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शेख हसीना को लेकर बदल गए बांग्लादेश के सुर, अचानक सुलह की करने लगा बात; कोई चाल तो नहीं?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

बांग्लादेश ने 3 दिन पहले ही भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पन की मांग की थी। अब पहली बार तारिक रहमान की सरकार की तरफ से सुलह की बात कही गई है। बता दें कि हसीना को बांग्लादेश में मौत की सजा सुनाई गई है।

बांग्लादेश ने पहली बार शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग संग सुलह की बात की है। हालांकि तारिक रहमान की सरकार ने इसके लिए कुछ शर्त जरूर रखी है, लेकिन यह पहली बार है जब बांग्लादेश की तरफ से ऐसा कुछ कहा गया है। इससे पहले बीते 3 दिनों तक बांग्लादेश शेख हसीना के प्रत्यर्पन की मांग को लेकर भारत को नसीहत देने में लगा था। अब बांग्लादेश की तरफ से अचानक इस तरह के बयान यह सवाल खड़े कर रहे हैं कि बांग्लादेश सचमुच आवामी लीग के साथ सुलह को तैयार है या इसके पीछे कोई बड़ी चाल है?

दरअसल बांग्लादेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को शेख हसीना को लेकर एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित अवामी लीग के साथ ‘सुलह’ करना ‘बुरी बात नहीं’ है। यह बातें बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के सूचना सलाहकार जाहिद उर रहमान ने कहीं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रहमान ने पत्रकारों से कहा, ”अवामी लीग के सक्रिय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ सुलह की पहल करना बुरी बात नहीं है। बल्कि, अगर ऐसी पहल की जाती है तो यह अच्छा होगा।”

जाहिद ने आगे कहा, ”मध्यस्थों को अवामी लीग से संपर्क करना चाहिए। सुलह की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत के जरिए बुनियादी आधार तैयार करना जरूरी है। अगर यह सुनिश्चित हो जाता है तो इस मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है।” हालांकि उन्होंने एक शर्त भी रखी। ढाका के अधिकारी ने कहा, “लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली पार्टी को ऐसी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए आगे आना होगा।”

3 दिन पहले तक अलाप रहा था एक ही सुर

इससे पहले बांग्लादेश बीते रविवार तक शेख हसीना के प्रत्यर्पन की मांग की ही बात कर रहा था। बांग्लादेश के विदेश मामलों के मंत्री ने एक बयान में कहा था कि ढाका को उम्मीद है कि भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। उन्होंने यह तक कहा था कि शेख हसीना की वापसी के लिए कानूनी प्रक्रिया के अलावा ‘राजनीतिक मंशा’ भी जरूरी है।

बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने एक बयान में कहा, “निश्चित रूप से इसमें कानूनी प्रक्रिया शामिल है, लेकिन राजनीतिक मंशा भी जरूरी है।” यह पूछे जाने पर कि क्या पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को नयी दिल्ली और ढाका के बीच लागू प्रत्यर्पण संधि के तहत वापस लाया जा सकता है, मंत्री शमा ने कहा, “निश्चित रूप से।” आरोपी (हसीना) को संधि के तहत वापस लाया जा सकता है और उस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।”

झांसा दे रहा है बांग्लादेश?

3 दिन पहले तक बांग्लादेश की तरह से शेख हसीना को आरोपी कहा जा रहा था। अब इस तरह सुलह की बात से सवाल उठने लगे हैं कि क्या ये बांग्लादेश की कोई चाल है? बता दें कि ढाका में शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। उनपर छात्र आंदोलन के दौरान हिंसक कार्रवाई के आरोप लगे हैं और मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी माना गया है। इसके अलावा भी शेख हसीना और उनकी पार्टी के कई बड़े नेताओं को कई मामलों में दोषी करार दिया गया है और सालों तक जेल की सजा दी गई है। ऐसे में शेख हसीना के बांग्लादेश लौटते ही उनके खिलाफ एक्शन तय माना जा रहा है।

भारत ने स्पष्ट की है स्थिति

बता दें कि जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को पद और देश दोनों छोड़ना पड़ा था। तब से हसीना भारत में ही हैं। बांग्लादेश ने तब से दर्जनों बार हसीना के प्रत्यर्पन की मांग की है। हालांकि भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट बता दी है। भारत ने साफ तौर पर कहा है कि भारत कानूनी प्रक्रियाओं की जांच कर रहा है और कोई भी निर्णय इसी आधार पर लिया जाएगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN