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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/10/25/1200x900/ar_rahman_25_10_1792946199061_GIKc_1792946203132_SUn5_ddfb108e-62d6-451f-8935-016c139ea5b3_KHAd.pngम्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने अपनी पहली लाइव परफॉर्मेंस को याद किया। उन्होंने कहा कि उस बात को 30 साल हो गए हैं। उन्होंने ये भी बताया कि उस वक्त उन्हें कैसा महसूस हुआ था।
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर संगीतकार और ऑस्कर-ग्रैमी विजेता एआर रहमान का लाइव कॉन्सर्ट ‘द वंडरमेंट टूर’ अब मुंबई और दिल्ली में आने जा रहा है। इस बीच एआर रहमान ने अपने पहले लाइव टूर को याद किया। उन्होंने कहा कि जब वो पहली बार स्टेज पर थे, तो लगा कि वो मौत को देख रहे हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स से खास बातचीत में एआर रहमान से पूछा गया कि वो एक ऐसे संगीतकार हैं जिन्होंने एकांत में रहना पसंद है, और रात में ही काम करते हैं। लेकिन जब आप मंच पर होते हैं, तो एक दमदार कलाकार के रूप में सामने आते हैं। तो आपका कौन सा रूप आपके स्वभाव के ज्यादा करीब है?
जब स्टेज पर लगा मौत को देख रहे हैं एआर रहमान
इस सवाल का जवाब देते हुए एआर रहमान ने कहा, “मुझे लगता है दोनों। एक वक्त ऐसा था जब मैं स्टेज पर था और मुझे लगा कि मैं मौत को देख रहा हूं। मैं बहुत डरा हुआ था। साल 1996 में मलेशिया में मेरी पहली परफॉर्मेंस से लेकर अब तक हम जो अलग-अलग चीजें करते हैं जैसे कि अमेरिका में सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा के साथ, और ‘वंडरमेंट’, उसमें 30 साल हो गए।”
एआर रहमान बोले- मेरा म्यूजिक अलग था
उन्होंने आगे कहा कि उनका म्यूजिक काफी अलग था इसलिए स्टेज पर संगीतकारों को उसे समझना मुश्किल होता था। तो हर चीज को सही ढंग से पेश करने में और ऐसे संगीतकार खोजने में थोड़ा समय लगा जो मेरे संगीत में कुछ जोड़ सकें न कि महीनों की मेहनत से तैयार की गई चीज को बिगाड़ दें। उन्होंने कहा कि अब वो काफी सहज महसूस करते हैं।
क्या स्टेज पर जाने से पहले तैयारी करते हैं एआर रहमान?
इस बातचीत के दौरान एआर रहमान से ये भी पूछा गया कि अब जब वो बहुत सहज हो चुके हैं, तो क्या अब भी उन्हें स्टेज पर जाने से पहले तैयारी करनी पड़ती है या स्टेज पर जाते ही उनका स्विच फ्लिप हो जाता है? इस सवाल के जवाब में संगीतकार ने कहा, “इसमें कम से कम कुछ दिन तो लग ही जाते हैं। अगर कोई टूर हो, तो शायद एक महीने पहले से तैयारी करनी पड़ती है।”
रोजा में काम करने को लेकर क्या बोले एआर रहमान?
रहमान से ये भी पूछा गया कि लोग कहते हैं कि रोजा उनका बेस्ट काम या पीक था। क्या वो इसपर कुछ कहना चाहेंगे? एआर रहमान ने कहा- ये सच है। मेरी पहली फिल्म में, मुझे ऐसा लगा कि मैंने अपना सबकुछ दे दिया था जो मैं बन पाया था। लेकिन फिल्म का काम किसी एक इंसान के बस की बात नहीं है। ये केमिस्ट्री की तरह है- ऑक्सीजन जब हाइड्रोजन के साथ मिलती है तो पानी बन जाता है, और जब कार्बन के साथ मिलती है तो कार्बन मोनोऑक्साइड बन जाती है।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग डायरेक्टर्स और टीम के साथ उनका अलग ही पहलू नजर आया है। ‘ताल’ में सुभाष घई के साथ काम करना अलग था, ‘रोजा’ या ‘बॉम्बे’ में मणिरत्नम के साथ काम करना अलग था, ‘रॉकस्टार’ में इम्तियाज अली के साथ काम करना अलग, और ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ में डैनी बॉयल के साथ काम करना अलग था।
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