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₹229 का शेयर ₹91 रुपये में बेच रही सरकार, नवरत्न कंपनी IRFC को खरीदने के लिए क्या आप हैं तैयार?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) के शेयर गुरुवार, 25 जून को सुर्खियों में रहेंगे, क्योंकि कंपनी का ऑफर फॉर सेल (OFS) रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए आज बोली लगाने के लिए खुल रहा है। इस सेल ऑफर को लेकर बाजार में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बुधवार को नॉन-रिटेल इन्वेस्टर्स ने आईआरएफसी ओएफएस में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने अपने लिए रिजर्व शेयरों के मुकाबले 1.86 गुना अधिक बोलियां लगाईं। इस भारी मांग को देखते हुए भारत सरकार अब ग्रीन शू विकल्प का उपयोग कर रही है, यानी तय हिस्से से अतिरिक्त शेयर भी बेचे जाएंगे।

शेयर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो आईआरएफसी का भाव बुधवार को 6.8 फीसदी की गिरावट के साथ 91.93 रुपये पर बंद हुआ, जो ओएफएस के फ्लोर प्राइस के बेहद करीब है। यह शेयर इस साल अब तक 26.9 फीसदी लुढ़क चुका है और वर्ष 2024 में छुए गए अपने ऑल टाइम हाई 229 रुपये से करीब 60 फीसदी नीचे आ चुका है।

कैसे खरीद पाएंगे OFC के जरिए शेयर

खुदरा निवेशक अगर इस ओएफएस में हिस्सा लेना चाहते हैं तो उन्हें अपना ट्रेडिंग खाता खोलकर उसमें “कॉरपोरेट एक्शन” या “ओएफएस” वाले सेक्शन में जाना होगा। वहां जाकर सबसे पहले फ्लोर प्राइस, बोली की मात्रा, कीमत और अन्य जरूरी जानकारियों को ध्यानपूर्वक जांच लें।

इसके बाद बोली लगाते समय हमेशा यह सुनिश्चित करें कि आपकी बोली की कीमत कट-ऑफ प्राइस से अधिक हो, अन्यथा आपकी बोली सीधे खारिज हो सकती है। इसके अलावा, निवेशकों को अपने खाते में पर्याप्त फंड भी रखनी चाहिए। मंजूर होने वाली बोलियों की रकम कट जाएगी और बाकी की राशि वापस लौटा दी जाएगी।

आईआरएफसी ओएफएस की मुख्य बातें

सरकार कंपनी में अपनी 2 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच रही है, जिसमें 1 फीसदी या करीब 13.06 करोड़ शेयरों का आधार निर्गम शामिल है और ग्रीन शू विकल्प के जरिए अतिरिक्त 1 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का प्रावधान है। इस पूरी पेशकश के लिए फ्लोर प्राइस 91 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

मार्च तिमाही के अंत में सरकार के पास कंपनी की 84.65 फीसदी हिस्सेदारी थी, जबकि खुदरा और गैर-खुदरा शेयरधारकों के पास क्रमशः 9.68 फीसदी और 1.02 फीसदी हिस्सेदारी थी।

किन-किन कंपनियों में हिस्सेदारी बेच चुकी है सरकार

सरकार की विनिवेश मुहिम अब और रफ्तार पकड़ती दिख रही है। आईआरएफसी में हिस्सेदारी बिक्री से पहले कोल इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एनएलसी इंडिया, एनएचपीसी और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसी कंपनियों में भी ओएफएस लाई जा चुकी है। बता दें कि इस साल अब तक लाई गई सभी ओएफएस में सरकार को जबरदस्त मांग मिली है और हर बार ग्रीन शू विकल्प का इस्तेमाल करना पड़ा है।

कोचीन शिपयार्ड में भी ओएफएस लाने की योजना

इसी सप्ताह सूत्रों ने सीएनबीसी-टीवी18 को बताया कि सरकार जल्द ही कोचीन शिपयार्ड में भी ओएफएस लाने की योजना बना रही है। वित्त वर्ष 2027 के लिए सरकार ने विनिवेश का लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपये रखा है और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के बाद संकेत दिए थे कि आगे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

(डिस्‍क्‍लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

SOURCE : LIVE HINDUSTAN