Home BUSINESS NEWS HINDI 15 जुलाई से सस्ती होगी स्कॉच व्हिस्की? भारत-UK डील का आम लोगों...

15 जुलाई से सस्ती होगी स्कॉच व्हिस्की? भारत-UK डील का आम लोगों को बड़ा फायदा

2
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जो आयातित (Imported) स्कॉच व्हिस्की और जिन खरीदते हैं। इस डील के तहत स्कॉच व्हिस्की और जिन पर लगने वाली 150% आयात शुल्क (Import Duty) को पहले घटाकर 75% किया जाएगा और अगले 10 सालों में इसे 40% तक लाया जाएगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शराब की कीमतें भी 50% या उससे ज्यादा कम हो जाएंगी। आइए इसका जरा विस्तार से समझते हैं।

एक्सपर्ट का कहना है कि किसी भी शराब की अंतिम कीमत में सिर्फ आयात शुल्क ही शामिल नहीं होता। इसके अलावा राज्य सरकार का एक्साइज टैक्स, VAT, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर का मार्जिन, ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और मार्केटिंग जैसे कई खर्च भी जुड़े होते हैं। इसलिए ग्राहकों को शुरुआती दौर में करीब 5% से 10% तक की कीमत में कमी देखने को मिल सकती है, यानी एक बोतल पर कुछ 100 रुपये तक की बचत संभव है।

हर राज्य में एक जैसी कटौती?

कीमत में कमी हर राज्य में एक जैसी नहीं होगी। महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जहां टैक्स ज्यादा है, वहां स्कॉच की कीमत लगभग 5% तक ही घट सकती है। वहीं, हरियाणा जैसे कम टैक्स वाले राज्यों में यह राहत 15% तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां सरकारी एजेंसियां शराब की बिक्री नियंत्रित करती हैं, वहां ग्राहकों तक इस राहत को पहुंचने में ज्यादा समय लग सकता है।

इस समझौते का सबसे ज्यादा फायदा उन स्कॉच व्हिस्की ब्रांड्स को होगा, जो स्कॉटलैंड में पूरी तरह तैयार होकर सीधे भारत आयात (Bottled-in-Origin) किए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल (Johnnie Walker Black Label) और चिवास रीगल 12 इयर्स (Chivas Regal 12 Years) जैसी करीब ₹3,888 कीमत वाली बोतलें 5-10% सस्ती होकर ₹3,499 से ₹3,694 के बीच मिल सकती हैं। इसी तरह बैलेन्टाइन्स फाइनेस्ट, मंकी शोल्डर (Ballantine’s Finest), मंकी शोल्डर (Monkey Shoulder) और लागावुलीन 16 इयर्स (Lagavulin 16 Years) जैसी प्रीमियम स्कॉच की कीमतों में भी अच्छी-खासी कमी आ सकती है।

हालांकि, ग्राहकों को सस्ती स्कॉच के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। एक्सपर्ट के मुताबिक FTA लागू होने के बाद भी 6 महीने से 1 साल का समय लग सकता है। इसकी वजह यह है कि आयातकों को पहले पुराना स्टॉक बेचना होगा, नई कीमतों के अनुसार MRP तय करनी होगी और राज्यों से मंजूरी लेनी होगी।

इस समझौते से सिर्फ कीमतें ही नहीं घटेंगी, बल्कि भारतीय बाजार में नई स्कॉच ब्रांड्स की एंट्री भी बढ़ सकती है। इससे ग्राहकों को पहले से ज्यादा विकल्प मिलेंगे और प्रीमियम शराब का बाजार भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। भारत-यूके FTA को शराब उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN