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हवाबाज पाकिस्तान का निकल गया दम, जबान देकर पलटा; अब चापलूसी करने लगे शहबाज शरीफ

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मक्का समझौते के तहत पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्की के बीच सहमति बनी है कि एक देश पर हमला सभी देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान इस समूह में तो है, लेकिन बाकी जगहों की तरह यहां भी वह अपनी फजीहत ही करा रहा है।

पाकिस्तान को बार-बार फजीहत करवाने की मानो आदत सी है। हाल ही में पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ मक्का समझौते पर दस्तखत तो कर लिए, लेकिन उसे यह तो नहीं पता कि शर्तों को निभाया कैसे जाए। दरअसल पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने हाल ही में समझौता किया था कि तीनों में से किसी एक देश पर हमले को सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा। अब समझौता लागू होने के कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तान को बड़ा इम्तिहान देना पड़ा। लेकिन वह इस इम्तिहान में बुरी तरह फेल हो गया। अब शहबाज शरीफ हमेशा की तरह चापलूसी में जुट गए हैं।

बता दें कि पश्चिम एशिया में इस वक्त नई जंग ने दस्तक दे दी है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और बाब अल मंदेब में लगातार मिसाइलें बरसा रहा है। ऐसे में कायदे से पाकिस्तान को सऊदी के मदद के लिए उतरना चाहिए था। लेकिन वह बहानेबाजी में जुट गया। पहले पाकिस्तान की तरफ से बयान आया कि मक्का समझौता लागू हो जाएगा, लेकिन फिर खुद इससे इनकार कर दिया।

शहबाज शरीफ चापलूसी में लगे

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ रविवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आगे चापलूसी करते दिखे। जानकारी के मुताबिक दोनों ने फोन पर बातचीत की जहां शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के साथ होने का ढोंग किया। पाक PM ने हालिया हुती हमलों की निंदा भी की।

खुद को नहीं पता करें तो करें क्या!

इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 3 दिन पहले ही ऐलान किया था कि अगर हुती विद्रोहियों में सऊदी अरब पर हमले जारी रखें तो मक्का डिफेंस एग्रीमेंट लागू हो जाएगा और और पाकिस्तानी कार्रवाई भी कर सकता है।हालांकि इसके कुछ समय बाद ही पाकिस्तान ने यू टर्न ले लिया। बाद में पाकिस्तान ने कहा कि यह समझौता डिफेंसिव प्रकृति का है और इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पाकिस्तानी सेना हुतियों के खिलाफ सीधे तौर पर सैन्य अभियान या हमले शुरू करेगी।

इधर बिगड़ रही स्थिति

इस बीच सऊदी अरब और यमन में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। यमन में ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों और सऊदी के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। हुतियों ने लाल सागर के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंदेब के पास एक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। इसे 2022 के युद्धविराम के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा सैन्य टकराव माना जा रहा है। यह खबर भी सामने आई है कि सऊदी ने अमेरिका से मदद मांगी है, लेकिन अमेरिका ने इनकार कर दिया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN