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सऊदी अरब ने ऑयल मार्केट को हिला दिया: 20 साल की सबसे बड़ी कीमत कटौती, भारत पर क्या असर?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सऊदी अरब ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को अपने एक फैसले से हिलाकर रख दिया है। कमजोर मांग और मिडिल ईस्ट के घटते तनाव का फायदा उठाते हुए सऊदी अरामको ने एशियाई ग्राहकों के लिए अगस्त 2026 से अपने मुख्य कच्चे तेल अरब लाइट की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती का ऐलान कर दिया है।

सऊदी अरब ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को चौंका दिया है। कमजोर वैश्विक मांग और मिडिल ईस्ट में घटते तनाव का फायदा उठाते हुए सऊदी अरामको ने एशियाई ग्राहकों के लिए अगस्त 2026 से प्रभावी अपने अरब लाइट क्रूड की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की भारी कटौती करने का ऐलान कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह पिछले दो दशकों से अधिक समय में की गई सबसे बड़ी कीमत कटौती है, जिसने पूरे ऑयल मार्केट को हिला दिया है।

सरकारी स्वामित्व वाली सऊदी अरामको द्वारा जारी आधिकारिक मूल्य निर्धारण दस्तावेज के अनुसार, अगस्त माह की डिलीवरी के लिए एशियाई खरीदारों को अरब लाइट क्रूड अब क्षेत्रीय बेंचमार्क से 1.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर उपलब्ध होगा। ब्लूमबर्ग ने इस दस्तावेज का हवाला देते हुए बताया कि मार्केट एक्सपर्ट्स ने औसतन 7-8 डॉलर प्रति बैरल की कटौती का अनुमान लगाया था, लेकिन सऊदी अरब ने उससे कहीं अधिक रियायत दी है।

क्यों लिया यह बड़ा फैसला?

यह कटौती ऐसे वक्त में आई है जब वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति बढ़ रही है और मांग में नरमी आ गई है। हाल ही में इजरायल-ईरान के बीच हुए संघर्ष के दौरान कच्चे तेल के दाम 80-85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। लेकिन संघर्ष थमने और हॉर्मुज में माल ढुलाई सामान्य होने के बाद कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

वर्तमान में ब्रेंट क्रूड का भाव 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जिससे युद्ध से जुड़ा जोखिम प्रीमियम लगभग खत्म हो गया है। साथ ही, सऊदी अरब ने संघर्ष के दौरान यानबू स्थित अपने लाल सागर टर्मिनल से निर्यात का रुख बदला था, लेकिन अब खाड़ी के मुख्य तेल टर्मिनलों से सप्लाई फिर से बढ़ गई है।

ओपेक और उसके सहयोगी देशों के समूह ‘ओपेक प्लस’ द्वारा अगस्त माह के लिए उत्पादन कोटा बढ़ाने पर सहमति बनने के बाद आपूर्ति की स्थिति और मजबूत हुई है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और अन्य खाड़ी देश अब हॉर्मुज जलमार्ग से बिना किसी बाधा के अधिक मात्रा में तेल निर्यात कर सकेंगे। इससे एशिया के बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।

भारत के लिए बड़ी राहत

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी कुल खपत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से मंगवाता है। सऊदी अरब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल है। ऐसे में इस ऐतिहासिक कटौती से भारत को बड़ी राहत मिलेगी।

वहीं, जानकारों का कहना है कि सऊदी के इस फैसले से आयात बिल में कमी आएगी, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर दबाव घटेगा। इसके अलावा रुपये को मजबूती मिलेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर बोझ कम होगा। सबसे बड़ी बात ये है कि घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटेंगी, जिससे आम लोगों को सीधे फायदा होगा। इसके अलावा महंगाई पर काबू पाने और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन सुधारने में भी मदद मिलेगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN