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9/11 हमले ने बदली जिंदगी, अब न्यूयॉर्क में बड़ा पद पाने की रेस में, कौन हैं सरिता कोमाटिरेड्डी?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

तेलंगाना के करीमनगर जिले के एक गांव से शुरू होकर अमेरिकी अदालतों तक पहुंचने वाली सरिता कोमाटिरेड्डी अब न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवार हैं। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिला है। उन्होंने अपराध, दुकानों से चोरी और धोखाधड़ी पर रोक लगाने का वादा किया है।

तेलंगाना के करीमनगर जिले के एक छोटे गांव से लेकर अमेरिकी अदालतों तक का सफर तय करने वाली सरिता कोमाटिरेड्डी अब न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवार हैं। उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिला है। उन्होंने अपराध, दुकानों से चोरी (रिटेल थेफ्ट) और धोखाधड़ी पर रोक लगाने का वादा किया है। भारतीय मूल की यह उम्मीदवार अपने समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का भी मौका देख रही हैं और कहती हैं कि उनकी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है।

इंडिया टुडे से बात करते हुए कोमाटिरेड्डी ने कहा कि फेडरल प्रॉसिक्यूटर के रूप में काम करने और बाद में यूएस ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) में चीफ ऑफ स्टाफ बनने के अनुभव ने उन्हें इस रेस में आने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि न्यूयॉर्क में अपराध, बेघर होना और धोखाधड़ी उन लोगों की जिंदगी और मुश्किल बना रहे हैं जो पहले से महंगाई और सस्ती चीजों के संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सस्ती चीजों के संकट के बीच अपराध जिंदगी को और कठिन बना रहा है। उनका मानना है कि अटॉर्नी जनरल को अपराध और धोखाधड़ी के खिलाफ मुकदमा चलाना चाहिए, अपराधियों से पैसे वसूलने चाहिए और टैक्सपेयर्स को वापस लौटाना चाहिए।

9/11 के हमलों ने बदली जिंदगी की दिशा

कोमाटिरेड्डी का पब्लिक सर्विस में आने का फैसला काफी हद तक 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों से प्रभावित था। हार्वर्ड कॉलेज और हार्वर्ड लॉ स्कूल से ग्रेजुएशन करने के बाद वे न्यूयॉर्क लौटीं और फेडरल प्रॉसिक्यूटर के रूप में काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि मैं कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे 9/11 जैसा हमला दोबारा न हो। 9/11 के बाद मैंने सोचा, चलो मैं टेररिज्म प्रॉसिक्यूटर बन जाती हूं। मैं कोर्टरूम में टेररिज्म से लड़ सकती हूं।

उन्होंने अल-कायदा के नेताओं और ISIS के नेताओं व सदस्यों पर मुकदमा चलाया। इनमें वे लोग भी शामिल थे जो आतंकी समूहों में शामिल होना चाहते थे। बाद में उनका काम अंतरराष्ट्रीय नशे की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों तक पहुंच गया। उन्हें अमेरिका में फेंटानिल और अन्य जानलेवा ड्रग्स लाने वाले कार्टेल को टारगेट करने की कोशिशों की अगुवाई करने को कहा गया। उन्होंने जिन मामलों का जिक्र किया, उनमें सिनालोआ कार्टेल के नेताओं और कुछ मैक्सिकन सरकारी अधिकारियों पर मुकदमा चलाना भी शामिल था। ये अधिकारी एल चापो और कार्टेल से रिश्वत ले रहे थे, जिससे कार्टेल को अपना काम बढ़ाने में मदद मिल रही थी।

DEA में चीफ ऑफ स्टाफ और पब्लिक सेफ्टी पर फोकस

इस काम की वजह से अंत में उन्हें राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में DEA में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में नियुक्त किया गया। वे करीब एक साल तक इस पद पर रहीं। लगभग 12 साल के अपने करियर को याद करते हुए कोमाटिरेड्डी ने पब्लिक सर्विस और लोगों की सुरक्षा को अपनी मुख्य थीम बताया। अब वे यही अनुभव न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में लाना चाहती हैं। उनका तर्क सीधा है कि ऑफिस को अपराध और धोखाधड़ी पर ध्यान देना चाहिए, बार-बार अपराध करने वालों को जवाबदेह ठहराना चाहिए और आम लोगों को सुरक्षित महसूस कराना चाहिए।

परिवार की कहानी और जड़ों से जुड़ाव

कानून लागू करने पर पूरा ध्यान देने के बावजूद, कोमाटिरेड्डी की कहानी उनके परिवार के भारत छोड़ने के फैसले से शुरू होती है। वे ब्रुकलिन में पैदा हुईं। उनकी मां हैदराबाद में पली-बढ़ीं, जबकि पिता करीमनगर जिले के चेगोन गांव से हैं। परिवार अब भी गांव जाता है। वे चाहती हैं कि उनके बच्चे जानें कि उनके दादा-दादी कहां से आए थे और अमेरिका में जिंदगी बनाने के लिए उन्हें क्या-क्या करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता मौके की तलाश में और कड़ी मेहनत करके अपने सपने पूरे करने के लिए यहां आए थे। घर पर परिवार भारतीय परंपराओं को मानता था। वे अपनी दादी के साथ रिश्तेदारों से मिलने भारत भी गईं। इन अनुभवों का श्रेय वे अपनी जड़ों से जुड़े रहने को देती हैं। उन्होंने अपनी परवरिश से जो मूल्य सीखे ( कड़ी मेहनत करना, ईमानदारी से काम करना और दूसरों की मदद करना ) वे बातें आज भी उन्हें गाइड करती हैं।

पहली देसी राज्यव्यापी उम्मीदवार

कोमाटिरेड्डी खुद को न्यूयॉर्क के इतिहास में पहली देसी स्टेटवाइड कैंडिडेट बताती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय और साउथ एशियन कम्युनिटी के लोगों ने उनसे संपर्क किया और उनकी कैंडिडेसी पर गर्व जताया। उन्हें उनके समर्थन की उम्मीद है। लेकिन वे अपने अभियान को सिर्फ डायस्पोरा तक सीमित नहीं रखना चाहतीं। उनका कहना है कि पब्लिक सेफ्टी को नस्ल, धर्म या पार्टी लाइन के आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए। उन्होंने अपनी विरोधी और मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स की आलोचना की है। उन पर आरोप लगाया है कि उन्हें ऑफिस के रोजमर्रा के कामों से ज्यादा राष्ट्रीय राजनीतिक नाम कमाने में दिलचस्पी है। कोमाटिरेड्डी ने कहा कि उनकी अपनी प्राथमिकता अपराध और धोखाधड़ी से लड़ना होगी।

मेयर जोहरान ममदानी के साथ काम करने पर रुख

उन्होंने यह भी बताया कि अगर चुनी जाती हैं तो न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के साथ कैसे काम करेंगी। उन्होंने कहा कि वे लोगों को सुरक्षित रखने पर ध्यान देने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ काम करने को तैयार हैं। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि अटॉर्नी जनरल स्वतंत्र रूप से चुने जाते हैं। उन्होंने माना कि असहमति होगी, लेकिन कहा कि वे ऑफिस की शक्तियों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने कहा कि मुझे अटॉर्नी जनरल बनने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN