Source :- LIVE HINDUSTAN

तालिबान की नैतिकता पुलिस ने पश्चिमी अफगानिस्तान के प्रमुख शहर हेरात में महिलाओं पर सख्त ड्रेस कोड थोपने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ दिया है। पीवीपीवी के सशस्त्र कर्मचारियों ने सड़कों पर वाहनों को रोका, महिलाओं की तलाशी ली और चादर-बुर्का न पहनने के आरोप में महिलाओं को हिरासत में ले लिया।

तालिबान शासन के नैतिकता प्रचार एवं दुराचार निवारण मंत्रालय (PVPV) की सशस्त्र टीमों ने पश्चिमी अफगानिस्तान के प्रमुख शहर हेरात में महिलाओं के खिलाफ सख्त ड्रेस कोड लागू करने के लिए शनिवार को व्यापक अभियान चलाया। टीमों ने सड़कों पर वाहनों को रोका, महिलाओं की तलाशी ली और चादर-बुर्का न पहनने के आरोप में कई महिलाओं को हिरासत में ले लिया। स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई को डरावना और अत्यधिक दमनकारी बताया।

संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) ने रविवार को इस घटना पर गहरी चिंता जताई। मिशन के बयान में कहा गया कि हेरात में ड्रेस कोड का पालन न करने के आरोप में कई महिलाओं को गिरफ्तार किया गया और उन्हें हिरासत में रखा गया है। यूएनएएमए ने तालिबान अधिकारियों से अपील की है कि वे महिलाओं के मौलिक अधिकारों का सम्मान करें और मनमानी हिरासत की कार्रवाई तुरंत बंद करें।

दूसरी ओर स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि शनिवार को पीवीपीवी के कर्मचारी चाबुक और हथियार लेकर सड़कों पर घूमते नजर आए। उन्होंने बसों, टैक्सियों और निजी वाहनों को रोका तथा खासकर महिलाओं की पोशाक की जांच की। एक 23 वर्षीय महिला ने बताया कि मैंने दो अधिकारियों को देखा। एक के हाथ में चाबुक था। वे दो महिलाओं को जबरन वैन में बिठा रहे थे, जिन्होंने चादर नहीं पहनी थी। वे महिलाएं हिजाब, नकाब और अबाया पहने हुए थीं, लेकिन चादर नहीं थी। पूरा इलाका डर के साए में था। एक अन्य 27 वर्षीय महिला ने कहा कि अधिकारी हर वाहन को रोक रहे थे। अंदर बैठी महिलाओं से पूछताछ कर रहे थे और जो चादर नहीं पहने थे, उन्हें तुरंत वैन में ठूंस दिया। मैंने कम से कम 8-10 महिलाओं को इस तरह हिरासत में लेते देखा।

इस अभियान शुरू होते ही हेरात शहर में महिलाओं की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। एक 20 वर्षीय टैक्सी ड्राउवर ने बताया कि शहर में अब महिलाएं बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही हैं। हमें साफ आदेश दिया गया है कि बिना चादर वाली किसी भी महिला को गाड़ी में न बैठाएं, अन्यथा हम पर भी कार्रवाई होगी। एक 33 वर्षीय महिला ने दुख जताते हुए कहा कि हमें आजादी से सांस लेने का भी अधिकार नहीं बचा। हम स्कूल-यूनिवर्सिटी नहीं जा सकते, नौकरी नहीं कर सकते। अब घर से बाहर निकलना भी सजा बन गया है। जीवन बेहद मुश्किल और दमघोंटू हो गया है।

बता दें कि अगस्त 2021 में सत्ता में वापसी के बाद तालिबान महिलाओं पर प्रतिबंधों की श्रृंखला लगातार बढ़ा रहा है। वर्तमान में पूरे अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलते समय पूर्ण शारीरिक कवरेज अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें हिजाब, नकाब, अबाया और अब चादर-बुर्का भी शामिल है। पीवीपीवी मंत्रालय ने हिरासत की पुष्टि या अस्वीकृति से इनकार कर दिया है। मंत्रालय के सूचना विभाग ने कहा है कि हेरात में कुछ भी असामान्य नहीं हो रहा है। ड्रेस कोड अल्लाह का आदेश और देश का कानून है। इसे लागू करना हमारा धार्मिक और कानूनी कर्तव्य है।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठन तालिबान की महिलाविरोधी नीतियों की लगातार निंदा कर रहे हैं। महिलाओं की शिक्षा पर पाबंदी, पार्कों-जिम में प्रवेश रोक, गैर-महरम के साथ यात्रा पर प्रतिबंध और अब सड़कों पर जबरन ड्रेस कोड की तलाशी, ये सभी कदम महिलाओं को घरों तक सीमित करने की तालिबान की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तालिबान की सख्त इस्लामी व्याख्या के तहत महिलाओं को लगभग सभी सार्वजनिक क्षेत्रों से बाहर कर दिया गया है, जिससे अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति 1990 के दशक के तालिबान शासन की याद दिलाती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN