों ने की थी.

शी ने चीन को कैसे बदला

शी के 14 साल के शासन में चीन का आत्मविश्वास लगातार बढ़ा है.

दुनिया के दूसरे देशों में शी ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव जैसी परियोजनाओं के ज़रिए चीन का असर बढ़ाया. इसके साथ ही उन्होंने बीजिंग को ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में पेश किया.

इसी दौरान कई बड़े लोकतांत्रिक देशों के साथ चीन के रिश्ते ज़्यादा तनावपूर्ण हो गए. दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ा, ताइवान पर दबाव बढ़ा और अमेरिका के साथ प्रतिस्पर्धा भी तेज़ हुई.

लेकिन शी के शासन की एक और बड़ी पहचान चीन के भीतर बढ़ा राजनीतिक नियंत्रण है.

शी के शासन में चीन ने सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर पहले से कहीं ज़्यादा ज़ोर दिया. शिनजियांग, तिब्बत और हांगकांग जैसी जगहों पर कई क़दम उठाए गए. शी के समर्थकों का कहना है कि इन क़दमों से व्यवस्था बहाल हुई. आलोचकों का कहना है कि इससे नागरिकों की आज़ादी बहुत कम हो गई.

शी ने एक ऐसी राजनीतिक विचारधारा को भी आगे बढ़ाया, जिसमें उनका नाम शामिल है. इसे “नए युग के लिए चीनी विशेषताओं वाले समाजवाद पर शी जिनपिंग के विचार” कहा जाता है. उनसे पहले चीन के दोनों नेता अपनी विचारधारा में अपना नाम शामिल नहीं करा पाए थे.

शी ने संविधान से राष्ट्रपति पद के कार्यकाल की सीमा भी हटा दी. इससे उनके लिए दो कार्यकाल के बाद भी पद पर बने रहने का रास्ता खुल गया.

चीन का सरकारी मीडिया शी को एक गंभीर व्यक्ति के रूप में दिखाता है. लेकिन कभी-कभी उनका हल्का-फुल्का अंदाज़ भी दिखाई देता है.

उन्होंने फ़ुटबॉल के प्रति अपने प्यार के बारे में बात की है. चीन की पुरुष फ़ुटबॉल टीम के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने थाईलैंड के प्रधानमंत्री से मज़ाक में अपनी निराशा भी जताई थी.

उन्होंने ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ बीयर पी थी. उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति को चीन में बने शाओमी फ़ोन तोहफ़े में देते समय मज़ाक में कहा था कि इन्हें लेने से पहले देख लें कि इनमें कोई ‘बैकडोर’ तो नहीं है.

दोस्त या विरोधी?

अगस्त 2026 में किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान एक बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग.

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विदेशी नेताओं के साथ शी के रिश्ते समय-समय पर बदलते रहे हैं. ये बदलाव चीन की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को भी दिखाते हैं.

रूस के व्लादिमीर पुतिन से ज़्यादा क़रीबी रिश्ता शी का किसी दूसरे विदेशी नेता से नहीं है. शी के सत्ता में आने के बाद से दोनों 40 से ज़्यादा बार मिल चुके हैं. शी ने पुतिन को अपना “सबसे क़रीबी विश्वासपात्र” भी बताया है.

ट्रंप के साथ शी का रिश्ता ज़्यादा उलझा हुआ है. चीन के साथ व्यापार युद्ध शुरू करने के बावजूद ट्रंप अक्सर शी के बारे में गर्मजोशी से बात करते हैं. वह उन्हें अपना दोस्त बताते हैं और उनकी राजनीतिक ताक़त की तारीफ़ करते हैं.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी शी ने शुरुआत में निजी संबंध बनाने पर काफ़ी ज़ोर दिया. दोनों ने बिना किसी औपचारिक एजेंडे वाली मुलाक़ातों में बातचीत की और एशिया के इन दो बड़े देशों के बीच सहयोग दिखाने की कोशिश की. लेकिन 2020 में सीमा पर हुई जानलेवा झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्ते कई दशकों के सबसे ख़राब स्तर पर पहुंच गए.

अपने निजी आकर्षण या अचानक लिए गए फ़ैसलों के लिए पहचाने जाने वाले नेताओं के उलट, शी निजी संबंधों को शायद ही कभी देश के हितों से ऊपर रखते हैं.

इस हफ़्ते शी जब दोबारा वॉशिंगटन डीसी पहुंचेंगे, तो वह आयोवा के खेतों को देखने वाले उत्सुक ज़िला अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि 21वीं सदी की राजनीति को दिशा देने वाले एक अहम नेता के रूप में पहुंचेंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS