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समुद्र में अब दुश्मन की खैर नहीं! भारतीय नौसेना को मिले 3 ‘गेम चेंजर’ जहाज; ताकत जान चीन-पाकिस्तान के उड़ जाएंगे होश

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक ताकत को नया आयाम देते हुए आज एक साथ तीन अत्याधुनिक स्वदेशी जहाजों को अपनी सेवा में शामिल कर लिया। 

समुद्र में अब दुश्मन की खैर नहीं… भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में अपनी ताकत का तूफान खड़ा करते हुए तीन ‘गेम चेंजर’ स्वदेशी जहाजों को एक साथ कमीशन कर दिया। पीएम मोदी ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE) में आयोजित भव्य समारोह में स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी, सर्वेक्षण पोत आईएनएस संशोधक और तटीय पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत आईएनएस अग्रे को नौसेना में शामिल किया। ये तीनों जहाज भारतीय नौसेना की लड़ाकू क्षमता को अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाएंगे। भारत के इस कदम से चीन और पाकिस्तान अभी से ही टेंशन में हैं। बताया जा रहा है कि यह कमीशन न केवल समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती देगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, तीनों जहाज पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और तकनीक पर आधारित हैं। इनमें 75 प्रतिशत से अधिक सामग्री भारतीय है और निर्माण में देशभर के 200 से ज्यादा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने योगदान दिया है। आगे बताया गया कि यह न केवल नौसेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ावा देगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी नई गति प्रदान करेगा।

आईएनएस दूनागिरी: ब्रह्मोस से लैस दुर्जेय स्टील्थ फ्रिगेट

प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित आईएनएस दूनागिरी नई पीढ़ी का स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। यह जहाज अपनी उन्नत स्टील्थ तकनीक के कारण रडार और अन्य सेंसरों से मुश्किल से पता चलता है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें, मध्यम दूरी की MRSAM वायु रक्षा प्रणाली, MFSTAR रडार, उन्नत सोनार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली समेत अत्याधुनिक हथियार लगे हैं।

नौसेना अधिकारी ने बताया कि यह फ्रिगेट लंबी दूरी के समुद्री अभियानों में पारंपरिक युद्ध, मिसाइल हमले और पनडुब्बी खतरे से निपटने में सक्षम है। इस श्रेणी के अन्य जहाज निगिरी, हिमगिरी, तारागिरी, उदयगिरी और विंध्यगिरी पहले से सेवा दे रहे हैं।

आईएनएस संशोधक: समुद्र की गहराइयों का सटीक मानचित्र

आईएनएस संशोधक ‘सर्वेक्षण पोत लार्ज’ (SVL) श्रेणी का अत्याधुनिक पोत है। इसका मुख्य कार्य समुद्र की गहराई, समुद्री तल की संरचना, नौवहन मार्गों और धाराओं का विस्तृत सर्वेक्षण करना है। इसमें स्वायत्त अनमैन्ड वाहन (AUV), रिमोट ऑपरेटेड वाहन (ROV) और मल्टी-बीम इको साउंडर जैसी विश्वस्तरीय प्रणालियां लगी हैं।

बताया गया कि यह पोत युद्ध अभियानों के अलावा व्यापारिक नौवहन, आपदा राहत और समुद्री अनुसंधान के लिए भी अहम साबित होगा। संशोधक संधायक श्रेणी का अंतिम सर्वेक्षण पोत है। इससे पहले संधायक, निर्देशक और इक्षक नौसेना में शामिल हो चुके हैं।

आईएनएस अग्रे: तटीय सुरक्षा की पहली पंक्ति

अर्नाला श्रेणी का आईएनएस अग्रे एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है। यह विशेष रूप से उथले तटीय जलक्षेत्रों, बंदरगाहों और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उन्नत सोनार सिस्टम लगे हैं। नौसेना अधिकारी ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी पता लगाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। अग्रे जैसी यूनिटें दुश्मन पनडुब्बियों को महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने से पहले ही रोकने में सक्षम हैं।

क्या है रणनीतिक महत्व?

नौसेना के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि तीन अलग-अलग क्षमताओं वाले जहाजों का एक साथ कमीशन नौसेना की संतुलित क्षमता विकास नीति को दर्शाता है। इससे खुले समुद्र में लंबी दूरी के अभियान, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और तटीय सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वर्तमान में हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगा। नौसेना के अनुसार, इन जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की लड़ाकू तत्परता और स्वदेशी जहाज निर्माण उद्योग की परिपक्वता, दोनों ही मजबूत हुई है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN