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पाकिस्तान में भी होगा ‘कॉकरोच’ और GenZ आंदोलन?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

PoK में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि 60% से ज्यादा युवा आबादी और करीब 7 करोड़ Gen Z वाले पाकिस्तान में कोई देशव्यापी युवा क्रांति क्यों नहीं हो पा रही है?

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुनियादी सुविधाओं, महंगाई और स्थानीय चुनावों में धांधली को लेकर भड़का जन-आक्रोश हिंसक रूप ले चुका है। हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान 40 से ज्यादा नागरिकों की मौत के बाद भी पाकिस्तानी विदेश और रक्षा मंत्रालय की ओर से प्रदर्शनकारियों को “भारत की तरह दुश्मन” करार दिया गया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के इस रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस्लामाबाद के अत्याचारों पर जवाबदेही तय करने का आह्वान किया है।

लेकिन इस बड़े घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि 60% से ज्यादा युवा आबादी और करीब 7 करोड़ Gen Z वाले पाकिस्तान में कोई देशव्यापी युवा क्रांति क्यों नहीं हो पा रही है?

‘हाइब्रिड शासन’ और म्यूजिकल चेयर्स का खेल

पाकिस्तान में असंतोष को दबाने और राष्ट्रीय स्तर पर किसी एक बड़े विरोध को पनपने न देने के पीछे वहां का राजनीतिक ढांचा है, जिसे विशेषज्ञ “हाइब्रिड शासन” कहते हैं।

पाकिस्तान की सेना आधिकारिक तौर पर गैर-राजनीतिक होने का नाटक करती है, लेकिन असल में सारी शक्तिी उसी के पास है। हालिया संवैधानिक संशोधनों के जरिए सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाया गया और उसे पुलिस केस से आजीवन छूट दी गई।

जनता का गुस्सा जब एक नागरिक सरकार से बढ़ता है, तो एस्टेब्लिशमेंट यानी सेना चेहरे बदल देती है- कभी शरीफ परिवार, कभी पीपीपी, तो कभी इमरान खान।

जनता का गुस्सा सेना तक पहुंचने के बजाय तत्कालीन प्रधानमंत्री या सरकार पर शिफ्ट हो जाता है, जिससे युवा पीढ़ी के सामने कोई स्पष्ट और सुलभ राजनीतिक लक्ष्य नहीं बचता।

बिखरा हुआ और विभाजित विरोध

पाकिस्तान में असंतोष की कमी नहीं है, लेकिन यह भूगोल, विचारधारा और उद्देश्यों के आधार पर बुरी तरह बिखरा हुआ है।

पाकिस्तान में असंतोष के अलग-अलग रूप है:

  • बलूचिस्तान (BLA): अलगाववाद की जंग
  • केपीके / टीटीपी: शरिया कानून की मांग
  • पंजाब/कराची: बेरोजगारी और महंगाई की शिकायत

लाहौर का एक बेरोजगार छात्र, बलूचिस्तान का एक राष्ट्रवादी और टीटीपी का समर्थक- ये तीनों कभी एक झंडे के नीचे एकत्र नहीं हो सकते। यही वजह है कि सेना को एक एकीकृत क्रांति से नहीं लड़ना पड़ता, बल्कि वह हर इलाके के असंतोष को अलग-अलग कैटेदरी- आतंकवाद, अलगाववाद और देशद्रोह में बांटकर आसानी से दबा देती है।

‘इमरान खान का अंजाम’ और खौफ का माहौल

पाकिस्तान के युवाओं ने इमरान खान के मामले से एक कड़वा सबक सीखा है।

जब देश का सबसे लोकप्रिय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाने वाला राजनेता (इमरान खान) मिलिट्री एस्टेब्लिशमेंट से सीधा मुकाबला करने पर जेल में डाला जा सकता है और उसकी पार्टी को कुचला जा सकता है, तो एक आम युवा के पास खुद को बचाने का क्या मौका है?”

2011 से 2024 के बीच 10,000 से ज्यादा लोगों के गायब होने के मामले दर्ज हैं। बलूच और पश्तून कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और छात्रों का अचानक गायब हो जाना और बाद में प्रताड़ित शव मिलना आम बात है।

राजद्रोह के मुकदमे, मीडिया पर सेंसरशिप, इंटरनेट ब्लैकआउट और ‘देशद्रोही’ का ठप्पा लगाने की स्थायी धमकी ने युवाओं को खौफ में जीने पर मजबूर कर दिया है।

भारत बनाम पाकिस्तान: युवा आबादी में अंतर

मानक भारत पाकिस्तान
14-29 आयु वर्ग (Gen Z) आबादी 39.1 से 40.7 करोड़ (दुनिया में सबसे ज्यादा) 6.5 से 7.0 करोड़
कुल आबादी में युवाओं का हिस्सा करीब 27-30% करीब 60% (30 साल से कम)
आंदोलन का तरीका लोकतांत्रिक संस्थाओं और सड़कों के जरिए नीतिगत सुधार हाइब्रिड शासन और दमन के कारण बिखरा हुआ और दबाया गया असंतोष

सिर्फ ‘जिंदा रहना’ ही सबसे बड़ी चुनौती

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने हाल ही में स्वीकार किया था कि ‘अगर यह Gen Z एकजुट हो जाए, तो वे पूरे तंत्र को उलट सकते हैं।’

लेकिन हकीकत यही है कि पाकिस्तान की सत्ता संरचना ने दशकों की मेहनत से अपने युवाओं को विभाजित, निराश और भयभीत रखा है। दुनिया भर में जहां युवा सड़कें नापकर अपना भविष्य मांग रहे हैं, वहीं पाकिस्तान में युवाओं के लिए सिर्फ ‘जिंदा रहना’ ही सबसे बड़ी चुनौती बना दिया गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN