Home BUSINESS NEWS HINDI होर्मुज खुलते ही बदल गई तस्वीर! पेट्रोल-डीजल कीमतों पर आया ये बड़ा...

होर्मुज खुलते ही बदल गई तस्वीर! पेट्रोल-डीजल कीमतों पर आया ये बड़ा अपडेट

2
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

दुनियाभर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ हफ्ते पहले तक आशंका जताई जा रही थी कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने से तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच सकती हैं। कई एक्सपर्ट तो 200 डॉलर प्रति बैरल तक का अनुमान लगाने लगे थे, लेकिन अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद तेल बाजार में राहत देखने को मिली है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से फिर से तेल की सप्लाई शुरू होने लगी है और अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भविष्य में तेल की अधिक सप्लाई यानी “ऑयल सरप्लस” की संभावना जता रही हैं। यही कारण है कि आने वाले सालों में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2027 तक वैश्विक तेल प्रोडक्शन डिमांड की तुलना में कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा। एजेंसी के मुताबिक अगले दो सालों में दुनिया में तेल की सप्लाई लगभग 80 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ सकती है, जबकि मांग केवल 20 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ने का अनुमान है, यानी बाजार में अतिरिक्त तेल उपलब्ध होगा, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

एनर्जी एक्सपर्ट क्रिस्टोफ रुहल का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रहती है, तो 2027 तक कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकती है। भारत जैसे देशों के लिए यह बड़ी राहत की खबर हो सकती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत कमी देखने को नहीं मिलेगी। ऊर्जा मामलों के जानकार अमित भंडारी के अनुसार भारत में तेल कंपनियों के पास अभी भी महंगे दाम पर खरीदा गया कच्चा तेल मौजूद है। इसलिए कीमतों में वास्तविक राहत आने में 5 से 6 महीने तक का समय लग सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका भी काफी अहम रही है। दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक चीन पिछले कुछ समय से तेल की खरीद कम कर रहा है। चीन के तेल आयात में आई इस गिरावट ने वैश्विक मांग को कमजोर किया है और कीमतों को बढ़ने से रोका है। यही वजह है कि युद्ध जैसी स्थिति बनने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर नहीं जा सकीं।

हालांकि, सभी एक्सपर्ट तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट को लेकर पूरी तरह सहमत नहीं हैं। तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC का मानना है कि बाजार अभी भी अनिश्चित बना हुआ है और सप्लाई सरप्लस के अनुमान जल्दबाजी हो सकते हैं। OPEC का कहना है कि भू-राजनीतिक जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और किसी भी समय हालात बदल सकते हैं।

फिलहाल, निवेशकों और तेल बाजार की नजर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हुई है। अगर वहां से तेल की सप्लाई सामान्य बनी रहती है और ईरान-अमेरिका समझौता कायम रहता है, तो आने वाले समय में भारत को सस्ते आयात, कम महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत का फायदा मिल सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN