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₹19 लाख करोड़ डूबे! TCS-Infosys समेत IT शेयरों में हाहाकार, अब क्या करें निवेशक?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर के निवेशकों के लिए साल 2026 अब तक काफी मुश्किल साबित हुआ है। कभी निवेशकों की पहली पसंद रहने वाली देश की दिग्गज आईटी कंपनियां अब भारी दबाव में हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो और LTIMindtree जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर अपने ऑल टाइम हाई से 50% या उससे अधिक टूट चुके हैं। इस गिरावट ने निवेशकों की करीब 19.28 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ कर दी है। सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या आईटी सेक्टर की मुश्किलें यहीं खत्म होंगी या अभी और गिरावट बाकी है?

TCS को सबसे बड़ा झटका

सबसे ज्यादा झटका देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS को लगा है। अगस्त 2024 में कंपनी का शेयर करीब ₹4,592 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, लेकिन अब यह गिरकर लगभग ₹2,033 तक आ गया है, यानी शेयर में करीब 56% की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान कंपनी का मार्केट कैप भी लगभग 16.47 लाख करोड़ रुपये से घटकर 7.35 लाख करोड़ रुपये रह गया, जिससे अकेले TCS में ही निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए।

इंफोसिस और विप्रो का शेयर गिरा

दूसरी ओर इंफोसिस का शेयर भी दिसंबर 2024 के अपने रिकॉर्ड हाई ₹2,006 से गिरकर करीब ₹1,006 पर पहुंच गया है, यानी इसमें लगभग 50% की गिरावट आ चुकी है। विप्रो का शेयर भी अपने उच्च स्तर से करीब 54% टूट चुका है, जबकि LTIMindtree में भी 53% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा HCLTech, Mphasis, Persistent Systems और टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) जैसे अन्य आईटी शेयर भी लगातार दबाव में कारोबार कर रहे हैं।

अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में आर्थिक सुस्ती

एक्सपर्ट का मानना है कि इस गिरावट के पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि कई बड़े बदलाव जिम्मेदार हैं। सबसे पहला कारण अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में आर्थिक सुस्ती है, जहां से भारतीय आईटी कंपनियों को सबसे ज्यादा कारोबार मिलता है। ऊंची ब्याज दरों और महंगाई के कारण विदेशी कंपनियां अपने आईटी खर्च में कटौती कर रही हैं। इससे नए प्रोजेक्ट मिलने की रफ्तार धीमी हो गई है और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ रहा है।

दूसरा और सबसे बड़ा कारण

दूसरा और सबसे बड़ा कारण जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Generative AI) है। ChatGPT और अन्य AI टूल्स के आने के बाद सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कोडिंग, कस्टमर सपोर्ट और बैक ऑफिस जैसे कई काम अब कम लोगों में पूरे हो रहे हैं। पहले जहां कंपनियों को हजारों इंजीनियरों की जरूरत होती थी, वहीं अब AI कई काम मिनटों में कर रहा है। इससे भारतीय आईटी कंपनियों का रेगुलर लेबर आर्बिट्राज मॉडल चुनौती में आ गया है।

12-24 महीनों तक बना रहेगा दबाव

एनालिस्ट का कहना है कि आने वाले 12 से 24 महीनों तक आईटी कंपनियों की आय और मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है। कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि कंपनियां भविष्य में भी मुनाफा कमाती रहेंगी, लेकिन उनके शेयरों का वैल्यूएशन पहले जैसा ऊंचा शायद न रहे, यानी कंपनियों की कमाई ठीक रहने के बावजूद शेयरों को पहले जितना प्रीमियम नहीं मिल सकता।

AI केवल खतरा नहीं बल्कि अवसर भी

हालांकि, हर तस्वीर का दूसरा पहलू भी होता है। कई मार्केट एक्सपर्ट मानते हैं कि AI केवल खतरा नहीं बल्कि अवसर भी है। क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा सेंटर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमेशन जैसे सेक्टर्स में नई डिमांड पैदा हो रही है। जो आईटी कंपनियां समय रहते खुद को इन नई तकनीकों के अनुसार ढाल लेंगी, वे भविष्य में दोबारा मजबूत वापसी कर सकती हैं।

क्या करें निवेशक?

फिलहाल, निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि आईटी सेक्टर में जल्दबाजी में बड़ा दांव लगाने से बचें। अगर किसी का निवेश लंबी अवधि का है, तो मजबूत कंपनियों पर नजर बनाए रखना समझदारी हो सकती है, लेकिन यह भी सच है कि सेक्टर में अस्थिरता अभी कुछ समय तक बनी रह सकती है। ऐसे में सोच-समझकर और जोखिम का आकलन करके ही निवेश करना बेहतर रहेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN