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मोहम्मद रफी के 7 बच्चे थे, लेकिन उनमें से किसी ने कभी सिंगिंग में अपना करियर नहीं बनाया। आखिर क्या वजह रही होगी इसके पीछे, यह आपको बताते हैं।

मोहम्मद रफी उन दिग्गज सिंगर्स में से एक थे जिनकी आवाज सुनने के लिए उनके फैंस बेसब्री से इंतजार करते थे। हर म्यूजिक डायरेक्टर अपने गाने में उनकी आवाज चाहता था और जिस एक्टर के लिए वह गाते थे उसके उस गाने को सुपरहिट बना देते थे। रफी साहब ने कई समय तक म्यूजिक इंडस्ट्री में राज किया, लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि उनके बच्चों ने कभी सिंगिंग में अपना करियर क्यों नहीं बनाया।

मोहम्मद रफी की पत्नी और बच्चे

बता दें कि मोहम्मद रफी ने 2 शादियां की थी। पहली पत्नी थीं बशीरा जिनसे वह अलग हो गए थे क्योंकि बशीरा, लाहौर छोड़कर रफी के साथ भारत नहीं आना चाहती थीं। इसके बाद मोहम्मद रफी ने बिलकिस बानो से निकाह किया। पहली शादी से उनका बेटा सईद हुआ। वहीं दूसरी बीवी के साथ उनक 3 बेटियां और 3 बेटे रहे। रफी साहब के 7 बच्चे थे, लेकिन किसी ने भी अपने पिता की तरह सिंगिंग में करियर नहीं बनाया।

किस वजह से बच्चों को दूर रखा सिंगिंग से

दरअसल, मोहम्मद रफी पर लिखी किताब मोहम्मद रफी- माय अब्बा में उनकी बहू यास्मीन खालिद ने इस बारे में बताया है। यास्मीन ने बताया कि रफी साहब कभी नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे सिंगिंग में अपना प्रोफेशन बनाएं इसलिए उन्होंने बच्चों को पहले ही बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाया। वह कहते थे कि पर वाले का उन पर करम है, लेकिन उन्हें नहीं लगता था कि उनके बच्चे वो कर पाएंगे जो उन्होंने किया है। उन्हें लगा था कि उनके बच्चों को एक प्रेशर झेलना पड़ेगा जो वह कभी नहीं चाहते थे। लोग बच्चों को फिर कम्पेयर करते इसलिए उन्होंने इससे बच्चों को दूर रखा।

रफी काफी सिंपल इंसान थे

यास्मीन ने यह भी बताया था कि रफी साहब पर्सनल लाइफ में काफी शांत थे। वह रोज सुबह 5 बजे उठते थे और 2 घंटे रियाज करते थे। उन्हें घर का खाना पसंद था। वह 10 बजे सो जाते थे।वह मीडिया इंटरव्यूज से झिझकते थे। वह बोलते थे कि मैं काफी आम इंसान हूं और मेरे पास उन्हें बताने के लिए कुछ मसालेदार नहीं है।

जल्द दुनिया को कह दिया था अलविदा

मोहम्मद रफी जल्द इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे। 55 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका आखिरी गाना शाम फिर क्यों उदास है दोस्त था। उन्होंने इस गाने को मौत से कुछ घंटे पहले रिकॉर्ड किया था।

वहीं जब मोहम्मद रफी की मौत हुई थी तब उन्हें आखिरी विदाई देने 10 हजार लोग आए थे जबकि उस दिन भारी बारिश हो रही थी। इतने लोगों को साथ देखकर सब हैरान थे। लेकिन इससे यह पता चल गया था कि रफी साहब से सब कितना प्यार करते थे।

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