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सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन बंद होने से दुनिया की करीब 4% तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है। सोमवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर खाड़ी देशों और ईरान के बीच होने वाली बैठक टाल दी गई है। ओमान ने इसकी जानकारी दी। हूती विद्रोहियों के पेरिम द्वीप तक पहुंचने के बाद बाब-अल-मंदेब में भी खतरा बढ़ गया है। यह तेल और दूसरे सामान की आवाजाही का बेहद अहम समुद्री रास्ता है।
सोमवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 2.90 डॉलर यानी 2.77% बढ़कर 107.51 डॉलर प्रति बैरल हो गया था। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड 2.27 डॉलर यानी 2.27% बढ़कर 102.32 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। कारोबार शुरू होते ही दोनों की कीमतों में 3% से ज्यादा की तेजी आ गई थी।
अगर 100 डॉलर के पार बना रहा तेल तो क्या होगा
कच्चे तेल की कीमतें अगर लगातार 100 डॉलर के पार बना रहेगा तो भारत का आयात बिल बढ़त जाएगा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी करनी इनकी मजबूरी होगी। दुनिया के कई देशों में पिछले हफ्ते पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े। पड़ोसी पाकिस्तान में भी पेट्रोल के दाम 5 रुपये लीटर बढ़ गए।
सऊदी अरब पर हूती हमला
सऊदी अरब के सरकारी मीडिया ने रविवार को कुछ वीडियो जारी किए। इनमें देश के दक्षिणी जाजान प्रांत में हूती हमले के कारण घरों और एक मस्जिद को हुए नुकसान को दिखाया गया था। हूतियों ने यह भी कहा कि उन्होंने पड़ोसी प्रांत में मौजूद सऊदी सेना के एक ठिकाने पर हमला किया है।
होर्मुज में जहाज पर हमला: रविवार को ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने बताया कि होर्मुज में एक जहाज पर किसी प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और चालक दल को वहां से निकालना पड़ा।
ईरान ने कहा कि उसके तट के पास एक ईरानी व्यावसायिक जहाज को निशाना बनाया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और चालक दल के चार लोग घायल हुए।
तेल सप्लाई को लेकर बड़ी चिंता
तेल की कीमतों में सोमवार को तेजी की पहले से उम्मीद थी, क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब से तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसकी वजह सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से जुड़ी स्थिति है।
अभी दो दिन पहले ही सऊदी ने ओपेक को बताया था कि पिछले महीने उसके कच्चे तेल का उत्पादन फिर धड़ाम से गिर गया और 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। उसने इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर भड़की दुश्मनी को बताया, जिसने सऊदी के निर्यात रास्तों पर दबाव डाला।
इनपुट: रॉयटर्स
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