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तमिलनाडु सरकार ने राज्य की करोड़ों महिलाओं को बड़ी राहत देते हुए जून महीने की वित्तीय सहायता राशि उनके बैंक खातों में भेज दी है। सरकार की लोकप्रिय महिला सहायता योजना ‘मदिप्पुमिगु मगलिर तित्तम’ के तहत करीब 1.31 करोड़ महिला लाभार्थियों को इस महीने की किस्त जारी की गई है। प्रत्येक पात्र महिला के खाते में 1,000 रुपये की सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की गई। यह मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जारी की गई दूसरी मासिक किस्त है। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सरकार लगातार इस योजना को जारी रखे हुए है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक सहयोग मिल रहा है। राज्य सरकार की यह योजना महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने और उनके डेली खर्चों में मदद करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, हर महीने की तरह इस बार भी सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी गई। सरकार का दावा है कि यह योजना राज्य की महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण कल्याणकारी कार्यक्रमों में से एक बन चुकी है और इससे गरीब तथा मध्यम वर्गीय परिवारों को काफी सहायता मिल रही है।

विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने का वादा किया था। हालांकि, फिलहाल पुरानी योजना के तहत 1,000 रुपये प्रति माह की राशि ही दी जा रही है। सरकार का कहना है कि चुनावी घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और भविष्य में बढ़ी हुई सहायता राशि से जुड़ी योजना पर भी काम किया जा रहा है।

गौरतलब है कि यह योजना पहले पूर्ववर्ती सरकार के समय एक अलग नाम से संचालित होती थी। उस दौरान भी महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती थी। नई सरकार ने सत्ता में आने के बाद योजना का नाम बदल दिया, लेकिन लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता और भुगतान की प्रक्रिया को जारी रखा है।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, महिलाओं को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। यही कारण है कि हर महीने की निर्धारित तारीख पर राशि सीधे खातों में भेजी जा रही है। इससे लाभार्थियों को किसी सरकारी कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है।

राज्य की लाखों महिलाओं ने इस योजना को परिवार के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में मददगार बताया है। सरकार का मानना है कि ऐसी योजनाएं महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

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