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23 महीने के हाई पर खुदरा महंगाई, सितंबर के आंकड़ों ने बढ़ाई टेंशन

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से मापी गई भारत की खुदरा महंगाई सितंबर 2026 में बढ़कर 5.54% हो गई, जो पिछले 23 महीनों में सबसे ज्यादा है

खाद्य वस्तुओं के महंगा होने से सितंबर के महीने में खुदरा महंगाई बढ़ गई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह 23 महीने का उच्चतम स्तर है। वहीं, अगस्त के महीने में खुदरा महंगाई 4.83 प्रतिशत रही थी। जनवरी में जारी नई इंडेक्स सीरीज के तहत सितंबर की महंगाई दर अबतक के सबसे ऊंचे स्तर पर रही। बता दें कि आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई के औसतन 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। तीसरी तिमाही में इसके छह प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

ग्रामीण इलाकों में बढ़ी महंगाई

एक बार फिर शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में महंगाई की मार ज्यादा दिखी। शहरी इलाकों में मुद्रास्फीति की दर 4.88 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 6.08 प्रतिशत रही। ग्रामीण इलाकों में खुदरा खाद्य महंगाई 8.06 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 7.18 प्रतिशत रही। आंकड़े बताते हैं कि सितंबर में खाने-पीने की चीजों के अलावा रेस्त्रां, आवासीय सेवाएं एक साल पहले के मुकाबले 9.36 प्रतिशत और परिवहन सेवाएं 5.01 प्रतिशत महंगी हुई हैं। परिवहन सेवाओं में माल ढुलाई 15 प्रतिशत महंगी हुई और मुद्रास्फीति बढ़ाने में इसका बड़ा योगदान रहा। सोने-चांदी के दाम बढ़ने से निजी सौंदर्य प्रसाधन, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुओं और सेवाओं के वर्ग में महंगाई दर 13.75 प्रतिशत रही।

महंगाई के आंकड़ों में बताया गया है कि सितंबर में प्याज की औसत कीमत एक साल पहले के मुकाबले 108 प्रतिशत, चांदी के गहनों की 88 प्रतिशत, अदरक की 63 प्रतिशत, लहसून की 55 प्रतिशत और नींबू की 36 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, आलू 12 प्रतिशत, टमाटर नौ प्रतिशत, मोटर वाहन पांच प्रतिशत और भिंडी तथा नारियल चार-चार प्रतिशत सस्ता हुआ है।

आरबीआई की बढ़ेगी टेंशन?

महंगाई के आंकड़े रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की टेंशन बढ़ा सकते हैं। दरअसल, रिजर्व बैंक ने महंगाई कंट्रोल के लिए रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। इसके तहत आरबीआई ने रेपो रेट 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। करीब चार साल में यह रेपो रेट में पहली वृद्धि है।

इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने रुख में बदलाव के साथ संकेत दिया कि निकट अवधि में प्रमुख ब्याज दर में कटौती की संभावना नहीं है। इसके उलट बढ़ती महंगाई, रुपये की विनिमय दर में गिरावट तथा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच आगे भी नीतिगत दर बढ़ाई जा सकती है।

रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर कॉमर्शियल बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। रेपो रेट बढ़ाने से आवास, वाहन समेत अन्य कर्ज महंगे होते हैं। वहीं, मौजूदा लोन लेने वाले ग्राहकों की मासिक किस्त भी बढ़ जाती हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN