Source :- LIVE HINDUSTAN
अगर टाटा संस का IPO आता है तो उसकी वैल्यू ₹9-12.5 लाख करोड़ हो सकती है। यह उसके अंदर के पोर्टफोलियो की ₹15-16 लाख करोड़ की वैल्यू पर काफी बड़ा डिस्काउंट है। कई इन्वेस्टमेंट बैंकरों और वैल्यूएशन एक्सपर्ट्स ने यह जानकारी दी है। 11 सितंबर की चिट्ठी में केंद्रीय बैंक (RBI) ने टाटा संस की NBFC लाइसेंस सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी, जिससे उसकी पब्लिक लिस्टिंग का रास्ता लगभग साफ हो गया।
बैंक के आकलन में अंडरलाइंग वैल्यू ₹15-16 लाख करोड़
देश के एक बड़े बैंक के इक्विटी कैपिटल मार्केट्स हेड के एनालिसिस के मुताबिक, टाटा संस की अंडरलाइंग वैल्यू 15 लाख से 16 लाख करोड़ रुपये है। इसमें करीब ₹12 लाख करोड़ लिस्टेड होल्डिंग्स से और करीब ₹4 लाख करोड़ अनलिस्टेड एसेट्स से आते हैं।
इसमें लिस्टेड पोर्टफोलियो पर 41-45% की होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट, अनलिस्टेड एसेट्स पर करीब 15% की छूट, और IPO के लिए फेयर वैल्यू पर 10-15% की अतिरिक्त छूट लगाई गई है। ET की खबर के मुताबिक, अनलिस्टेड पोर्टफोलियो में करीब 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान डिविडेंड इनकम से पूरा किया जा रहा है।
शापूरजी पल्लोनजी की हिस्सेदारी
शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप के पास टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। पिछले महीने घूमे एक इन्वेस्टर नोट के मुताबिक, लुक-थ्रू बेसिस पर SP ग्रुप की टाटा संस में हिस्सेदारी करीब ₹2.3 लाख करोड़ की थी। यह आंकड़ा IPO के जरिए होने वाली अंतिम प्राइस डिस्कवरी के मुकाबले था।
एक बड़ी ग्लोबल ब्रांड वैल्यूएशन फर्म को टाटा संस की वैल्यू पर और बाउंडेशन दिखती हैं। उसका कहना है कि भविष्य की कमाई ग्रुप कंपनियों से मिलने वाली रॉयल्टी से ज्यादा रेगुलेटरी नीतियों से तय हो सकती है। फर्म ने यह चिंता भी जताई कि टाटा संस लिस्ट होने के बाद ट्रस्टी और डायरेक्टरों की एंट्री/नियुक्ति को लेकर स्थिति बदल सकती है, और ट्रस्ट का एजेंडा पहले की तरह लचीला नहीं रह सकता।
वैल्यूएशन के लिहाज से ‘बेहद सतर्क’ नजरिया
फर्म ने कहा, “इससे वैल्यूएशन के लिहाज से भविष्य का नजरिया ‘बेहद सतर्क’ हो सकता है।” फर्म के मुताबिक, “ट्रस्ट वाला ब्रांड ट्रांसफर करना या उससे कमाई करना भी मुश्किल होता है, जबकि कुछ एसेट्स को ट्रांसफर करके जल्दी वैल्यू पैदा की जा सकती है।”
टाटा ब्रांड को अलग प्रीमियम नहीं मिलना चाहिए?
फर्म के इक्विटी कैपिटल मार्केट्स हेड ने कहा कि टाटा ब्रांड को अलग प्रीमियम नहीं मिलना चाहिए। ब्रांड का फायदा पहले से लिस्टेड टाटा कंपनियों की मार्केट वैल्यू में दिखता है, और ग्रुप सिनर्जी उनके रेवेन्यू और मार्जिन में दिखती है। इसलिए अलग ब्रांड वैल्यू जोड़ना डबल काउंटिंग जैसा होगा।
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