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4% ब्याज, 5 लाख रुपये तक लिमिट…इन लोगों को सरकार से मिल जाएगा क्रेडिट कार्ड

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) में सरकार की ओर से लाभार्थी को शर्तों के साथ 4 पर्सेंट तक के मामूली ब्याज पर 5 लाख रुपये तक लिमिट मिलती है
  • आइए डिटेल में इसके बारे में जान लेते हैं

वैसे तो किसानों के लिए सरकार की कई योजनाएं हैं। इनमें से एक योजना के तहत किसानों को क्रेडिट कार्ड भी दिया जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के तहत सरकार की ओर से लाभार्थी को शर्तों के साथ 4 पर्सेंट तक के मामूली ब्याज पर 5 लाख रुपये तक की लिमिट मिलती है। सरकार यह कार्ड बैंकों के माध्यम से लाभार्थियों को देती है। आइए डिटेल में इसके बारे में जान लेते हैं।

कब हुई थी शुरुआत?

किसानों को खेती के सामान और उत्पादन से जुड़ी जरूरतों के लिए क्रेडिट देने को साल 1998 में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) शुरू किया गया था। बाद में इसमें निवेश के लिए क्रेडिट और खेती से जुड़ी दूसरी गतिविधियां भी शामिल की गईं। योजना के तहत कर्ज की सीमा किसान की खेती, फसल और बैंक के आकलन के आधार पर तय होती है।

सरकार ने 2006-07 में केंद्रीय सेक्टर स्कीम के तौर पर संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना (MISS) शुरू की। यह स्कीम यह सुनिश्चित करती है कि किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिए सस्ती दरों पर क्रेडिट मिले। यह स्कीम किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से उबरने में भी मदद करती है और समय पर लोन चुकाने को बढ़ावा देती है।

संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना

बता दें कि 2025-26 के बजट में सरकार ने संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत रियायती कर्ज की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का ऐलान किया था। MISS के तहत 3 लाख रुपये तक के शॉर्ट टर्म एग्री लोन पर 1.5 फीसदी ब्याज सब्सिडी दी जाती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर 7 फीसदी रहती है। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को अतिरिक्त 3 फीसदी री-पेमेंट इंसेंटिव मिलता है। इस तरह समय पर भुगतान करने पर प्रभावी ब्याज दर 4 फीसदी तक आ सकती है।

रुपये कार्ड की भी सुविधा

लाभार्थियों को एक रुपे कार्ड प्रोवाइड किया जाता है जिसमें फ्लेक्सिबल विड्रॉल, डिजिटल पेमेंट और एक बार के डॉक्युमेंटेशन की सुविधा है, जिससे लोन मिलना सरल और आसान हो जाता है। इसमें खेती, कटाई के बाद की जरूरतें, संबद्ध और गैर कृषि कार्यकलाप शामिल हैं। इसे कॉमर्शियल, क्षेत्रीय, ग्रामीण और सरकारी बैंकों के जरिए लागू किया जाता है ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।

किसान क्रेडिट कार्ड के पात्र लाभार्थी

-व्यक्तिगत किसान और संयुक्त उधारकर्ता जो मालिक-कृषक हैं।

– किरायेदार किसान, मौखिक पट्टेदार और बटाईदार।

– इस योजना में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) भी शामिल हैं। इसमें काश्तकार किसानों और बटाईदारों द्वारा गठित समूह शामिल हैं। पीआईबी के आंकड़े के मुताबिक मार्च 2026 में देश भर में 7.72 करोड़ से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड चालू हैं, जिनपर 10.2 लाख करोड़ रुपये का बकाया लोन है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN