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4 दिन में डूब गए ₹14 लाख करोड़, सेंसेक्स 2700 अंक से अधिक टूटा, क्या हैं कारण?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Why Stock Market Crash: 4 दिन से भी कम समय में सेंसेक्स 2700 अंक से अधिक टूट चुका है
  • इसी तरह निफ्टी पिछले चार सेशन में 23446 से 22,569 के लेवल तक आ गया है
  • बाजार में इस दबाव के पीछे मुख्य रूप से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिका की ऊंची बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को माना जा रहा है

घरेलू शेयर मार्केट की हालत पिछले सेशन से काफी खराब है। 4 दिन से भी कम समय में सेंसेक्स 2700 अंक से अधिक टूट चुका है। इस अवधि में बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 483 लाख करोड़ से घटकर 469 लाख करोड़ रुपये रह गया है। यानी इस अवधि में निवेशकों के 14 लाख करोड़ रुपये डूब गए। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़े 3 कारणों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी बांड यील्ड में उछाल और घरेलू मार्केट से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी है।

23 सितंबर को बीएसई सेंसेक्स 74828 के लेवल पर बंद हुआ था। 24 सितंबर को गिरावट के साथ खुला और 1247 अंक लुढ़क कर 73580 के लेवल पर बंद हुआ। हालांकि, 25 सितंबर को सेंसेक्स 315 अंक ऊपर 73895 के लेवल पर बंद हुआ था, लेकिन जब सोमवार 28 सितंबर को बंद हुआ तो 1124 अंकों की चोट दे चुका था। सेंसेक्स कई महीने के निचले लेवल 72771 के लेवल पर बंद हो गया।

आज यानी 29 सितंबर को 700 से अधिक अंक टूटकर 72064 के निचले स्तर तक आ गया था। हालांकि, अभी ट्रेडिंग जारी है। सेंसेक्स का ऑल टाइम हाई 86159 है, जो दिसंबर 2025 में बना था।

इसी तरह निफ्टी पिछले चार सेशन में 23446 से 22,569 के लेवल तक आ गया है। इस अवधि में निफ्टी 877 अंकों का गोता लगा चुका है। इस साल निफ्टी 15 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है।

बाजार में गिरावट के 3 बड़े कारण

बाजार में इस दबाव के पीछे मुख्य रूप से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिका की ऊंची बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को माना जा रहा है।

1. महंगा क्रूड बढ़ा रहा बाजार का तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 2% चढ़कर 106.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और संघर्ष खत्म करने के ईरान के प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खारिज किए जाने के बाद बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी।

भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में लंबे समय तक तेल महंगा रहने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई तथा कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।

2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.2% के ऊपर

अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5.2% के ऊपर पहुंचना भी भारतीय शेयर बाजार के लिए दबाव का कारण बना। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से डॉलर आधारित निवेश अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकता है और उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंची यील्ड और महंगे तेल के कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। इससे दुनिया भर में ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका बढ़ती है।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव

सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं। 25 सितंबर तक FPIs ने शेयर बाजार के जरिए करीब ₹25,682 करोड़ की इक्विटी बेची थी। हालांकि, इसी अवधि में उन्होंने प्राथमिक बाजार यानी IPO में करीब ₹8,551 करोड़ का निवेश किया।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN